इसलिए मारा गया दिल्ली पुलिस का जांबाज सिपाही
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली पुलिस के एक जांबाज सिपाही जगबीर की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उसके सहयोगी सिपाही बताते हैं कि वह अपने काम के प्रति काफी सजग रहता था। उसकी बीट पर अपराधी उससे खौफ खाते थे। वह जिस भी थाने में रहा अपने बीट पर नंबर वन रहा।
इसीलिए जब रविवार ऑटो में बैठे युवक उसे संदिग्ध दिखे, तो उन्हें थाने ले चलने के जिद पर अड़ गया और उनकी ऑटो में जा बैठा। बस यही जिद ने उसकी जान ले ली।
उसे अमन विहार थाने में सर्वश्रेष्ठ बीट कांस्टेबल का अवार्ड मिला था। वहीं विजय विहार में वर्ष 2014 में भी सर्वश्रेष्ठ बीट कांस्टेबल का अवार्ड मिला। मूलत: कांहड़ा गांव भिवानी निवासी जगबीर देश की सेवा करना चाहता था।
15 साल तक सेना में नौकरी करने के बाद वह सेवानिवृत्त हुआ। उसके चचेरे ससुर सोमवीर ने बताया कि परिवार में पत्नी अंजू और 11वीं कक्षा में पढ़ने वाला बेटा अंकित है। परिवार झरौंदाकलां के बाबा हरिदास एंक्लेव में रहता है।
जगबीर के भाई अमरजीत सिंह ने बताया कि 2008 में दिल्ली पुलिस में बतौर सिपाही भर्ती हुआ। उसकी पहली तैनाती बाहरी दिल्ली के अमन विहार थाने में हुई थी। वहां करीब सवा साल रहने के बाद विजय विहार थाने में आया।
क्या है हादसे की वजह
पुलिस के अनुसार विजय विहार थाने में तैनात कांहड़ा गांव भिवानी निवासी सिपाही जगबीर सिंह (42) और सिपाही नरेंद्र रविवार रात बाइक से इलाके में गश्त कर रहे थे। रात करीब दो बजे थाने से आधा किलोमीटर दूर उन लोगों ने एक ऑटो में कुछ संदिग्ध लोगों को देखा।
दोनों ने पीछा कर सोम बाजार रोड पर ऑटो को रुकवाया, जिसमें चालक समेत चार लोग सवार थे। जब उनसे इतनी रात घूमने का कारण पूछा तो वे सही से जवाब नहीं दे पाए। इस पर पुलिसकर्मियों को शक हुआ और उन्हें थाने चलने के लिए कहा।
इस बीच जगबीर ऑटो की पिछली सीट पर बैठ गया और नरेंद्र बाइक लेने जाने लगा। कुछ ही दूर ऑटो चला था कि उसमें सवार एक युवक ने चालक को पीछे से लात मारी। युवक की इस हरकत देखकर जगबीर ने उसको काबू करने की कोशिश की।
इसी दौरान युवक ने पिस्टल से जगबीर की छाती में गोली मार दी। गोली लगते ही जगबीर ऑटो में गिर गया। इसके बाद आरोपी ऑटो से नीचे उतरे और नरेंद्र पर निशाना लगाया। यह देखकर नरेंद्र बाइक वहीं छोड़कर थाने की तरफ भागा, लेकिन उसे भी पीठ में गोली लग गई। वह वहीं गिर गया।
किसने मारा जगबीर को?
घटनास्थल की जांच करने के बाद पुलिस को बाइक खोलने वाली एक मास्टर चाबी और शीशा काटने वाला कटर मिला है। पुलिस को अंदेशा है कि वारदात को अंजाम देने वाले वाहन चोर हो सकते हैं। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगालने की कोशिश कर रही है ताकि उसमें ऑटो का नंबर मिल सके।
साथ ही पुलिस नरेंद्र के बयान का इंतजार कर रही है, ताकि उसके बताए हुलिए के आधार पर बदमाशों की पहचान की जा सके। घटना मारे गए सिपाही जगबीर का छह दिन पूर्व ही जन्मदिन था। तब बड़े उत्साह के साथ लोगों ने उत्सव मनाया था, लेकिन अब घर में मातम पसरा है।
वर्ष 2014 की कुछ प्रमुख वारदात
. 13 अक्तूबर- विजय विहार में ऑटो सवार बदमाशों ने सिपाही जगबीर की गोली मारकर हत्या की, सिपाही नरेंद्र जख्मी।
. 11 अक्तूबर 2014-बाराखंभा इलाके में रिजवान नाम के बदमाश ने सिपाही प्रतीक और संदीप पर गोली चलाई, बाल-बाल बचे।
. 2 अक्तूबर 2014-द्वारका सेक्टर 23 में बदमाशों ने सिपाही सोनाराम और होमगार्ड के जवान रमेश को गोली मारी।
. 27 सितंबर 2014-जाफराबाद थाने में तैनात सिपाही धरमपाल की गोली मारकर हत्या।
. 14 जुलाई 2014-जाफराबाद थाने में तैनात सिपाही शिवराज की करावल नगर में गोली मारकर हत्या।
बदलने होंगे बदमाशों को पकड़ने के तरीके
दिल्ली में बदमाशों को पकड़ने के तरीके और उनकी पहचान नहीं होने की वजह से दिल्ली पुलिस के सिपाही मात खा जाते हैं। अधिकारी इस बाबत खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं लेकिन उनका मानना है कि थाना स्तर पर काम करने वाले सिपाहियों को शातिर बदमाशों की पहचान नहीं है। साथ ही उन पर काबू करने के तरीके में भी भारी कमी है।
पुलिस अधिकारी इस बात से सहमत हैं कि राजधानी में भी पुलिस को यूरोप के देशों की तरह बदमाशों को काबू करना चाहिए। विदेशों में पुलिस कभी भी सीधे तौर पर क्रिमिनल के पास नहीं पहुंचती है। शक होने पर वह दूर से ही उनको हथियार डालकर हाथ उठाने या फिर उन्हें लेटने पर मजबूर कर देते हैं। ऐसा करने से उनको पुलिसकर्मियों पर हमला करने का मौका नहीं मिलता है। जबकि इसके ठीक उलट दिल्ली पुलिस के सिपाही सीधे तौर पर बदमाशों से आमना-सामना कर लेते हैं।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि सिपाहियों पर हमले के पीछे एक कारण यह भी है कि उन्हें बदमाशों के बारे में जानकारी नहीं होती। अकसर देखा गया है कि क्रिमिनल की गिरफ्तारी के बाद पता चलता है कि उस पर दर्जनों मामले दर्ज हैं। वह राजधानी का शातिर बदमाश है और उस पर हजारों रुपये के इनाम घोषित हैं। ऐसे में अब दिल्ली पुलिस को भी अपने तरीके में सुधार करना होगा, जिससे वह अपने जवानों की जान बचा सके।