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चाय व रिक्शे वाले ने खड़ा किया सट्टा कारोबार, डीपी यादव की सरपरस्ती में चल रहा था गेम 

Thu, 28 Jul 2016 01:09 AM IST
धीरज बेनीवाल/अमर उजाला, नई दिल्ली
धीरज बेनीवाल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 28 Jul 2016 01:09 AM IST
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Tea and a rickshaw standing by the speculative business, headed by DP Yadav was running games
डीपी यादव

दिल्ली पुलिस की मानें तो राजधानी में अंतर राज्यीय सट्टा रैकेट चलाया जा रहा था, इसके लिए बाकायदा कंपनी बनाई गई और सट्टा खिलाने के लिए ‘गेम’ नाम से एक सॉफ्टवेयर भी बनाया गया। 

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दोनों आरोपी कभी रिक्शा चलाने और चाय बेचने का काम करते थे। दिल्ली पुलिस का दावा है कि यह पूरा गेम पूर्व सांसद व यूपी सरकार में मंत्री रह चुके डीपी यादव की सरपरस्ती में चल रहा था। 
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पुलिस का दावा है कि इन आरोपियों ने सट्टा लगवाने के लिये कंपनी बनाई और उसमें एजेंट बनाए। ये एजेंट इस सट्टे को सरकार से स्वीकृत लॉटरी बताकर लोगों को ठगते और पैसा लगवाते थे। इसके लिए एक साफ्टवेयर बनाया गया जिसका नाम ‘गेम’ रखा गया। 
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इस कंपनी को रोशन लाल, अमरनाथ और योगेश्वर चला रहे थे। अगर कोई गड़बड़ होती तो यह एंबेसडर कार में आते और अशोक स्तंभ वाले आई कार्ड दिखाते जिससे लोगों को भरोसा हो जाता कि यह सट्टा नहीं बल्कि सरकार से स्वीकृत लॉटरी है।

रोशन लाल व अमरनाथ बजाज हैं डीपी यादव के नजदीकी

Tea and a rickshaw standing by the speculative business, headed by DP Yadav was running games
सट्टा बाजार

दिल्ली पुलिस ने मकोका के तहत एफआईआर दर्ज कर 12 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों में शामिल रोशन लाल वर्मा उर्फ प्रधान वर्मा और अमरनाथ बजाज ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि डीपी यादव ही उन्हें सट्टेबाजी के धंधे में सहारा बना और दूसरे गिरोहों से उन्हें संरक्षण दिलाया। 

मकोका के तहत पुलिस ने कई बातों का खुलासा अपनी चार्जशीट में भी किया है। पुलिस के मुताबिक रोशन लाल व अमरनाथ बजाज काफी समय से डीपी यादव के नजदीकी हैं।

अमरनाथ बजाज एक समय डीपी यादव के पास तो अमरनाथ किसी ढींगरा नामक शख्स की शराब की दुकान में काम कर चुका है। इनकी पहचान डीपी यादव से योगेश्वर दयाल शर्मा ने करवाई थी। 

पुलिस के मुताबिक रोशन लाल वर्मा एक समय रिक्शा चलाता था और अमरनाथ बजाज आईएसबीटी कश्मीरी गेट पर चाय बेचता था। इसके बाद ये लोग वर्ष 1993 में अपराध की दुनिया में आए। 

रोजाना देने लगे थे दो लाख रुपये प्रोटेक्शन मनी

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दिल्ली पुलिस

योगेश्वर दयाल शर्मा एक पुरोहित था और उसके साथ सोबती नाम का शख्स भी काम करता था। योगेश्वर ने रोशन लाल व अमरनाथ को सट्टा कारोबार अपने हाथ में लेने का प्रस्ताव दिया था। 

पुलिस का कहना है कि योगेश्वर को पता था कि रोशन और अमरनाथ की डीपी यादव से अच्छी पहचान है। वह यह भी जानता था कि सोबती सट्टे का कारोबार डीपी यादव की सरपरस्ती में चला रहा है। 

इस बीच 2005 में सोबती की मौत हो गई और रोशन, अमर व योगश्वर की तिकड़ी ने मौके का फायदा उठाया और सट्टे के कारोबार पर अपना कब्जा कर लिया। 

दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि इन तीनों आरोपियों ने सट्टे के कारोबार पर कब्जा करने के लिए डीपी यादव का सहारा लिया और उसे रोजाना दो लाख रुपये प्रोटेक्शन मनी देने लगे। 

इसके बाद इन लोगों ने सट्टे के कारोबार को परवान चढ़ा दिया।  कारोबार को रोशन लाल व अमरनाथ ने दिल्ली से बाहर कई राज्यों में फैला दिया। इससे होने वाली कमाई को इन्होंने रियल एस्टेट में लगाया। इसके अलावा इन आरोपियों ने दिल्ली, हिमाचल व गोवा में कई होटल व रिसॉर्ट तक बना डाले। 

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