महिला जज को मिली जमानत, सीबीआई ने घूस लेते किया था गिरफ्तार
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घूस कांड में गिरफ्तार सीनियर सिविल जज रचना तिवारी लखनपाल को सीबीआई अदालत ने सोमवार को जमानत प्रदान कर दी। सीबीआई ने चार लाख की घूस लेते हुए महिला जज को गिरफ्तार किया था।
इसी मामले में सीबीआई ने महिला जज के पति आलोक लखनपाल व अधिवक्ता विकास मेहन को भी गिरफ्तार किया था। तीस हजारी स्थित विशेष सीबीआई जज संजीव अग्रवाल ने 50 हजार रुपये के निजी मुचलके व एक जमानती की शर्त पर महिला जज रचना तिवारी लखनपाल को जमानत दे दी।
अदालत ने जमानत प्रदान करते हुए गवाहों को धमकाने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने की हिदायत आरोपी महिला जज को दी है।
'बच्चों की देखभाल करनी है, क्योंकि उनका पति जेल में है'
बचाव पक्ष के अधिवक्ता विकास पाहवा ने याचिका पर बहस करते हुए कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और उनके मुवक्किल का इस अपराध से कोई सीधा संबंध नहीं है।
उन्हें अपने बच्चों की देखभाल करनी है, क्योंकि उनका पति जेल में है। इसके मद्देनजर उनकी मुवक्किल को जमानत दी जाए। वहीं सीबीआई ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मामले की जांच शुरुआती दौर में है।
इसमें अभी साजिश की जांच के लिए महिला जज के घर पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जानी है। इस अपराध में सभी आरोपियों के बीच सीधा संबंध है।
आरोपियों ने व्हाट्सऐप संदेशों का किया था इस्तेमाल
इस घूस केस को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने व्हाट्सऐप संदेशों का इस्तेमाल किया था। वहीं विशाल मेहन की ओर से मंगलवार को जमानत याचिका दायर हो सकती है।
पेश मामले में जांच एजेंसी ने विशाल मेहन को लोकल कमिश्नर (एलसी) नियुक्त करने के लिए चार लाख रुपये की पहली किश्त लेते हुए 28
सितंबर, 2016 की रात रचना तिवारी लखनपाल को गुलाबी बाग स्थित सरकारी आवास से रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
इसके बाद सीबीआई ने आलोक लखनपाल व एलसी विकास मेहन को 29 सितंबर की सुबह गिरफ्तार किया था। सीबीआई का आरोप है कि लखनपाल ने विशाल मेहन को एलसी नियुक्त करने के लिये 20 लाख रुपये की घूस मांगी थी।