सट्टा रैकेट को संरक्षण देने के मामले में यूपी के पूर्व मंत्री डीपी यादव गिरफ्तार
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दिल्ली पुलिस ने मकोका के तहत डीपी यादव को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने डीपी यादव से पूछताछ के लिये दस दिन का रिमांड लिया है। यादव पर आरोप है कि वह क्राइम सिंडीकेट का हिस्सा हैं और सट्टा चलाने वालों से रोजाना दो लाख रुपये प्रोटेक्शन मनी लेते थे।
उत्तराखंड पुलिस ने देहरादून जेल से लाकर कड़कड़डूमा कोर्ट में पेश किया था। वह दादरी के महेंद्र सिंह भाटी की हत्या के आरोप में उम्रकैद काट रहा है। कोर्ट ने डीपी यादव की पेशी के लिये प्रोडक्शन वारंट जारी किया था।
कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंद्र कुमार ने धर्मपाल यादव उर्फ डीपी यादव से पूछताछ के लिये दस दिन का रिमांड दिया है। पुलिस ने डीपी यादव से पूछताछ के लिये 15 दिन का रिमांड मांगा था।
ऑनलाइन सट्टा मामले में हुई गिरफ्तारी
दिल्ली पुलिस ने आरोपी का रिमांड मांगते हुये कहा कि डीपी यादव के नाम का खुलासा मकोका के तहत गिरफ्तार रोशन लाल वर्मा उर्फ प्रधान वर्मा और अमरनाथ बजाज के बयान में हुआ है।
पुलिस ने अपनी बहस में कहा कि इन आरोपियों ने मकोका की धारा 18 के तहत दिये बयान में कहा है कि वह दिल्ली व अन्य राज्यों में सट्टा रैकेट चलाते थे और डीपी यादव दूसरे गिरोहों से बचाने के लिये दो लाख रुपये रोजाना प्रोटेक्शन मनी लेते है।
इस तथ्य की पुष्टि एक अन्य गवाह ने मजिस्ट्रेट के समक्ष अपने बयान में की है। दिल्ली पुलिस की अर्जी का विरोध करते हुये बचाव पक्ष के अधिवक्ता रीतेश बाहरी व रणधीर सिंह ने कहा कि पुलिस के पास डीपी यादव को मकोका के तहत गिरफ्तार करने व रिमांड लेने का कोई आधार नहीं है।
मकोका के तहत गिरफ्तारी के लिये आरोपी के खिलाफ कम से कम दो एफआईआर होनी चाहिये और वह शख्स क्राइम सिंडीकेट का मेंबर होना चाहिये जबकि पुलिस ने ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया है।