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मोती गोयल को गोली मारने वाले दो शूटर गिरफ्तार, 10 लाख रुपये में ली थी सुपारी

Wed, 25 Apr 2018 09:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Wed, 25 Apr 2018 09:43 AM IST
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Two shooters who shot Moti Goyal for 10 lakh rupees, arrested by police
accused in Moti Goel murder case - फोटो : राजन राय

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भूमाफिया मोती गोयल हत्याकांड में थाना सेक्टर-49 पुलिस ने उसे गोली मारने वाले दोनों शूटरों को गिरफ्तार कर लिया है। कनारसी ग्रेटर नोएडा निवासी पूर्व प्रधान हरेंद्र ने दोनों शूटरों को 10 लाख रुपये में मोती की सुपारी दी थी। उसी ने बदमाशों को हत्या में प्रयुक्त .30 बोर की पिस्टल और बाइक दी थी। पुलिस हरेंद्र की तलाश कर रही है। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि हरेंद्र ने मोती की हत्या क्यों या किसके कहने पर कराई। गिरफ्तार शूटरों से हत्या में प्रयुक्त .30 बोर की पिस्टल और एक तमंचा बरामद हुआ है।

मोती की हत्या 16 अप्रैल को नोएडा के बरौला गांव स्थित उसके प्लॉट पर की गई थी। पल्सर बाइक सवार दो शूटरों ने उसे सात गोलियां मारी थीं। मोती की हत्या में गिरफ्तार शूटरों की पहचान सुनपुरा इकोटेक-तीन निवासी अमित पहलवान और प्रेमपुरी दनकौर निवासी राहुल के रूप में हुई है।
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थाना सेक्टर-49 प्रभारी निरीक्षक पंकज पंत की टीम ने दोनों आरोपियों को सोमवार रात बरौला हनुमान मंदिर के पास से चेकिंग के दौरान गिरफ्तार किया है। दोनों हरेंद्र से सुपारी की बकाया राशि लेने आ रहे थे। पुलिस द्वारा रोके जाने पर हरेंद्र और दोनों शूटरों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने दोनों शूटरों को पकड़ लिया, लेकिन हरेंद्र फायरिंग करता हुआ बाइक से भाग निकला।
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एसपी सिटी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि अमित ने ही सात गोलियां मारी थीं। राहुल, मोती के प्लॉट के सामने बाइक लेकर खड़ा था। हरेंद्र प्रधान ने इन्हें मोती की हत्या से पहले 50 हजार रुपये दिए थे। हरेंद्र पर लूट, मारपीट, हत्या का प्रयास व गुंडा एक्ट आदि के एक दर्जन मामले दर्ज हैं। वह दनकौर थाने का हिस्ट्रीशीटर बदमाश है। उसे जिला बदर भी किया जा चुका है। अमित का कोई आपराधिक इतिहास नहीं मिला है।

दो अप्रैल से मोती गोयल की रैकी कर रहे थे आरोपी

Two shooters who shot Moti Goyal for 10 lakh rupees, arrested by police
moti goel murder case - फोटो : lal singh

राहुल ने दो साल पहले दनकौर में ही अपने साले की हत्या की थी। राहुल के दो भाई भी अपराधी हैं। उनके खिलाफ संगीन मामले दर्ज हैं। गिरफ्तार अमित व राहुल किस गैंग के लिए काम करते हैं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही इनका आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा है।

एसपी सिटी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि हरेंद्र प्रधान और राहुल दोनों दनकौर के रहने वाले हैं। अमित से हरेंद्र की मुलाकात दो माह पहले सूरजपुर कोर्ट में हुई थी। हरेंद्र दोनों शूटरों के साथ 2 अप्रैल से ही मोती की रेकी कर रहा था। ये लोग लगातार उसकी मूवमेंट पर नजर रख रहे थे। हत्या वाले दिन भी तीनों आरोपियों ने गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट से मोती गोयल का पीछा शुरू कर दिया था।

गाजियाबाद में होनी थी हत्या
क्षेत्राधिकारी तृतीय श्वेताभ पांडेय ने बताया कि मोती गोयल की हत्या पहले गाजियाबाद में उसके घर के पास नवयुग मार्केट में ही की जानी थी। हालांकि मार्केट में भीड़भाड़ होने की वजह से शूटरों को मौका नहीं मिल पाया। लिहाजा, शूटर बाइक से और हरेंद्र अलग स्विफ्ट कार में मोती का पीछा करते हुए नोएडा के बरौला गांव स्थित उसके प्लॉट पर पहुंच गए। यहां पहुंचने के बाद मोती जैसे ही प्लॉट में पहुंचा, शूटरों ने उसे गोली मार दी।


 

हरेंद्र ने कहा था सिर पर गोली लगनी चाहिए

Two shooters who shot Moti Goyal for 10 lakh rupees, arrested by police
moti goel murder case - फोटो : lal singh

पूछताछ में शूटरों ने बताया कि हरेंद्र ने सुपारी देते वक्त शर्त रखी थी कि मोती के सिर में गोलियां लगनी चाहिए। इसलिए उन लोगों द्वारा चलाई गई सात में से चार गोली मोती के सिर पर चेहरे पर लगी थी। हरेंद्र कुछ दूर अपनी कार में बैठा सब देख रहा था।

हत्या के बाद बढ़ाई सुपारी की रकम
पुलिस के अनुसार हरेंद्र ने शूटरों को मोती को दिखाकर और उसकी इनोवा कार का नंबर बताकर पहचान कराई थी। उसने शूटरों को मोती के बारे में नहीं बताया था। हत्या की मीडिया में खबर आने के बाद शूटरों को पता चला कि उन्होंने किसकी हत्या की है। इसके बाद शूटरों की हालत खराब हो गई। शूटरों ने बताया कि जब उन्होंने मोती की हत्या के लिए पिस्टल निकाली तो मोती ने उन्हें रुकने के लिए कहा था। शूटरों के अनुसार अगर उन्हें पहले पता होता तो वह मोती की हत्या करने की जगह उससे एक-दो करोड़ रुपये ले लेते। हालांकि इसके बाद शूटरों ने हरेंद्र से सुपारी की रकम बढ़ाने को कहा तो वह 25 लाख रुपये देने को तैयार हो गया था।

पुलिस को भ्रमित करने का किया प्रयास
गिरफ्तार शूटरों ने सोमवार को पकड़े जाने के बाद खुद को मोती के बेटे उत्कर्ष द्वारा नामजद कराए गए दो भाइयों विजय व विक्रम का आदमी बता दिया। हालांकि उनकी कहानी फिट नहीं बैठ रही थी। पुलिस ने काफी देर तक सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने हरेंद्र का नाम लिया। शूटरों ने बताया कि हत्या के बाद हरेंद्र ने उन्हें पहले दिल्ली में रखा और फिर गुरुग्राम भेज दिया था।

12 से 14 लाख रुपये की है पिस्टल

Two shooters who shot Moti Goyal for 10 lakh rupees, arrested by police
moti goel murder case - फोटो : lal singh

शूटरों से बरामद .30 बोर की पिस्टल रूस में बनी टोका रेव पिस्टल है। 1962 के बाद से ये बननी बंद हो चुकी है। ये पिस्टल पहले सेना और अन्य फोर्स में सप्लाई होती थी। बाद में उसे सेना से सेवानिवृत्त लोगों समेत कुछ खास लोगों को जारी कर दिया गया था। भारतीय बाजार में इसकी मौजूदा कीमत 12 से 14 लाख रुपये है। पुलिस के अनुसार बरामद पिस्टल का नंबर हटाने का प्रयास किया गया है। पिस्टल को फॉरेंसिक लैब में जांच के लिए भेजा जा रहा है। एफएसएल रिपोर्ट में पिस्टल का सही नंबर पता चलने पर मालूम होगा कि वह किसकी है।

नामजद आरोपी अनिल और ब्रजपाल की भूमिका का संदेह
पुलिस के अनुसार हरेंद्र के पीछे नामजद आरोपी अनिल और ब्रजपाल की भूमिका हो सकती है। हो सकता है हरेंद्र ने इन्हीं के कहने पर शूटरों को सुपारी दी हो। मोती के बरौला के प्लॉट की कीमत लगभग 14.5 करोड़ रुपये है। कुछ साल पहले अनिल ने ये प्लॉट अपने ससुर ओमपाल के नाम 90 लाख रुपये में फर्जी रजिस्ट्री करा दी थी। ओमपाल दिल्ली के गाजियाबाद गांव में प्रधान रह चुका है। वर्ष 2015 में मोती पर हुए हमले में अनिल, ओमपाल का बेटा, अनिल का दोस्त ओमपाल पहलवान और ब्रजपाल आदि शामिल रह चुके हैं।

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