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कुख्यात शिकारी भीमा बावरिया को तीन साल कैद, पिछले साल बाघ के मांस के साथ हुआ था गिरफ्तार

Fri, 24 Nov 2017 09:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Fri, 24 Nov 2017 09:59 AM IST
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hunter bhima bawariya caught and sentenced to jail for three years
bhima bawaria

उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश व हिमाचल के जंगलों में वन्य जीवों के शिकार व तस्करी के लिए कुख्यात शिकारी भीमा बावरिया को पर्यावरण अदालत ने तीन साल की सजा सुनाई है। भीमा को पिछले साल सूरत नगर, गुरुग्राम से बाघ के सूखे मांस के साथ गिरफ्तार किया गया था।

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उसके खिलाफ थाना राजेंद्रा पार्क, गुरुग्राम में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। भीमा को गुरुग्राम पुलिस ने पिछले साल सूरत नगर की गलियों से बांघ के 58 ग्राम सूखे मांस और वसा के साथ गिरफ्तार किया था।
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भेष बदलने में माहिर भीमा को जिस समय पुलिस ने पकड़ा था, वह साधु के वेष में था। इससे पहले वह कई बार भेष बदलकर पुलिस को चमका देने में कामयाब हुआ था।

मामला पर्यावरण अदालत में विचाराधीन था। मंगलवार को पर्यावरण अदालत की पीठासीन अधिकारी वर्षा शर्मा ने उसे सजा सुनाई, जिसके बाद उसे जेल भेज दिया गया। 

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पहले भी हो चुका है गिरफ्तार 

hunter bhima bawariya caught and sentenced to jail for three years
bhima bawaria

उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश व हिमाचल वन विभाग तथा पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुके भीमा बावरिया को उत्तराखंड पुलिस ने 2014 में गिरफ्तार किया था। उस समय उसके कई साथी भी पकड़े गए थे। मगर अदालत से जमानत पर आने के बाद भीमा फरार हो गया था और पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी।

राजस्थान के कुख्यात वन्य जीव तस्कर संसार चंद के बाद वन्य जीवों के शिकार और तस्करी में भीमा का नाम आता था। इसके साथ इसका पूरा परिवार तस्करी में जुटा हुआ था। भीमा को उत्तराखंड के चमोली जिले में वर्ष 2002 में पहली बार वन्यजीवों को पकड़ने वाले औजारों और उपकरण के साथ पकड़ा गया था। 

भीमा के नेटवर्क से परेशान थे वनकर्मी 
सूरत नगर, गुरुग्राम का रहने वाला भीमा को उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश के जंगलों के चप्पे-चप्पे से वाकिफ था। यहां तक कि उसने वहां अपना पूरा नेटवर्क खड़ा कर लिया था। वे स्थानीय लड़कों को शिकार के लिए काम पर रखता था।

स्थानीय पुलिस उसके नेटवर्क से काफी परेशान थी और उसे तोड़ना चाहती थी। मगर अदालत से जमानत मिलने के बाद वह फरार हो जाता और दोबारा शिकार करने पहुंच जाता था। ऐसे में पुलिस को कभी उसका नेटवर्क तोड़ने में सफलता नहीं मिल पाई। 

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