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किडनी कांड में तफ्तीश के साथ हो रहे खुलासे, झूठे रिश्ते दिखाकर बेचते रहे किडनी

Thu, 09 Jun 2016 01:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 09 Jun 2016 01:15 AM IST
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Investigation into the disclosure of the scandal are seven kidney, kidney had to divorce wife
किड़नी रैकेट - फोटो : अमर उजाला

अपोलो किडनी रैकेट कांड में तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है। वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब नया खुलासा ये सामने आया है कि गिरोह में दलाल के रूप में काम करने वाले सत्यप्रकाश उर्फ आशु ने भी किडनी बेच रखी है।

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उसने अपनी पत्नी से तलाक लेने के लिए अपनी किडनी बेची थी। दूसरी तरफ कानपुर के एक डोनर नीतू निगम व प्राप्तकर्ता मुकेश का नाम सामने आया है। दिल्ली पुलिस ने कानपुर में दोनों के घर दबिश दी थी, मगर वे घर से फरार थे।
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दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार, किडनी रैकेट के खुलासे के समय गिरफ्तार किए गए गुंजन विहार, बरार कानपुर निवासी दलाल सत्यप्रकाश उर्फ आशु ने भी अपनी किडनी बेच रखी है।
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उसने वर्ष 2014 में अपोलो अस्पताल में किडनी दी थी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उसका पत्नी से विवाद चल रहा था। तलाक लेने के लिए उसे दो लाख रुपये की जरूरत थी। दो लाख रुपये के लिए किडनी बेची थी।

किडनी देकर रैकेट में शामिल हो गया आशु

Investigation into the disclosure of the scandal are seven kidney, kidney had to divorce wife
किड़नी रैकेट - फोटो : अमर उजाला

किडनी देने के बदले में  मिले रुपये को उसने पत्नी को दे दिया था। इसके बाद वह अलग हो गया था। इसके बाद आशु किडनी रैकेट में शामिल हो गया। वह किडनी देने के लिए लोगों को तैयार करता था।

आशु से किडनी देने के लिए आसिम सिकंदर ने संपर्क किया था। आसिम ने भी अपनी किडनी बेच रखी है। उसने कर्ज के चलते यह काम किया था।

दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कानपुर की रहने वाली नीतू ने मुकेश को किडनी पत्नी बनकर दी थी। इनका किडनी ट्रांसप्लांट भी अपोलो अस्पताल में हुआ था। नीतू को किडनी देने के लिए आशु ने संपर्क किया था।

गौरतलब है कि गिरफ्तार हो चुके व किडनी देने वाले पति-पत्नी उमेश व नीलू श्रीवास्तव भी कानपुर के रहने वाले हैं। पुलिस ने दोनों को मंगलवार को गिरफ्तार किया था। इन्होंने बेटे के इलाज के लिए किडनी बेची थी।

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