भारत लौटी गुरप्रीत बोली मरते दम तक नहीं भूल सकती वो 4 महीने
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जर्मनी के विनसेम (सीरियाई) शरणार्थी कैंप में चार माह से रह रही गुरप्रीत और उसकी आठ वर्षीय बेटी तियांशी बृहस्पतिवार को अपने घर वापस लौटी।
मुख्य संसदीय सचिव सीमा त्रिखा के घर पहुंची गुरप्रीत ने उसे वापस लाने के लिए विदेशमंत्री सुषमा स्वराज और भारत सरकार को धन्यवाद कहा।
उन्हें सास-ससुर से मिलवाने के नाम पर शरणार्थी कैंप पहुंचाने वालों के खिलाफ वह कानूनी कार्रवाई कर जेल भिजवाने की तैयारी कर रही हैं।
करीब सवा तीन बजे दोपहर मुख्य संसदीय सचिव के घर पहुंची गुरप्रीत ने मीडिया को अपनी आपबीती सुनाई। गुरप्रीत के मुताबिक उसका विवाह 2005 में मनोज से हुआ था।
मनोज सेक्टर 14 में एक प्रॉपर्टी डीलर के यहां काम करता था। जर्मनी में रहने वाले सास-ससुर खर्च और जमीन-जायदाद की देखभाल के लिए मनोज को धन भेजते थे।
विक्की शर्मा उसे फ्रैंकफुर्त (जर्मनी) ले गया
उसका आरोप है कि इस रुपये को लेकर ननद और ननदोई विश्वनाथ खन्ना व दौलतराम कोचर के साथ पति का अक्सर झगड़ा भी होता था, 2010 में तो दोनों ने मनोज को देख लेने की धमकी भी दी थी।
इसके कुछ समय बाद ही मनोज लापता हो गया था। गुरप्रीत ने ननदोईयों पर पति का अपहरण कर हत्या करवाने का भी आरोप लगाया। मनोज के लापता होने के बाद उसने ननद ननदोई के खिलाफ कोर्ट में केस दायर किया था।
ननदोई विश्वनाथ खन्ना और दौलत राम कोचर ने केस वापस लेने की शर्त पर उसे सास, ससुर के पास जर्मनी भिजवाने का झांसा दिया। उसने केस वापस ले लिया था।
बताया कि सितंबर 2015 में एजेंट विकास उर्फ विक्की शर्मा उसे दिल्ली, मुंबई, दुबई, मिलान होते हुए फ्रैंकफुर्त (जर्मनी) ले गया। यहां उसका पासपोर्ट व अन्य दस्तावेज लेकर उसे विनसेम शरणार्थी कैंप के पास छोड़कर फरार हो गया।
वीडियो भेजकर भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई थी
तब से वह कैंप में नारकीय जीवन जी रही थी। जनवरी में उसने स्मार्टफोन खरीदा और मदद का वीडियो बनाकर मकान मालिक अजय को ईमेल किया। जर्मन सरकार इसलिए नहीं कर रही थी मदद अजय ने इस वीडियो को 29 जनवरी को सोशलसाइट पर डाला और भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई थी।
मामला संज्ञान में आने पर विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने जर्मनी में राजदूत से संपर्क कर गुरप्रीत की मदद करने का निर्देश दिया। भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने बुधवार शाम उसे विनसेम कैंप से ढूंढ निकाला।
बृहस्पतिवार दोपहर बाद वह अपने शहर पहुंची। जर्मनी के विनसेम कैंप में गुरप्रीत खुद को अफगानिस्तान का नागरिक बताकर शरणार्थी बनी थी। परेशान होकर जब वह खुद को भारतीय होने की बात कह अधिकारियों से मदद मांगती तो वह उससे नागरिकता का दस्तावेज मांगते।
कैंप की जिंदगी याद कर सिहर उठती है गुरप्रीत
पासपोर्ट व अन्य दस्तावेज विकास उर्फ विक्की ले गया था इसलिए वह जर्मनी अधिकारियों के सामने खुद को भारतीय सिद्ध नहीं कर सकी थी। विदेशमंत्री सुषमा स्वराज के निर्देश जर्मनी में भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने उसे कैंप से निकलवाया।
कैंप की जिंदगी याद कर सिहर उठती है गुरप्रीत भारत लौटने पर खुश गुरप्रीत शरणार्थी कैंप का सवाल आते ही सिहर जाती है। आंखों में आंसू और भर्राई आवाज में बोली कि जिंदगी के यह चार माह मरते दम तक नहीं भूल सकती।
मांसाहारी खाना दिया जाता, यदि मना करती तो ढेर सारे सवाल। ज्यादातर शरणार्थी दूसरे धर्म के, वह कभी धर्मांतरण का दबाव डालते कभी बदतमीजी करते।
आठ साल की बेटी के साथ शरणार्थी कैंप में बिताए गए वह चार माह जीवन का सबसे खराब अनुभव रहे। आरोपियों को जेल भिजवाने की ठानी वापस लाने पर भारत सरकार का शुक्र अदा करते हुए गुरप्रीत ने उम्मीद जाहिर की कि उसे नारप्तकीय जीवन में ढकेलने वालों के खिलाफ जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
सुसरालियों ने कहा कि वह भारत लौटी तो उसे मरवा दिया जाएगा
विधायक सीमा त्रिखा ने कहा कि बहादुर बेटी को हर संभव मदद की जाएगी। गुरप्रीत ने बताया कि जर्मनी में भारतीय दूतावास के अधिकारी प्रदीप राजपुरोहित ने उनसे सास-ससुर की फोटो मांगी है।
राजपुरोहित ने उन्हें आश्वासन दिया है कि सास-ससुर जर्मनी में कहीं भी होंगे उन्हें खोज कर भारत डिपोर्ट कराया जाएगार। गुरप्रीत ने आरोप लगाया कि बुधवार शाम जर्मनी के भारतीय दूतावास में भी ससुरालियों ने उसे फोन कर जान से मरवाने की धमकी दी थी।
उसका कहना है कि सुसरालियों ने कहा कि यदि वह भारत लौटी तो उसे मरवा दिया जाएगा। विधायक सीमा त्रिखा ने गुरप्रीत और उसके परिवार वालों को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।
गुरप्रीत ने बताया कि वह सास-ससुर से कभी भी नहीं मिली
गुरप्रीत के जर्मनी जाने और वहां से सुरक्षित वापस लौटने के अलावा घटनाक्रम साफ नहीं है। पुलिस को कई अनुत्तरित सवालों के जवाब ढूंढने हैं। गुरप्रीत ने बताया कि वह सास-ससुर से कभी भी नहीं मिली।
पिता दीदार सिंह ने बताया कि मनोज-गुरप्रीत के विवाह में भी सास-ससुर शामिल नहीं हुए थे। सवाल है कि जिन सास-ससुर से गुरप्रीत कभी मिली नहीं और न ही उनका पता जानती थी उनसे मिलने वह जर्मनी क्यों गई?
पीड़िता ने पति के गायब होने की शिकायत अप्रैल 2015 में पुलिस कमिश्नर के यहां की थी। ननदोई पर पति को गायब कर हत्या करवाने का आरोप लगा रही गुरप्रीत यह नहीं बता पातीं कि इतने साल तक उन्होंने रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज कराई।
भाई और मां बेटी से मिलने क्यों नहीं आए?
गुरप्रीत ने बताया कि उसका भाई एनआईटी पांच में रहता है जबकि पिता विकासपुरी दिल्ली में। जर्मनी से गुरप्रीत ने मकान मालिक अजय को मदद का वीडियो सेंड किया, यह वीडियो वह अपने भाई, पिता व अन्य को भी भेज सकती थी। क्या उसके पास पिता और भाई का फोन नबंर या ईमेल नहीं था।
क्या वजह थी कि शहर में ही भाई का घर होने के बावजूद गुरप्रीत 2010 से अजय के यहां किराए पर रह रही थी। बेटी के वापस आने की खुशी सबसे ज्यादा मां को होती लेकिन विधायक सीमा त्रिखा के यहां सिर्फ पिता दीदार सिंह ही पहुंचे, भाई और मां नहीं आए।
दीदार सिंह ने भी कुछ बोलने से इनकार किया। गुरप्रीत के ससुराल वालों का पक्ष सामने आने पर ही घटनाक्रम साफ हो सकता है।