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100 से ज्यादा सबमर्सिबल होंगे सील
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Wed, 08 Oct 2014 01:26 AM IST
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लोहियानगर क्षेत्र में जहरीला पानी निकलने को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। इसके निरीक्षण और ट्रीटमेंट की जिम्मेदारी श्रीराम पिस्टन प्रबंधन और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी को संयुक्त रूप से सौंपी है।
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अभी तक के भूजल सुधार का सर्वे रुड़की और कानपुर आईआईटी विशेषज्ञों से कराया जाएगा। अब सी ब्लाक के साथ पूरे लोहियानगर के सबमर्सिबल पंपों को सील किया जाएगा।
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लोहियानगर के लोगों का दावा है कि चार साल के प्रयास के बावजूद ग्राउंड वाटर की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ है। ट्रीटमेंट प्लांट का लाभ नहीं मिल रहा है। एडीएम सिटी ने मंगलवार को अफसरों की बैठक बुलाकर निर्देश दिए।
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लोहियानगर क्षेत्र के चार साल पहले के ग्राउंड वाटर के नमूनों, सुधार प्रक्रिया और मौजूदा नमूनों का सत्यापन अब रुड़की और कानपुर आईआईटी के विशेषज्ञों से कराया जाएगा। इससे ट्रीटमेंट वर्क का सत्यापन हो जाएगा।
श्रीराम पिस्टन कंपनी के 10 करोड़ से ज्यादा रुपये लगाने का कितना फायदा लोगों को हुआ, इसका पता भी आईआईटी के सर्वे के बाद लग सकेगा। वाटर ट्रीटमेंट से जुड़े विशेषज्ञों की मांग पर पूरे लोहियानगर के 100 से ज्यादा सबमर्सिबल पंपों को सील करने का निर्णय लिया गया।
इनको सील कराने का जिम्मा पॉल्यूशन कंट्रोल अफसर को सौंपा गया है। सबमर्सिबल पंप बंद न करने वालों और पानी का नमूना देने, कल्चर डालने से इंकार करने वालों पर कार्रवाई होगी।
ट्रीटमेंट सिस्टम से जुड़े विशेषज्ञों का दावा था कि कुछ लोगों की मनमानी से करोड़ों का प्रोजेक्ट बेकार होने की कगार पर है। बैठक में आईआईटी चेन्नई के वैज्ञानिक डा. निर्मल मेंडले, श्रीराम पिस्टन कंपनी के के जीएम केके शर्मा, नगर निगम के एक्सईएन आरके यादव और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के रीजनल अफसर पार्श्वनाथ सिंह मौजूद रहे।
वहीं, जहरीले पानी के खिलाफ आंदोलन कर रहे डा. अरविंद वत्स अकेला की लोहियानगर स्थित दुकान को स्वास्थ्य विभाग ने सीज कर दिया है। उन पर अपंजीकृत चिकित्सक होने का आरोप है। डा. वत्स ने इसका ठीकरा श्रीराम पिस्टन प्रबंधन पर फोड़ा। दूसरी आेर, कंपनी प्रबंधन से इससे वास्ता न होने का दावा किया है।