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ऑब्जरवेशन होम के ताले तोड़कर तीन किशोर फरार, दो हत्या आरोपी

Sat, 16 Apr 2016 09:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Sat, 16 Apr 2016 09:23 AM IST
सार

  • दो हत्या के आरोप में और एक झपटमारी के केस में भेजा गया था होम 
  • ऑब्जरवेशन होम के ताले तोड़कर तीन किशोर फरार 
  • दो हत्या के आरोप में और एक झपटमारी के केस में भेजा गया था होम
  • ड्यूटी पर तैनात संतरी संजीव कुमार को पुलिस ने हिरासत में लिया 

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three minors ran away from jain in faridabad

विस्तार

एनआईटी पांच स्थित ऑब्जरवेशन होम में रह रहे तीन किशोर संतरी की लापरवाही से ताले तोड़ और खोल कर फरार हो गए। इनमें से दो हत्या के आरोप में और एक झपटमारी के आरोप में यहां रखा गया था।

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ऑब्जवरेशन होम सुपरिंटेंडेंट दिनेश यादव की शिकायत पर केस दर्ज कर कोतवाली पुलिस ने संतरी संजीव कुमार को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। पलवल के रहने वाले तीनों किशोरों की तलाश पुलिस ने शुरू कर दी है।
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पुलिस के मुताबिक हत्या के आरोप में पकड़े गए दो किशोरों को आठ माह पहले अदालत के निर्देश पर ऑब्जरवेशन होम भेजा गया था। तीसरा किशोर झपटमारी के आरोप में एक माह पहले ही भेजा गया था।
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होम के अधीक्षक दिनेश यादव का कहना है कि अन्य दिनों की तरह तीनों किशोरों को रात को उनके बैरक में भेज कर बाहर से ताला लगा दिया गया था। तड़के सुबह पौने चार बजे के करीब तीनों ने बैरक का ताला तोड़ा और परिसर में आ गए।

मुख्य दरवाजे के तालों को चाभी से खोल कर तीनों बाहर निकल फरार हो गए।  सुबह बच्चों को बैरक से बाहर निकालते समय तीनों के गायब होने की जानकारी हुई। घटना में रात ड्यूटी पर तैनात संतरी की लापरवाही सामने आई है।

दिनेश यादव का मानना है कि संतरी संजीव कुमार निगरानी करने की बजाय या तो सो गया होगा या फिर इधर उधर चला गया होगा। मुख्य गेट के ताले की चाबी किशोरों के हाथ कैसे लगी, इसकी जांच की जा रही है।

एसएचओ एनआइटी थाना नरेश कुमार ने बताया कि मामला दर्ज कर ड्यूटी पर तैनात संतरी संजीव को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों किशोर अभी अपने घर नहीं पहुंचे हैं। वह शहर में ही कहीं इधर उधर भटक रहे हैं। उनके पास पैसे भी नहीं हैं, ऐसे में कहीं बाहर भागने की आशंका भी कम है। उन्होंने बताया कि तीनों की तलाश की जा रही है। 

भरोसा तो नहीं वजह 
तीन बच्चों के ऑब्जरवेशन होम से फरार होने की वजह कहीं किशोरों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा तो नहीं था। सूत्रों के मुताबिक आठ माह में दोनों किशोर होम के स्टाफ से काफी हिलमिल चुके थे। मेहनत और अच्छे काम की वजह से इन पर भरोसा किया जाने लगा था।

शायद यही वजह है कि तड़के करीब चार बजे उठे इन किशोरों के परिसर में घूमने के बावजूद किसी ने ध्यान नहीं दिया। इन तीनों को संतरी संजीव की कस्टडी में रहने वाली मुख्यद्वार की चाभियां मिल गईं।  

खोजने होंगे कई जवाब 
किशोर बैरक से बाहर निकल कर मुख्य दरवाजे तक कैसे पहुंचे। मुख्य दरवाजे पर पहले उन्होंने अंदर का और फिर बाहर का गेट कैसे खोला इन प्रश्नों के उत्तर पुलिस को खोजने होंगे।
ऑब्जरवेशन होम सूत्रों के मुताबिक बैरक से मुख्य दरवाजे तक पहुंचने के लिए कम से कम दो बाधाएं पार करनी होती हैं।

मुख्य दरवाजा दरअसल एक कमरे की तरह है इसमें दो गेट हैं। कमरे का एक गेट होम की ओर खुलता है और दूसरा बाहर की ओर। बाहर से अंदर आने के लिए पहले बाहरी दरवाजा खोला जाता है। कमरे में आने के बाद संतरी बाहरी दरवाजा बंद कर ताला डालता है।

सके बाद अंदर जाने वाले दरवाजे का ताला खोल कर होम के अंदर घुसते हैं। होम से बाहर जाने वाले के लिए इसके उलट किया जाता है। बाहरी दरवाजे की चाभियां इसी कमरे में रहती हैं। सवाल यह उठता है कि जब कमरे के दोनों दरवाजों में ताला लगा था तो कमरे के अंदर रखी चाभियों तक बच्चे कैसे पहुंचे।

कहीं ऐसा तो नहीं कि अंदर वाले दरवाजे में ताला लगाया ही नहीं गया हो। दूसरी बात यह कि मुख्य दरवाजे की चाभियां कमरे में रखी मेज की दराज में सुरक्षित ढंग से रखी जाती हैं। ऐसे में बच्चों का चाभियों तक आसानी से पहुंचना और फरार होना साजिश का अंदेशा पैदा करता है।

सीसीटीवी फुटेज से खुलेंगे राज
सूत्रों के मुताबिक ऑब्जरवेशन होम में चप्पे चप्पे की नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं यहां तक कि मुख्य दरवाजे वाले कमरे में भी कैमरे लगे हैं। इन कैमरों में रिकॉर्ड बच्चों की कारस्तानी पुलिस के लिए अहम सुबूत हो सकते हैं। 


पहले भी भाग चुके हैं बच्चे 
ऑब्जरवेशन होम से पहले भी बच्चे फरार हो चुके हैं। प्रशासन ने सुरक्षा के इंतजाम किए तो इस बार बच्चे मुख्य दरवाजा ही खोल कर फरार हो गए। इससे पहले 28 जून2015 की रात दो बच्चे छत के रास्ते संप्रेक्षण गृह की पिछली दीवार फांद कर फरार हो गए थे। 16 मई 2012 को भी पांच किशोर पिछली दीवार फांद कर भागे थे। प्रशासन ने पिछली दीवार ऊंची करवाई थी और उसके पास लगे पेड़ों की छंटाई भी करवाई थी।

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