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'जज साहब! हमने अपनी मर्जी से बनाए थे संबंध'

Wed, 05 Nov 2014 01:06 AM IST
Updated Wed, 05 Nov 2014 01:06 AM IST
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victim denies with rape charges in court

दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की से रेप के आरोपी मोनू को जमानत प्रदान कर दी। दरअसल लड़की ने अपने बयानों में कहा कि वह आरोपी से प्यार करती है और दोनों के आपसी रजामंदी से संबंध बने थे।

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न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने अपने फैसले में बचाव पक्ष के अधिवक्ता गौरव बंसल के उस तर्क को स्वीकार कर लिया कि पुलिस ने उनके मुवक्किल को लड़की की मां के इशारे पर फर्जी मामले में फंसाया है।
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अदालत ने आरोपी मोनू की जमानत 25 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके व एक अन्य जमानती पेश करने की शर्त पर मंजूर कर ली।

15 साल की है लड़की

victim denies with rape charges in court

इससे पूर्व अधिवक्ता बंसल ने अदालत को बताया कि कथित रूप से पीड़ित 15 वर्षीय लड़की व मोनू प्यार करते है और विवाह करना चाहते है। लेकिन पुलिस ने मां की शिकायत पर रेप व पोक्सो में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया जबकि लड़की ने आरोप से इंकार किया था।

उन्होंने जांच अधिकारी ने रिश्वत की राशि न मिलने पर मामला बना दिया। उन्होंने कहा कि लड़की ने मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए धारा 164 के बयानों में साफ कहा है कि उससे रेप नहीं हुआ बल्कि मोनू व उसके बीच शारीरिक संबध रजामंदी से बने थे और वह मोनू से विवाह करना चाहती है।

उन्होंने ऐसे में उनके मुवक्किल के खिलाफ केस नहीं बनता अत: जमानत मंजूर की जाए।

बच्ची से दुष्कर्म में सजा बरकरार

victim denies with rape charges in court

दिल्ली हाईकोर्ट ने आदर्श नगर थाना क्षेत्र में मानसिक रूप से कमजोर सात साल की बच्ची से दुष्कर्म में दोषी विनोद की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने विनोद की अपील खारिज करते हुए कहा कि उसने असहाय और मासूम का अनुचित फायदा उठाया है और वह किसी भी प्रकार की सहानुभूति का हकदार नहीं है।

न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराज योग और न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की खंडपीठ ने 27 अक्तूबर को दिए फैसले में कहा कि पेश तथ्यों और साक्ष्यों से स्पष्ट है कि विनोद घटना के तुरंत बाद मौके पर ही पकड़ा गया था। घटना के बाद पीड़िता ने विनोद का नाम लिया। इसके अलावा चिकित्सा रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि हुई है।

कोर्ट ने कहा कि उनकी नजर में ट्रायल कोर्ट में सभी तथ्यों का अध्ययन करने के बाद फैसला दिया है और उसमें हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। पेश मामले के अनुसार, 16 अक्तूबर 2011 को पुलिस ने दुष्कर्म के आरोप में विनोद को गिरफ्तार किया था।

निचली अदालत ने विनोद को दोषी ठहराते हुए 4 अप्रैल 13 को आजीवन कारावास और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। विनोद ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

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पत्नी की हत्या के दोषी की सजा बहाल

victim denies with rape charges in court

हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के मामले में दीपक को मिली आजीवन कारावास की सजा को बहाल रखा है। अदालत ने उसके इस तर्क को खारिज कर दिया कि पत्नी रेखा ने मानसिक दबाव में आत्महत्या की है।

न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराज योग और न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की खंडपीठ ने तीन नवंबर को दिए फैसले में कहा कि रेखा छोटी सी बात को लेकर आत्महत्या नहीं कर सकती। खंडपीठ ने कहा कि महिला ने घटना के तुरंत बाद दो बयान दिए थे। उनमें कोई विरोधाभास नहीं है।

स्पष्ट है कि आरोपी ने उसके चरित्र पर संदेह के आधार पर ही केरोसिन डालकर उसे आग के हवाले कर दिया। कोर्ट ने कहा कि साक्ष्यों से स्पष्ट है कि दीपक अपनी पत्नी को दहेज के लिए भी प्रताड़ित करता था।

पेश मामले के अनुसार, रेखा का दीपक से 27 जून 2005 को विवाह हुआ था। शादी के बाद से मुंडका निवासी दीपक पत्नी को दहेज की मांग को लेकर मारपीट करता रहता था। 12 अगस्त 2011 को उसने रेखा को आग के हवाले कर दिया। महिला को रोहतक स्थित पीजीआई में भर्ती करवाया गया। करीब 34 दिन बाद रेखा ने दम तोड़ दिया। निचली अदालत ने इस वर्ष 12 अगस्त को उसे आजीवन कारावास व 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

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