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भट्टी में थी हल्की आग और निकल रहा था धुआं, गिरने से दो मासूम बहनों की मौत

Mon, 11 Jul 2016 03:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Mon, 11 Jul 2016 03:00 PM IST
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The death of two sisters fell into the furnace, commotion
दो मासूम बच्चियों की मौत - फोटो : अमर उजाला

सुराना गांव स्थित ईंट भट्टे पर भट्टी में गिरने से दम घुटकर दो मासूम बहनों की मौत हो गई। मजदूरों ने दोनों के शवों को बाहर निकालकर हंगामा किया। इस संबंध में भट्टा मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।

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गाजियाबाद सिकरोड निवासी मुकेश का सुराना गांव में एसएलबी नाम से ईंट भट्टा है। करीब सात वर्ष से मुजफ्फरनगर के नंगला रियावली, रतनपुरी निवासी फुरकान परिवार समेत भट्टे पर काम करता है।
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परिवार में पत्नी फरजाना और छह बेटियां हैं। रविवार सुबह करीब साढ़े सात बजे फुरकान भट्टे पर मिट्टी डाल रहा था। इसी दौरान उसकी बेटी खतीजा (6) और फातिमा (4) भट्टे पर पहुंच गईं और वहीं खेलने लगीं।

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उसमें हल्की आग थी और धुआं निकल रहा था

The death of two sisters fell into the furnace, commotion
दो मासूम बच्चियों की मौत - फोटो : अमर उजाला

फुरकान काम करने के बाद घर लौट आया। करीब एक घंटे तक घर में खतीजा और फातिमा के नहीं मिलने पर परिजनों को चिंता हुई और उन्होंने मजदूरों के साथ दोनों की तलाश शुरू की।

दोनों बच्चियां चिमनी के चारों ओर हवा निकालने के लिए बनी एक भट्टी में पड़ी दिखाई दीं। चिमनी कई दिन से बंद थी। इसके बावजूद जिस भट्टी में बच्चियां थीं उसमें हल्की आग थी और धुआं निकल रहा था।

बच्चियों को अस्पताल तक ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। इससे गुस्साए मजदूरों ने भट्टे पर हंगामा शुरू कर दिया।

..नहीं तो खतीजा और फातिमा दोनों जिंदा होतीं

The death of two sisters fell into the furnace, commotion
दो मासूम बच्चियों की मौत - फोटो : अमर उजाला

सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामला शांत कराते हुए रिपोर्ट दर्ज करने का आश्वासन दिया। एसओ सुबोध सक्सेना ने बताया कि फुरकान की ओर से भट्टा मालिक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। भट्टा मालिक फरार है।

भट्टे पर कार्यरत मजदूरों के अनुसार, चिमनी बंद होने पर पत्थर से भट्टी (हॉल) को ढका जाता है। मगर भट्टा मालिक की लापरवाही के चलते हॉल प्लास्टिक की पन्नी से ढका था।

इसी कारण खेलते समय बच्चियां उसमें गिर गईं। यदि उस पर पत्थर रखा होता तो खतीजा और फातिमा दोनों जिंदा होतीं।

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