अपोलो में किडनी ट्रांसप्लांट के 250 केसों की होगी जांच, पुलिस ने मांगा रिकॉर्ड
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दिल्ली पुलिस अपोलो में किडनी ट्रांसप्लांट के करीब 250 से ज्यादा केसों की जांच करेगी। दिल्ली पुलिस ने अपोलो अस्पताल से इन केसों की फाइल के फोटोस्टेट कॉपी मांगी है। इन फाइलों की जांच के लिए दो इंस्पेक्टरों की देखरेख में विशेष टीम बनाई है।
इतनी बड़ी संख्या में किडनी केसों की जांच होने की बात से अपोलो अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अभी तक अपोलो में किडनी ट्रांसप्लांट होने के 10 केस सामने आए हैं। दिल्ली पुलिस की टीम ने शुक्रवार को अपोलो अस्पताल में छापेमारी की, जो देर रात तक चलती रही।
दक्षिण-पूर्व जिले के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि किडनी रैकेट कांड की जांच के लिए बनी एसआईटी ने अपोलो अस्पताल से किडनी ट्रांसप्लांट के करीब 250 से ज्यादा केसों की जानकारी मांगी है। बताया जा रहा है कि केसों की संख्या 600 तक भी हो सकती है।
किडनी खरीद-फरोख्त के कई मामले आ सकते हैं सामने
फाइलों की जांच व वेरिफिकेशन के बाद ही पता लगेगा कि किडनी फर्जी तरीके से ट्रांसप्लांट हुई है या नहीं है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि किडनी खरीद-फरोख्त के काफी मामले सामने आ सकते हैं।
मास्टरमाइंड टी. राजकुमार ने किडनी ट्रांसप्लांट के जिन पांच केसों का खुलासा किया था, उनकी फाइल पुलिस को अपोलो अस्पताल से मिल गई हैं। पुलिस ने इन फाइलों को कब्जे में ले लिया है। दूसरी तरफ अपोलो अस्पताल के दूसरे डॉक्टर के पर्सनल स्टाफ से पूछताछ कर रही है। शुक्रवार देर रात तक उसे गिरफ्तार नहीं किया गया है।
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को चार किडनी डोनर उमेश श्रीवास्तव, पत्नी नीलू श्रीवास्तव, भानू प्रताप और मोमिता मौलिक की हैंडराइटिंग के नमूने लिए। चारों डोनर को तिहाड़ जेल से साकेत कोर्ट लाया गया और कोर्ट की अनुमति के बाद उनकी हैंडराइटिंग के नमूने लिए गए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नमूने को अपोलो अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान भरे गए फार्म आदि के नमूनों से मिलाया जाएगा। हैंडराइटिंग का मिलान पुलिस के पास सबसे बड़ा सबूत होगा।