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गंगनहर में ‘जहर’ मिलाकर मारी जा रहीं मछलियां
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Mon, 27 Oct 2014 12:34 AM IST
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गंगनहर के पानी में जहर मिलाकर मछली मारने और इन मरी हुई मछलियों के कारोबार का पता चला है। मछली माफिया गंगनहर में जहर मिलाकर पहले मछलियों को मार डालते हैं, फिर बड़े जाल के सहारे उन्हें आसानी से निकाल लेते हैं।
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सफाई के चलते साल में एक बार गंगनहर का पानी हरिद्वार से रोके जाने के दौरान यह काला कारोबार तेजी से फलता-फूलता है। इस दौरान मछली माफिया जगह-जगह नहर के रुके हुए पानी में ‘नोवान’ नामक जहर मिलाकर मछली मारते हैं।
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पुलिस, प्रशासन के अधिकारियों को चंद रुपयों का लालच देकर यह माफिया धड़ल्ले से अपना कारोबार संचालित करते हैं। चिंता की बात यह है कि गंगनहर में तीखे जहर मिला पानी आखिर मानव जाति और जलीय जीव-जंतुओं पर घातक असर छोड़ेगा ही।
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रविवार को अमर उजाला टीम में शामिल रिपोर्टर डीपी आर्य, संजीव वर्मा और फोटो जर्नलिस्ट शिवकुमार पंवार ने निवाड़ी थाना क्षेत्र से लेकर मेरठ में भोला की झाल तक जगह-जगह फैले इस काले कारोबार का सच अपने कैमरे में कैद किया।
शिवाल का पुल, जानी खुर्द, भोला की झाल, हिंडन कैनाल, सतवाई, पूठ, करनाल रोड पुल, टीकरी केसामने, मुरादनगर पुल और निवाड़ी पुल के पास मरी हुई मछलियों के ढेर लगे पडे़ थे।
तीव्र जहर केचलते नहर का पानी भी काला हो चुका था। बदबू का आलम यह था कि नहर के एक किलोमीटर दूर भी रुकना आसान बात नहीं थी।
गंगनहर में बड़ी संख्या में मछलियां रहती हैं। पिछले दिनों पानी बंद किए जाने पर नहर में पानी का स्तर कम होना शुरू हो गया था। मछलियां पानी में बहकर आगे जा रही थीं।
मेरठ व मुरादनगर क्षेत्र के माफियाओं ने इस दौरान गंग नहर में जगह-जगह जहर डाल दिया। इससे मछलियां बेहोश हो गईं और उन्होंने तैरना बंद कर दिया।
जहर के असर से काफी तादाद में मछलियां मर गईं। माफियाओं ने जाल लगाकर इनको ट्रकों-टेंपो में भरकर करनाल, मेरठ, मुरादाबाद, दिल्ली और कानपुर में सप्लाई कर दिया।
नहर में कछुआ, धाधर और मेढ़कों की भी मौत हो गई। आसपास के लोगों की मानें तो माफिया मछलियोें में केमिकल लगाकर इनको रख लेते हैं। इसके बाद लंबे समय तक इनकी सप्लाई की जाती है।
घातक रसायन है नोवान
जिला कृषि रक्षा अधिकारी आरएस यादव के अनुसार नोवान घातक जहर है। कांटेक्ट श्रेणी के इस जहर का प्रयोग बागों-फसलों पर छिड़काव में किया जाता है। इसका असर एक मीटर दूर तक काम करता है।
इसके संपर्क मेें आते ही छोटे जीवों की मौत हो जाती है और बड़े जीव बेहोश हो जाते हैं। सौ एमएल दवा का प्रयोग 200 लीटर पानी में मिलाकर फसलों पर प्रयोग किया जाता है।
जहरीली मछलियों के प्रयोग से भयानक रोगों की चपेट में आ सकते हैं लोग
केमिकल के असर वाली मछलियों के प्रयोग से लोग भयानक बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। सेवानिवृत सीएमओ डा. बीआर राठी के अनुसार कांटेक्ट प्वाइजन शरीर के संपर्क में आते ही मौत हो जाती है, लेकिन मछलियों को पकाने पर गर्मी से जहर का त्वरित असर नहीं रहता। इससे कुछ साल बाद कैंसर, टीबी, किडनी फेल्योर और कुष्ठ रोग हो सकता है।
जहरीली मछलियों के खाने से बिगड़ रही है बगुलों की तबियत
आसपास के लोगों के अनुसार बगुला और कौआ जहरीली मछलियां खा रहे हैं, जबकि कुत्तों ने मरी मछलियों को खाना बंद कर दिया है।
बगुला-कौआ मछली खाने के बाद चुपचाप पेड़ों पर बैठ जाते हैं। यह पूरे दिन सुस्त रहते हैं। शाम को धीरे-धीरे उड़ते हैं। लोगों का मानना है कि जहरीली मछलियां खाने से इनको नुकसान पहुंच रहा है।
कई राज्यों में होती है जहरीली मछलियों की सप्लाई
गंगनहर में जहर डालकर मारी गई मछलियों को गाजियाबाद और मेरठ के अलावा अन्य कई जिलों और राज्यों में भी सप्लाई किया जाता है।
आसपास के लोगों से मिली जानकारी के अनुसार जहर देकर मारी गई इन मछलियों को हरियाणा के करनाल, मेरठ, मुरादाबाद, दिल्ली और कानपुर भेजा जाता है।