शिष्या से दुष्कर्म के आरोपी दाती महाराज उर्फ मदन लाल के मामले में अदालत ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस को कठघरे में खड़ा किया। अदालत ने जांच पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इतनी लंबी पूछताछ के बाद भी दाती को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया? इस सवाल का जांच अधिकारी महिला एसआई के पास कोई जवाब नहीं था और वह गर्दन झुकाए चुपचाप खड़ी रही। कोर्ट ने डीसीपी क्राइम को खुद जांच की निगरानी करने और हर सप्ताह रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
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- फोटो : अमर उजाला
कोर्ट ने यह निर्देश पीड़िता के उस आवेदन पर सुनवाई करते हुए दिया है, जिसमें उसने पुलिस पर जांच में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया था। कोर्ट ने आवेदन की प्रति खोने पर भी पुलिस को कड़ी फटकार लगाई थी। साकेत जिला अदालत की सीएमएम साउथ पूजा तलवार ने दाती मामले की जांच की दशा-दिशा पर भी नाराजगी जताई। मामले की अगली सुनवाई तीन जुलाई को होगी।
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कोर्ट ने जांच अधिकारी एसआई आशा से पूछा कि जब तलाशी के दौरान आरोपी दिल्ली व राजस्थान में नहीं मिला तो उसे जांच में शामिल होने के लिए कैसे बुलाया गया। क्या पुलिस के पास उसका कोई तीसरा पता था, जिस पर उसे सूचना दी गई। वह फरार रहा तो जांच में शामिल होने पर उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।
कोर्ट के समक्ष राजस्थान महिला आयोग की रिपोर्ट पेश कर पीड़िता के वकील प्रदीप तिवारी ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए दाती महाराज को बचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महिला आयोग की टीम ने पाली स्थित गुरुकुल में छापा मारा था। उस दौरान कई चीजें गलत पाई गई थीं। पीड़िता ने दक्षिण दिल्ली के फतेहपुर बेरी थाने में छह जून को शिकायत देकर दाती मदन लाल समेत पांच लोगों पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया था। पीड़िता का कहना था कि मदन लाल ने उससे जनवरी व मार्च 2016 में दिल्ली स्थित आश्रम व राजस्थान स्थित गुरुकुल आश्वासन बाल ग्राम में दुष्कर्म किया था।
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फाइल फोटो
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दिल्ली पुलिस ने दाती मदन लाल के मामले में सोमवार को कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश कर दी। पुलिस ने कहा कि मदन लाल से पूछताछ जारी है और मामले का खुलासा करने की पूरी कोशिश की जा रही है। मामले को अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाया जाएगा। पीड़िता ने पुलिस पर जांच में लापरवाही करने का आरोप लगाया था। फिलहाल पुलिस ने पीड़िता द्वारा दायर आवेदन के गुम होने पर चुप्पी साघ ली है। साकेत जिला अदालत के महानगर दंडाधिकारी अनुराग दास के समक्ष जांच अधिकारी एसआई आशा ने स्टेटस रिपोर्ट में कहा कि आरोप दो साल पुराने हैं।