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Cyber Crime: दिल्ली में सबसे बड़ी साइबर ठगी, रिटायर्ड बैंकर को 6 सप्ताह तक डिजिटल अरेस्ट कर 22.92 करोड़ उड़ाये
Sat, 25 Oct 2025 02:04 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 25 Oct 2025 02:04 AM IST
सार
अपराधियों ने पीड़ित को छह सप्ताह तक डिजिटल कैद में रखा। पुलिस ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से अशोक, मोहित, अमित, समरजीत और कनकपाल को गिरफ्तार किया है।
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Cyber crime
- फोटो : Freepik
विस्तार
दक्षिण दिल्ली के गुलमोहर पार्क में रहने वाले सेवानिवृत्त बैंकर को डिजिटल अरेस्ट कर 22.92 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया है। अपराधियों ने पीड़ित को छह सप्ताह तक डिजिटल कैद में रखा। पुलिस ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से अशोक, मोहित, अमित, समरजीत और कनकपाल को गिरफ्तार किया है।
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दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें तीन बैंक खाता धारक, एक बिचौलिया और एक एनजीओ संचालक शामिल है। पुलिस का कहना है कि यह दिल्ली का अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल अरेस्ट का मामला है और इसके तार कंबोडिया में बैठे चीनी साइबर अपराधियों से जुड़े हैं।
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ठगों ने पहले एक महिला के जरिये मल्होत्रा को फंसाया, जिसने खुद को एक दूरसंचार कंपनी की वरिष्ठ अधिकारी बताया। उसने आरोप लगाया कि पीड़ित का मोबाइल नंबर अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहा है। इसके बाद मुंबई पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई अधिकारी बनकर कई अन्य ठग वीडियो कॉल पर सामने आए और जांच के नाम पर उन्हें मानसिक रूप से कैद कर लिया।
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पुलिस के मुताबिक, ठग हर दो घंटे में वीडियो कॉल करते थे ताकि पीड़ित कहीं संपर्क न कर सके। उन्हें गोपनीयता की शपथ के नाम पर एक सादे कागज पर हस्ताक्षर करवा कर उसकी फोटो व्हाट्सएप पर मंगाई गई थी।
जांच में खुलासा हुआ है कि ठगों ने उत्तराखंड के एक गांव में एनजीओ चलाने वाले कनकपाल को कमीशन के लालच में अपने नेटवर्क से जोड़ा। ठगी के पैसे उसके एनजीओ के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए ताकि विदेशी फंडिंग जैसी वैधता का आभास दिया जा सके।
पुलिस टीम ने अब तक 2,500 बैंक खातों को फ्रीज किया है, जिनमें से करीब 3 करोड़ रुपये की राशि रोकी गई है। बताया जा रहा है कि यह गिरोह दक्षिण-पूर्व एशिया से संचालित होता है और भारत में अपने एजेंटों के जरिये काम करता है। कंबोडिया में बैठे ठग बैंक खातों और एनजीओ के नेटवर्क से पैसे बाहर भेजते हैं। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह ने देशभर में कई लोगों को इसी तरह डिजिटल अरेस्ट कर ठगा है।