86 दिन बाद मिली ITBP के आईजी की गाड़ी, सात गिरफ्तार
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आईटीबीपी के आईजी आनंद स्वरूप की सरकारी नीली बत्ती लगी हुई सफारी चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए नोएडा क्राइम ब्रांच की टीम ने गिरोह के मुखिया समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है।
इनके पास से सरकारी सफारी गाड़ी व एक अन्य सफारी और चोरी को अंजाम देने में प्रयुक्त होने वाली बीट कार को बरामद किया गया। खास बात यह है कि इस गैंग के खुलासे के बाद चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। दिल्ली-एनसीआर में चोरी होने वाली ज्यादातर गाड़ियों को नार्थ ईस्ट में ठिकाने लगाया जाता था।
पठानकोट हमला और गणतंत्र दिवस के मद्देनजर एक ओर पूरे देश में सुरक्षा को लेकर हाई अलर्ट था, वहीं नोएडा पुलिस गहरी नींद में सो रही थी। आईटीबीपी के आईजी आनंद स्वरूप की नीली बत्ती व स्टार लगी हुई सरकारी सफारी शातिर बदमाशों ने आईजी आनंद स्वरूप के सी-80 सेक्टर- 23, नोएडा स्थित घर से 20 जनवरी को तड़के चोरी हो गई थी।
मामले में हुई थी नोएडा पुलिस की काफी किरकिरी
इस मामले में सरकारी चालक प्यारे लाल ने गाड़ी गायब होने की रिपोर्ट सेक्टर-24 थाने में दर्ज कराई थी। पठानकोट में एसपी सलविंदर सिंह की नीली बत्ती लगी कार का इस्तेमाल कर एयरफोर्स स्टेशन पर आतंकवादियों ने आत्मघाती हमला किया था।
ऐसे में गणतंत्र दिवस से मात्र पांच दिन पूर्व आईटीबीपी के आईजी की सरकारी नीली बत्ती, स्टार व सीजीओ कॉम्प्लेक्स की स्टीकर लगी गाड़ी गायब होने से देश की सरकारी एजेंसियां सतर्क हो गई और नोएडा पुलिस की काफी किरकिरी हुई।
नोएडा पुलिस घटना जल्द खोलने के कई बड़े-बड़े दावे करती रही, मगर सफलता 86 दिन बाद मिली। डीआईजी मेरठ रेंज लक्ष्मी सिंह ने बताया कि क्राइम ब्रांच को उस वक्त सफलता मिली जब बृहस्पतिवार दोपहर को जलपाई गुड़ी, पश्चिम बंगाल निवासी प्रवीन बरमन, मंतोष सरकार और दीपांकर सरकार आईजी आनंद स्वरूप की गाड़ी गिरोह के मुखिया गाजियाबाद निवासी दिनेश, दीपक, राजू और पौड़ी उत्तराखंड निवासी राजवीर से 1.30 लाख रुपए में संभल जिले से खरीद कर वापस पश्चिम बंगाल जा रहे थे।
क्राइम ब्रांच की टीम गिरोह के पीछे हापुड़ से ही लग गई
पूरे मामले की जांच में क्राइम ब्रांच जुटी हुई थी, क्राइम ब्रांच को इस डीलिंग के बारे में मुखबिर से पूर्व में ही सूचना प्राप्त हो गई थी। क्राइम ब्रांच की टीम गिरोह के पीछे हापुड़ से ही लग गई। दिनेश, दीपक, राजू और राजवीर बीट कार में थे, बाकी के सभी सफारी में थे।
इन दोनों गाड़ियों का पीछा करते हुए फेस-3 इलाके में एफएनजी रोड स्थित सीएनजी पंप के पास घेर कर क्राइम ब्रांच ने सभी आरोपियों को चोरी की गाड़ी समेत दबोच लिया। पूछताछ में दिनेश ने चोरी की बात कबूली और उसकी निशानदेही पर फेस-3 इलाके से कुछ दिन पूर्व भरत नामक एक शख्स की चोरी हुई सफारी भी बरामद की गई।
वहीं चोरी करने के मकसद के पीछे किसी भी आतंकवादी संगठन का हाथ होने से डीआईजी मेरठ रेंज लक्ष्मी सिंह और एसएसपी किरण एस. ने साफ इंकार किया है। इनके पास से तीन चोरी की गाड़ियों के अलावा ड्रिल मशीन से लेकर सभी तरह के औजार बरामद किए, जिससे यह गाड़ी का लॉक खोल कर चोरी करते थे। यह गिरोह वही गाड़ी चोरी करता था, जिसमें सेंसर नहीं लगा होता था।
पहले इंदिरापुरम फिर संभल में छुपाई रखी गाड़ी
दिनेश अपने साथियों के साथ सफारी चोरी की घटना को अंजाम देने चोरी की बीट का से आया था। चोरी करने के बाद इन लोगों ने सफारी इंदिरापुरम स्थित एक पार्किंग स्थल पर बेसमेंट में छुपा दी थी।
अगले दिन यह गाड़ी संभल में सक्रिय वाहन चोर को डिलीवर करने जा रहे थे, मगर उससे पूर्व अखबारों में और टीवी चैनलों पर इन लोगों ने देखा कि यह आईजी की गाड़ी है। डीआईजी मेरठ रेंज लक्ष्मी सिंह का दावा है कि उससे पूर्व इन्हें नहीं पता था कि यह आईजी की सरकारी गाड़ी है। हालांकि गाड़ी के ऊपर नीली बत्ती और आगे-पीछे सिल्वर दो स्टार लगे हुए थे।
लक्ष्मी सिंह का दावा है कि इन्हें लगा कि यह किसी डॉक्टर की गाड़ी है। कुछ दिनों बाद जब यह मामला ठंडा पड़ने लगा, उसके बाद यह इंदिरापुरम से गाड़ी निकाल कर संभल ले गए। संभल में इनके गिरोह से जुड़ा हुआ एक शख्स है जो मीडियेटर का काम करता है। उसी के माध्यम से इन्होंने पश्चिम बंगाल के बदमाशों को गाड़ी बेचने की डील पक्की की और असली नंबर प्लेट निकाल कर पश्चिम बंगाल के नंबर की प्लेट लगा कर गाड़ी बेच दी।
सभी के हैं पुराने क्रिमनल रिकार्ड
- दिनेश उर्फ दिवान- दिनेश गिरोह का मुखिया है। उसके खिलाफ सेक्टर-58 में वाहन चोरी, मुरादाबाद में हत्या व अन्य मुकदमे दर्ज हैं।
-दीपक- मुरादाबाद से कई बार वाहन चोरी के मामले में जेल जा चुका है।
- राजू- इंदिरापुरम से हत्या के ममले में जेल जा चुका है।
- राजवीर- हत्या के मामले में इंदिरापुरम से जेल जा चुका है।
- प्रवीन- झगड़े व जान से मारने की धमकी देने के आरोप में जेल जा चुका है।
- मंतोष और दीपांकर के बारे में पुलिस का दावा है कि यह भी कई मामले में जेल जा चुके हैं। जालसाजी के मामले प्रकाश में आ रहे हैं। वहीं दीपांकर पेशे से वकील है। चोरी की गाड़ियों के फर्जी कागजात दीपांकर ही तैयार करता था।
संभल वाला गिरोह पकड़ा जाना जरूरी-
क्राइम ब्रांच ने गाड़ी चोरी करने वाला व चोरी की गाड़ी खरीदने वाले गिरोह का तो पर्दाफाश कर दिया है। मगर संभल में सक्रिय उस गिरोह का पर्दाफाश नहीं हो सका जो मीडियेटर का काम करता है। पुलिस अधिकारियों का भी कहना है कि उक्त गिरोह के पकड़े जाने पर कई चोरी की गाड़ियां बरामद हो जाएंगी।
आईजी की गाड़ी के लिए पूरा महकमा जुट गया
आईजी की गाड़ी गायब होने के बाद नोएडा पुलिस के साथ-साथ मेरठ जोन का पुलिस महकमा जुट गया और चोरी हुई गाड़ी बरामद कर ली गई। मगर प्रति वर्ष दो हजार से ज्यादा चोरी होने वाले आम पब्लिक के वाहनों को पुलिस नहीं खोज पाती। शायद इतनी शिद्दत से पुलिस उन वाहनों को भी तलाश लेती तो शायद ऐसे वाहन चोरों का गिरोह न पनप सके। इसे हाईप्रोफ्राइल केस मानते हुए आईजी की गाड़ी बरामद होने के बाद डीआआईजी मेरठ रेंज लक्ष्मी सिंह मीडिया को संबोधित करने आ गईं।
‘‘क्राइम ब्रांच की टीम ने एक शातिर अंतराज्जीय वाहन चोरों के गिरोह का खुलासा किया है। आईजी मेरठ जोन की तरफ से 15 हजार और मेरी ओर से 12 हजार बतौर इनाम देने की घोेषणा की जाती है। इस गिरोह को एसयूवी चोरी करने में महारथ हासिल है। 200 से ज्यादा गाड़ियां इस गिरोह के सदस्य चोरी कर चुके हैं। इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों को जल्द गिरफ्तार किए जाने के निर्देश एसएसपी किरण एस. को दिए गए हैं।’’
- लक्ष्मी सिंह, डीआईजी मेरठ रेंज