किडनी रैकेट मामले में कोर्ट ने खारिज की आरोपी की जमानत याचिका
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किडनी रैकेट मामले में गिरफ्तार आरोपियों में से एक आरोपी की जमानत याचिका सोमवार को अदालत ने खारिज कर दी। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि मानव अंग कारोबार की वस्तु नहीं है। इस आरोपी ने किसी अन्य शख्स की किडनी ली थी।
साकेत जिला अदालत के महानगर दंडाधिकारी अरविंद बंसल ने मामले में आरोपी आशुतोष की जमानत खारिज करते हुए कहा कि आरोपी ने सोची-समझी साजिश के तहत किडनी प्रत्यारोपण में हिस्सा लिया था।
अंग प्रत्यारोपण संबंधित नियमों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि रिकॉर्ड से साफ है कि आरोपी ने वह किडनी अपने शरीर में प्रत्यारोपित करवाई, जो उसके संबंधी ने नहीं, बल्कि एक अन्य शख्स ने उसके संबंधी के नाम से दी थी।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान लगाई लताड़
इस मामले में आरोपी की भूमिका की गहराई से जांच करने की जरूरत है।पुलिस मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें कई बिचौलिये, वरिष्ठ डॉक्टर के सहायक, किडनी देने और लेने वाले व इस रैकेट का सरगना राजकुमार राव शामिल है। पुलिस ने अब तक की जांच में 10 प्रत्यारोपण का खुलासा किया है।
अदालत ने जमानत याचिका खारिज करते हुए इस बात पर भी गौर किया कि किडनी रैकेट का पूरी तरह खुलासा करने के लिए पुलिस अभी जांच कर रही है। इसके लिए आरोपी को हिरासत में रखकर पूछताछ करना जरूरी है।
मामले में आरोपी आशुतोष दिल्ली जल बोर्ड अधिकारी का बेटा है। उसने अपनी याचिका में कहा कि वह हालात का शिकार है और पुलिस ने उसे झूठे मामले में फंसाया है।
वह ऑपरेशन के बाद हुए संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती हुआ था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने याचिका पर बहस करते हुए कहा कि उसने सही तरीके से किडनी प्रत्यारोपित करवाई थी। उसे एफआईआर दर्ज होने के बाद ही इस किडनी रैकेट का पता चला। इस पूरे मामले में उसकी कोई भूमिका नहीं है।