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बच्चों के 4 ऐसे अपराध जो छुड़ा दें बड़े-बड़ों के पसीने

Tue, 16 Sep 2014 03:50 PM IST
Updated Tue, 16 Sep 2014 03:50 PM IST
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Dangerous crimes of minors.

पार्टी टुनाइट, रिजल्ट सेलिब्रेशन, ग्रुप डिस्कशन, हॉलीडे मसाला, मॉल पार्टी

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चौंकिए मत, ये सभी कोड वर्ड हैं। बड़ों के लिए नहीं, बच्चों के लिए। असल में यह कोड बच्चों और किशोरों के लिए होने वाली पार्टियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इन पार्टियों की फीस 100 रुपए से लेकर 1000 तक होती है।

कीमत इतनी कम रखी गई है ताकि बच्चे और किशोर आसानी से इनका हिस्सा बन सकें। घरवालों को भी इसकी खबर नहीं होती। इसके लिए बाकायदा पूरी टाइमिंग और मेन्यू भी दिया जाता है। एंट्री से ठीक पहले पेमेंट कर बच्चे आसानी से यहां मनचाहा नशा कर सकते हैं।
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किशोरों को जमा करने के लिए उनके फेवरेट टाइम पास फेसबुक, ट्विटर और व्हॉट्सएप पर ऐसी पार्टियों के कोड मैसेज भेजे जाते हैं। साइबर सिटी यानि गुड़गांव में नशे की इन पार्टियों का प्रचलन जोरों पर है। शहर के कई पब-बार में चोरी-छिपे हो रही इन पार्टियों में 12 से 16 साल के किशोर शामिल हो रहे हैं।
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स्थानीय डीटी मॉल स्थित 'बज्ज बार' में पिछले साल 15 मार्च को नशे की पार्टी करते सौ से ज्यादा बच्चे पकड़े गए। पुलिस को यह तक पता नहीं लग पाया कि आखिर पार्टी आयोजित किसने की।

हालांकि, नशे की पार्टियों के ऐसे ही खेल के चलते पुलिस ने कई पब और बार पर निगरानी रखनी शुरू कर दी है। इंटरनेट पर कई लिंक मिलते हैं, जिनमें पार्टियों का पूरा मेन्यू दिखाया जाता है। (ऐतियात के तौर पर हम उन वेबसाइटों के पते प्रकाशित नहीं कर रहे हैं)

ऐसा नहीं है कि मामला बड़े नशों का ही है। हुक्का भी नौजवानों को अपनी तरफ खूब खींच रहा है। हुक्के को अक्सर उस नाम से पुकारा जाता है जो अरब देशों में प्रचलित है - शीशा। वहां हुक्के को शीशा ही कहा जाता।

टीनएजर्स को हुक्का बार का चाव चढ़ाने के लिए फ्लेवर्ड हुक्का जिनमें सेलमन, कॉर्डिमॉम, लेमन मिंट, चॉकलेट, रोज सिगार, एनर्जी शीशा, ब्लू बेली, ग्रीन मिंट, पाइनेप्पल, समारोफ-69, कच्ची कली, पान रस, पान मसाला, पान रसना, ऑफ्टर-8 आदि उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

दिन में होने वाली ऐसी पार्टियों में हैप्पी आवर्स के नाम पर बीयर के कांबो ऑफर भी शामिल हैं। जिसमें आसानी से बच्चे फंस रहे हैं। इन पार्टियों में ज्यादातार स्कूल में पढ़ने वाले किशोरों को शामिल किया जाता है। स्कूल से ही बच्चों को सीधे हुक्का बार तक लाने के लिए ऐसी पार्टियों को दिन में आयोजित किया जाता है।

ये तो सिर्फ बानगी है। आगे पढ़िए, ऐसे तीन और अपराध जिनको करने में बड़े-बड़ों के पसीने छूट सकते हैं लेकिन इन्हें अंजाम देने वाले बच्चे और किशोर हैं...

नाबालिगों के बीच छिड़ा गैंगवार

Dangerous crimes of minors.

Story 2 :
उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के अशोक विहार इलाके में 72 घंटे में दो हत्याओं को अंजाम दिया गया। पुलिस को शक था कि दोनों ही हत्याएं गैंगवार का अंजाम हैं। लेकिन जांच में जो सच सामने आया उस पर यकीन करना पुलिस के लिए भी आसान नहीं था।

इन हत्याओं को अंजाम देने वाले लोग किसी प्रोफेशनल गैंग के शातिर अपराधी नहीं थे। असल में ये मर्डर दो ऐसे गुटों के बीच आपसी रंजिश का नतीजा थे जिनके सदस्य नाबालिग बच्चे हैं।

पुलिस को गोलू (20) नामक युवक की लाश अशोक विहार डीडीए पार्क के रेलवे ट्रैक के पास मिली थी। पुलिस के अनुसार गोलू पर धारदार हथियार से कई बार वार किया गया था। एक दिन पहले इसी इलाके में एक युवक की लाश बरामद हुई थी।

घटना के कुछ घंटों बाद ही पुलिस ने शक के आधार पर दो नाबालिगों को गिरफ्तार कर जांच शुरू की। दोनों नाबालिगों ने कबूल किया कि उन्होंने गोलू का कत्ल किया है।

नाबालिग और मासूम दिखने वाले इन बच्चों ने माना कि उन्होंने अपने सरगना संजीव राणा के मर्डर का बदला लेने के लिए इस हत्या को अंजाम दिया है।

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी और भी चौंकाने वाले खुलासे हुए। आरोपी नाबालिगों ने पुलिस को बताया कि राणा उनके गैंग का नेता था। इस गैंग को नाबलिग बच्चों द्वारा चलाया जाता है जो पश्चिमी दिल्ली में छिनैती के अपराधों में सक्रिय है।

सूत्रों के मुताबिक राणा का दूसरे गुट से विवाद चल रहा था। राणा डीडीए पार्क के आस-पास के इलाके में अपना गैंग चलाता था। ‌प्रतिद्वंदी गुट ने धोखे से राणा की हत्या कर दी थी। दूसरे गुट में भी सभी सदस्य नाबालिग हैं और 17 साल का एक युवा इनका सरगना है।

पुलिस के अनुसार राणा की मौत के बाद उसके गुट के लोग दूसरे गुट के सदस्यों को खोज रहे थे। जैसे ही उन्हें गोलू दिखा उस पर हमला कर दिया गया। जांच में पता चला कि जिस लड़के को गोलू समझ कर मारा गया वह कोई और था। मारे गए लड़के का नाम भी गोलू था। बस इसी गलतफहमी में उसकी हत्या कर दी गई थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने इस इलाके में मैन-हंट नाम का ऑपेरशन शुरु किया और उन्हें पकड़ने के लिए कई ‌टीमें भी बनाई। गिरफ्तार किए गए सभी नाबालिग फिलहाल बाल सुधार गृह में हैं।

नाबालिग ने रची आतंकी हमले की साजिश

Dangerous crimes of minors.

Story 3 :
नाम : खालिद मोहम्मद, उम्र: 17 साल, इरादा: ‌दिल्ली में इतने धमाके करना कि पूरा शहर बंजर बन जाए।

खालिद फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में सजा काट रहा है। उसने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि उम्रकैद की उसकी सजा को कम कर दिया जाए क्योंकि जब उसे गिरफ्तार किया गया तो वह नाबालिग था।

आप सोच रहे होंगे कि एक नाबालिग को भला जेल कैसे भेजा जा सकता है। असल में सुप्रीम कोर्ट ने 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट मामले में यह स्पष्ट कर दिया था कि टाडा या पोटा जैसे अपराध में शामिल किसी भी अपराधी के साथ इस आधार पर कोई रहम नहीं किया जा सकता कि वह नाबालिग है। इस आधार पर दिल्ली हाईकोर्ट ने खालिद की सजा को कम करने से मना कर दिया।

असल में खालिद मोहम्मद को गोकुलपुरी से 17 फरवरी 1994 को विस्फोटकों के एक जखीरे के साथ पकड़ा गया था। उसकी योजना पाकिस्तान से आए आतंकियों के साथ मिलकर दिल्ली के कई इलाकों में विस्फोटों को अंजाम देना था। जांच में पता चला कि खालिद खुद भी पाकिस्तान के लाहौर से चोरी-छिपे दिल्ली तक पहुंचा था।

आरोप साबित होने के बाद निचली अदालत ने 1996 में उसे आजीवन कारावास की सजा दी थी। खालिद ने 2012 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर तर्क रखा कि गिरफ्तारी के समय उसकी उम्र मात्र 17 वर्ष थी।

नाबालिग लड़की जो मस्ती के लिए करती है लूट-पाट

Dangerous crimes of minors.

Story 4 :
11वीं में पढ़ने वाली छात्रा जिसकी उम्र 16 साल है, अगर अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ बाइक पर घूम रही हो तो क्या आप इस प्रेमी जोड़े को देख कर डरेंगे? शायदा ये सवाल आपको अटपटा लगे लेकिन, दिल्ली के आनंद विहार इलाके में सरेराह जो हुआ उसे जानने के बाद आपकी सोच बदल सकती है।

दिल्ली के आनंद विहार इलाके में भीड़ ने अचानक एक महिला को चीखते हुए देखा। किसी ने सरेराह उनकी सोने की चेन छपट ली थी। चीख की आवाज सुन दो युवकों ने तेजी से भाग रही एक बाइक को रोकने की कोशिश की। चंद ही मिनटों में दोनों बाइक सवार जमीन पर पड़े थे।

वहां खड़ा हर शख्स बाइक सवार अपराधियों को देखकर दंग था। असल में जिसने चेन खींची थी वह 16 साल की एक नाबालिग लड़की थी। जो अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ मौजमस्ती करने निकली थी। उसका प्रेमी साउथ अनारकली का रहने वाला 22 साल का अमरजीत सिंह था।

जल्द ही पुलिस भी वहां पहुंच गई। जांच में पता चला कि नाबालिग छात्रा द्वारा अंजाम दी गई यह कोई पहली घटना नहीं थी। मौजमस्ती के लिए वह अपने प्रेमी के साथ मिलकर कई वारदातों को अंजाम दे चुकी है। जिस महिला की चेन छीनी गई वह आनंद विहार इलाके में डॉक्टर हैं।

जांच में पता चला कि नाबालिग लड़की पूर्वी दिल्ली के एक स्कूल में पढ़ती है। वह अपने प्रेमी अमरजीत के साथ मौजमस्ती के लिए निकलती थी और मौका पाते ही ऐसी वारदातों को अंजाम देती थी। पुलिस के मुताबिक दोनों करोलबाग व पूर्वी दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में दस से अधिक वारदातों को अंजाम दे चुके हैं।

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