{"_id":"5c7c6c99bdec2273ad00d3a8","slug":"ignou-paper-leak-mastermind-arrested-with-four-other","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"इग्नू का पेपर लीक करने वाला मास्टरमाइंड चार साथियों संग गिरफ्तार","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
इग्नू का पेपर लीक करने वाला मास्टरमाइंड चार साथियों संग गिरफ्तार
Mon, 04 Mar 2019 05:38 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Mon, 04 Mar 2019 05:38 AM IST
विज्ञापन
इग्नू पेपर लीक
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने इग्नू के एमसीए व बीसीए के पेपर लीक होने की गुत्थी को सुलझा लिया है। इग्नू के बोकारो स्टील सेंटर, झारखंड में अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारी ने ही प्रश्नपत्र को लीक किया था। यह कर्मचारी ही पेपर लीक करने का मास्टरमाइंड है। अपराध शाखा ने कर्मचारी को उसके चार साथियों के साथ गिरफ्तार किया है।
आरोपी ने प्रश्नपत्रों को पेपर होने से एक दिन पहले ही लीक कर दिया था। पुलिस ने उन मोबाइल फोन को बरामद कर लिया है, जिनसे प्रश्नपत्रों की फोटो व्हाट्स ऐप के जरिए भेजी गई थी। शाखा की टीम ने पेपर लीक की गुत्थी को सुलझाने के लिए करीब 500 लोगों से पूछताछ की थी। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी ने और प्रश्नपत्र तो लीक नहीं किए थे।
अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त डा. एके सिंगला के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इग्नू में अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारी बोकारो, झारखंड निवासी देवशंकर(31), बंगलूरू से गिरफ्तार झारखंड निवासी विवेक कुमार शर्मा (27), संभल, यूपी निवासी अंकित सक्सेना (23), बीकानेर, राजस्थान निवासी मोहम्मद इकबाल (24) और गुरुग्राम निवासी जॉनसन हंस (30) के रूप में हुई। इग्नू के रजिस्ट्रार एसजी स्वामी ने नेबसराय थाने में आठ दिसंबर, 2018 को एमसीए थर्ड सेमेस्टर का एमसीएस-033 (उन्नत असतत गणित) दिसंबर, 2018 प्रश्नपत्र लीक होने की शिकायत दी थी।
विज्ञापन
ये पेपर नेपाल समेत पूरे देश में आठ दिसंबर, 2018 को होना था। उसे सात दिसंबर को दो विभिन्न आईडी से ई-मेल मिले। उसके साथ इग्नू के प्रश्नपत्र अटैच थे। नेबसराय थाने में मामला दर्ज किया गया। इससे पहले पांच दिसंबर को बीसीए थर्ड सेमेस्टर का पेपर लीक होने की शिकायत दी थी। ये पेपर व्हाट्स ऐप पर आया था। इस बाबत डाबडी थाने में मामला दर्ज किया गया था।
मामलों की गंभीरता को देखते हुए दोनों ही केसों की तफ्तीश अपराध शाखा को सौंप दी गई थी। अपराध शाखा में तैनात इंस्पेक्टर रिछपाल सिंह की टीम मामले की जांच कर रही थी। पुलिस टीम ने करीब 500 लोगों से पूछताछ की। इसके बाद पुलिस ने मास्टरमाइंड देवशंकर समेत सभी को गिरफ्तार कर लिया। बाकी आरोपी प्रश्नपत्रों को आगे बेचते थे।
विज्ञापन
आरोपी ने प्रश्नपत्रों को पेपर होने से एक दिन पहले ही लीक कर दिया था। पुलिस ने उन मोबाइल फोन को बरामद कर लिया है, जिनसे प्रश्नपत्रों की फोटो व्हाट्स ऐप के जरिए भेजी गई थी। शाखा की टीम ने पेपर लीक की गुत्थी को सुलझाने के लिए करीब 500 लोगों से पूछताछ की थी। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी ने और प्रश्नपत्र तो लीक नहीं किए थे।
विज्ञापन
अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त डा. एके सिंगला के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इग्नू में अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारी बोकारो, झारखंड निवासी देवशंकर(31), बंगलूरू से गिरफ्तार झारखंड निवासी विवेक कुमार शर्मा (27), संभल, यूपी निवासी अंकित सक्सेना (23), बीकानेर, राजस्थान निवासी मोहम्मद इकबाल (24) और गुरुग्राम निवासी जॉनसन हंस (30) के रूप में हुई। इग्नू के रजिस्ट्रार एसजी स्वामी ने नेबसराय थाने में आठ दिसंबर, 2018 को एमसीए थर्ड सेमेस्टर का एमसीएस-033 (उन्नत असतत गणित) दिसंबर, 2018 प्रश्नपत्र लीक होने की शिकायत दी थी।
विज्ञापन
ये पेपर नेपाल समेत पूरे देश में आठ दिसंबर, 2018 को होना था। उसे सात दिसंबर को दो विभिन्न आईडी से ई-मेल मिले। उसके साथ इग्नू के प्रश्नपत्र अटैच थे। नेबसराय थाने में मामला दर्ज किया गया। इससे पहले पांच दिसंबर को बीसीए थर्ड सेमेस्टर का पेपर लीक होने की शिकायत दी थी। ये पेपर व्हाट्स ऐप पर आया था। इस बाबत डाबडी थाने में मामला दर्ज किया गया था।
मामलों की गंभीरता को देखते हुए दोनों ही केसों की तफ्तीश अपराध शाखा को सौंप दी गई थी। अपराध शाखा में तैनात इंस्पेक्टर रिछपाल सिंह की टीम मामले की जांच कर रही थी। पुलिस टीम ने करीब 500 लोगों से पूछताछ की। इसके बाद पुलिस ने मास्टरमाइंड देवशंकर समेत सभी को गिरफ्तार कर लिया। बाकी आरोपी प्रश्नपत्रों को आगे बेचते थे।
ऐसे करता था पेपर लीक
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मास्टरमाइंड देवशंकर ने बताया कि वह इग्नू के स्टडी सेंटर, बोकारो स्टील सिटी सेक्टर-3 बी, झारखंड में बतौर सहायक (चपरासी) काम करता था। इस सेंटर में एक कोर्डिनेटर, पांच सहायक कोर्डिनेटर, पांच सहायक, आठ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी काम करते हैं। सभी एक वर्ष के अनुबंध पर पार्ट टाइम काम करते हैं। अनुबंध खत्म होने पर बढ़ा दिया जाता था। देवशंकर सेंटर में 13 वर्षों से काम कर रहा था।
इस कारण पूरा स्टाफ इस पर विश्वास करता था। ये सेंटर शाम 4 बजे से लेकर 7 बजे तक मंगलवार से शनिवार तक खुलता था। देवशंकर को 3500-3600 रुपये सैलरी मिलती थी। इग्नू हैड क्वार्टर से प्रश्नपत्र स्पीड पोस्ट से वहां तक पहुंचते थे। सीलबंद बैग में पेपरों को कोर्डिनेटर हरेंद्र नाथ लेता था। पेपर शुरू होने से दो-तीन दिन पहले पेपर पांच-छह कर्मचारियों की उपस्थिति में खोले जाते थे। अलग-अलग करने के बाद पेपर सीलबंद लिफाफे में अलमारी में रख दिए जाते थे।
1500 रुपये में पेपर को बेचता था
विश्वास करने के कारण आरोपी सुपरवाइजर के कार्यालय में चला जाता था। वह मेन गेट की चाबी अपने पास रखता था। ऐसे में आरोपी सीलबंद लिफाफे को कैंची के सहारे खोलता था और मोबाइल से फोटो खींचकर वापस फेवीगम से लिफाफे को चिपकाकर रख देता था। इसके बाद ये व्हाट्स ऐप से पेपरों को भेज देता था। वह एक पेपर को 1500 रुपये में बेचता था। इसने रांची के एक छात्र को व्हाट्स ऐप पर पेपर भेजा था।
इस कारण पूरा स्टाफ इस पर विश्वास करता था। ये सेंटर शाम 4 बजे से लेकर 7 बजे तक मंगलवार से शनिवार तक खुलता था। देवशंकर को 3500-3600 रुपये सैलरी मिलती थी। इग्नू हैड क्वार्टर से प्रश्नपत्र स्पीड पोस्ट से वहां तक पहुंचते थे। सीलबंद बैग में पेपरों को कोर्डिनेटर हरेंद्र नाथ लेता था। पेपर शुरू होने से दो-तीन दिन पहले पेपर पांच-छह कर्मचारियों की उपस्थिति में खोले जाते थे। अलग-अलग करने के बाद पेपर सीलबंद लिफाफे में अलमारी में रख दिए जाते थे।
1500 रुपये में पेपर को बेचता था
विश्वास करने के कारण आरोपी सुपरवाइजर के कार्यालय में चला जाता था। वह मेन गेट की चाबी अपने पास रखता था। ऐसे में आरोपी सीलबंद लिफाफे को कैंची के सहारे खोलता था और मोबाइल से फोटो खींचकर वापस फेवीगम से लिफाफे को चिपकाकर रख देता था। इसके बाद ये व्हाट्स ऐप से पेपरों को भेज देता था। वह एक पेपर को 1500 रुपये में बेचता था। इसने रांची के एक छात्र को व्हाट्स ऐप पर पेपर भेजा था।