किडनी रैकेट कांड में नया खुलासा, अस्पताल का स्टाफ भी गोरखधंधे में शामिल
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ये लोग ज्यादातर अपोलो अस्पताल में आने वाले लोगों को ही टारगेट करते हैं। पुलिस ने इन दोनों को शनिवार को कोर्ट में पेश किया। पुलिस ने दोनों को दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है।
अपोलो अस्पताल के डॉक्टर एसके सरीन काफी दिनों से बाहर गए हुए हैं। पुलिस उनके आने का इंतजार कर रही है। दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार आदित्य सिंह व शैलेष सक्सेना को इंस्पेक्टर बीएस राणा, एसआई नागेन्द्र नागर और शैलेन्द्र शर्मा की टीम ने शुक्रवार शाम को गिरफ्तार किया था।
अस्पताल की भूमिका के बारे में हो सकता है खुलासा
दोनों ने पुलिस पूछताछ में बताया है कि वह डॉ.सरीन के पर्सनल स्टाफ हैं। जो मरीज अपोलो अस्पताल में या फिर डॉ. सरीन के पास आता था और उसे किडनी की जरूरत होती थी तो ये दोनों किडनी रैकेट के मास्टमाइंड राजकुमार का नंबर दे देते थे।
ये पीड़ित को कहते थे कि राजकुमार उन्हें किडनी उपलब्ध करा देगा। इसके अलावा ये बदरपुर इलाके से भी किडनी डोनर ढूंढ लेते थे। इसके अलावा आरोपी किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले की फाइल आदि जल्द ही तैयार कर देते थे और अपोलो में ही फर्जी कागजात के जरिए इनकी किड़नी ट्रांसप्लांट करा दी जाती थी।
गिरोह के सदस्य इन दोनों को 50-50 हजार रुपये देते थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन दोनों आरोपियों से पूछताछ में डॉक्टर और अपोलो अस्पताल की भूमिका के बारे में पता लग सकता है कि अस्पताल व डॉक्टर की रैकेट से कोई संबंध था या नहीं। हालांकि अभी तक की जांच में किसी और अस्पताल की भूमिका सामने नहीं आई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी शुरूआती जांच है।