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बिजली की चोरीः न कोई करेगा और न करा पाएगा, बिजली विभाग उपकेंद्र को कर रहा है ऑनलाइन
मनोज कुमार/अमर उजाला, नोएडा
Updated Sat, 25 Feb 2017 02:02 PM IST
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बिजली
- फोटो : अमर उजाला
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विद्युत विभाग ने अपने 56 विद्युत उपकेंद्रों की सप्लाई को ऑनलाइन कर दिया है। इससे हरेक बिजली घर से पता चल सकेगा कि कितनी बिजली दी गई और कितना बिल आया है।
इसमें कितना टेक्निकल बिजली लॉस हुआ है और कितनी चोरी हुई है। इससे विभाग के अफसरों और बिजली की सप्लाई दोनों पर निगरानी की जा सकेगी। उसी के आधार पर पदोन्नति से लेकर पोस्टिंग आदि दी जाएगी।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में बिजली की व्यवस्था को सुधारने के लिए देशभर के बिजली उपकेंद्र और फिर ट्रासंफार्मर को आरएपीडीआरपी और आईपीडीएस योजना के तहत ऑनलाइन करने की योजना शुरू कराई थी। गौतमबुद्घ नगर में 89 बिजली के उपकेंद्र हैं। इनमें से विद्युत विभाग ने 56 उपकेंद्रों को ऑनलाइन कर दिया है।
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इससे एक उपकेंद्र को कितनी बिजली दी गई, कितना घाटा हुआ और कितनी बिजली चोरी की गई है। इसका पूरा डेटा पीएमओ में देखा जा सकेगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री और विभाग के अन्य अफसर भी इसे ऑनलाइन देख सकेंगे।
इससे पता चल जाएगा कि किस क्षेत्र में बिजली चोरी अधिक हो रही है। इसी से उक्त क्षेत्र के अफसर के कार्य की समीक्षा की जाएगी। इसी कार्य को आधार बनाकर पोस्टिंग और पदोन्नति की जाएंगी। अभी 33 उपकेंद्रों को ऑनलाइन किया जाना बाकी है। अगले दो माह में इन सभी को भी नेशनल पोर्टल से जोड़ दिया जाएगा।
ट्रांसफार्मर की सप्लाई भी होगी ऑनलाइन
बिजली विभाग का अब हर ट्रांसफार्मर का डेटा ऑनलाइन करने का लक्ष्य है। जिसे मई से शुरू करने की योजना है। जब सभी ट्रांसफार्मर का डेटा ऑनलाइन हो जाएगा तो पता चल जाएगा कि चोरी कहां हो रही है। इसमें हरेक मीटर की जानकारी बिजली विभाग को मिल जाएगी कि किस-किस मीटर पर कितनी बिजली प्रयोग की गई है। इससे बिजली की चोरी पूरी तरह बंद कर दी जाएगी।
बिजली के घाटे को तलाशने के लिए देशभर में एक योजना के तहत हर प्रदेश के विद्युत विभाग को बिजली का डेटा ऑनलाइन करने का निर्देश पीएमओ और सीएम आफिस की ओर से दिया गया था। गौतम बुद्घनगर में 89 बिजली उपकेंद्र हैं और यहां पर 56 उपकेंद्र को ऑनलाइन किया जा चुका है। इसके बाद हरेक ट्रांसफार्मर को ऑनलाइन करने की योजना पर काम किया जाएगा।- अजय अग्रवाल अधीक्षण अभियंता
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इसमें कितना टेक्निकल बिजली लॉस हुआ है और कितनी चोरी हुई है। इससे विभाग के अफसरों और बिजली की सप्लाई दोनों पर निगरानी की जा सकेगी। उसी के आधार पर पदोन्नति से लेकर पोस्टिंग आदि दी जाएगी।
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दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में बिजली की व्यवस्था को सुधारने के लिए देशभर के बिजली उपकेंद्र और फिर ट्रासंफार्मर को आरएपीडीआरपी और आईपीडीएस योजना के तहत ऑनलाइन करने की योजना शुरू कराई थी। गौतमबुद्घ नगर में 89 बिजली के उपकेंद्र हैं। इनमें से विद्युत विभाग ने 56 उपकेंद्रों को ऑनलाइन कर दिया है।
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इससे एक उपकेंद्र को कितनी बिजली दी गई, कितना घाटा हुआ और कितनी बिजली चोरी की गई है। इसका पूरा डेटा पीएमओ में देखा जा सकेगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री और विभाग के अन्य अफसर भी इसे ऑनलाइन देख सकेंगे।
इससे पता चल जाएगा कि किस क्षेत्र में बिजली चोरी अधिक हो रही है। इसी से उक्त क्षेत्र के अफसर के कार्य की समीक्षा की जाएगी। इसी कार्य को आधार बनाकर पोस्टिंग और पदोन्नति की जाएंगी। अभी 33 उपकेंद्रों को ऑनलाइन किया जाना बाकी है। अगले दो माह में इन सभी को भी नेशनल पोर्टल से जोड़ दिया जाएगा।
ट्रांसफार्मर की सप्लाई भी होगी ऑनलाइन
बिजली विभाग का अब हर ट्रांसफार्मर का डेटा ऑनलाइन करने का लक्ष्य है। जिसे मई से शुरू करने की योजना है। जब सभी ट्रांसफार्मर का डेटा ऑनलाइन हो जाएगा तो पता चल जाएगा कि चोरी कहां हो रही है। इसमें हरेक मीटर की जानकारी बिजली विभाग को मिल जाएगी कि किस-किस मीटर पर कितनी बिजली प्रयोग की गई है। इससे बिजली की चोरी पूरी तरह बंद कर दी जाएगी।
बिजली के घाटे को तलाशने के लिए देशभर में एक योजना के तहत हर प्रदेश के विद्युत विभाग को बिजली का डेटा ऑनलाइन करने का निर्देश पीएमओ और सीएम आफिस की ओर से दिया गया था। गौतम बुद्घनगर में 89 बिजली उपकेंद्र हैं और यहां पर 56 उपकेंद्र को ऑनलाइन किया जा चुका है। इसके बाद हरेक ट्रांसफार्मर को ऑनलाइन करने की योजना पर काम किया जाएगा।- अजय अग्रवाल अधीक्षण अभियंता