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निठारी कांड : एक आदेश से टली कोली की मौत

Tue, 09 Sep 2014 01:29 AM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Tue, 09 Sep 2014 01:29 AM IST
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Nithari case: Koli's death postponed by an order.

रविवार रात आए एक आदेश ने पल भर में सुरेंद्र कोली की मौत टाल दी। प्रशासनिक और जेल अफसरों को फांसी पर स्टे की सूचना रविवार आधी रात ही मिल गई थी।

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इसे लेकर डीएम शिविर कार्यालय से जिला जेल तक सोमवार सूर्योदय तक हलचल मची रही। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने सोमवार सुबह मीडिया के सामने आकर स्थिति स्पष्ट की।

सुरेंद्र कोली को फांसी देने का काउंट-डाउन शनिवार से ही शुरू हो चुका था। रविवार को जेल में इसका ट्रायल भी हुआ। लेकिन प्रशासनिक और जेल अफसर फांसी देने की तारीख और समय पर चुप्पी साधे रहे।
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रविवार रात करीब डेढ़ बजे के बाद प्रशासनिक खेमे में अचानक हलचल शुरू हुई। इससे पहले डीएम पंकज यादव भी गाजियाबाद से लौट चुके थे। पहले समझा गया कि कोली को सोमवार तड़के ही फांसी दे दी जाएगी।
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इन चर्चाओं ने जोर पकड़ा और रात गहराते-गहराते यह गहमागहमी भी बढ़ गई। रविवार तड़के करीब सवा तीन बजे जब डीएम के शिविर कार्यालय पर कोली को फांसी देने पर रोक संबंधी फैक्स पहुंचा तो गहमागहमी अफरातफरी में बदल गई।

इसकी सूचना डीएम को दी गई। उन्होंने कोर्ट के आदेश पालन कराने के लिए प्रशासनिक अफसर को जेल भेजा।

फांसी के आदेश की चर्चा रही: रविवार शाम से ही इस चर्चा ने जोर पकड़ लिया था कि कोली को सोमवार का दिन निकलने से पहले फांसी दे दी जाएगी। जबकि हकीकत यह थी कि फांसी मंगलवार तड़के दी जानी थी।

इसलिए जेल में सन्नाटा था। आधी रात के बाद कोली के संबंध में कोई आदेश आने की खबर फैली तो लगा कि फांसी देने का फरमान आ गया। इस पर पूरा मीडिया जेल पहुंच गया।

डीएम शिविर कार्यालय से प्रशासनिक टीम जब सुप्रीम कोर्ट का आदेश लेकर जेल पहुंची, तब तक स्थिति स्पष्ट नहीं थी। यह आदेश जेलर आरके वर्मा को रिसीव कराया गया। जेलर इस आदेश को लेकर वरिष्ठ जेल अधीक्षक एसएचएम रिजवी के पास पहुंचे।

करीब 15 मिनट तक आदेश का अध्ययन करने के बाद वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने मीडिया को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कोली के डेथ वारंट पर एक सप्ताह तक स्टे कर दिया है।

मंगलवार तड़के होनी थी कोली को फांसी
निठारी के नर पिशाच सुरेंद्र कोली को मंगलवार तड़के फांसी पर चढ़ाया जाना था। रविवार को जेल में इसका ट्रायल भी हो चुका था। यही वजह रही कि कोली के वकील ने जल्दबाजी दिखाते हुए सोमवार तड़के ही फांसी देने का अंदेशा जता दिया।

सुप्रीम कोर्ट से स्टे के बाद कोली को फांसी देने की तैयारियां धरी रह गईं।सीबीआई कोर्ट द्वारा कोली का डेथ वारंट जारी करने और उसे मेरठ जेल में फांसी देने की तारीख 7 से 12 सितंबर के बीच तय थी।

स्टे की सूचना पहुंची सीबीआई कोर्ट
सुरेंद्र कोली की फांसी पर एक सप्ताह के स्टे से संबंधित सूचना गाजियाबाद सीबीआई विशेष कोर्ट में पहुंच चुकी है। सोमवार को डासना जेल के डिप्टी जेलर ने कोर्ट में आदेश से संबंधित लेटर पेश कर जानकारी दी।

निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा पर पुर्नविचार याचिका दाखिल किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसकी फांसी पर एक सप्ताह की रोक लगा दी है।

निठारी केस में बहस करने वाले सीबीआई के स्पेशल लोक अभियोजक जेपी शर्मा का कहना है कि 2 सितंबर 2014 को ही सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बैंच ने एक निर्णय दिया था कि फांसी की सजा पाया कोई भी दोषी की लीव पिटीशन और रिव्यू पिटीशन सुप्रीम कोर्ट में अगर खारिज हो जाती है तो उसको एक मौका क्यूरेटिव पिटीशन के रूप में दिया जाना चाहिए। इसके लिए दोषी को मृत्यु से निष्पादन के एक माह के अंदर आवेदन करना होगा।


कोली की मां ने डेथ वारंट संबंधी पत्र पर अंगूठा लगाने से किया इंकार

निठारी कांड के अभियुक्त सुरेंद्र कोली के मंगरूखाल स्थित घर डेथ वारंट की सूचना (रेडियोग्राम) पर अंगूठा लगवाने पहुंचे सल्ट के तहसीलदार को सोमवार को बैरंग लौटना पड़ा। वह उसे तामील नहीं करा सके। कोली की मां कुंती देवी ने उस तामीली पर अंगूठा लगाने से इंकार कर दिया।

इसके बाद तहसीलदार ने गांव के प्रधान को सूचना प्राप्त करवाया। हालांकि मेरठ जिला जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने अपराधी के परिजन को ही तत्काल सूचना देने के लिए रेडियोग्राम भेजा था।

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