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पापा! मैं कमरे में बंद हूं..मुझे बचा लो
अमर उजाला, मोदीनगर
Updated Sun, 31 Jan 2016 01:20 AM IST
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‘पापा! मैं कमरे में बंद हूं...मुझे बचा लो।’ रात 12 बजे व्हाट्स एप के जरिए प्रज्ञा में पिता और बहन से मैसेज कर बातचीत की। करीब 2:30 घंटे प्रज्ञा मैसेज से बताती रही कि उसे एक अंधेरे कमरे में बंद कर रखा गया है।
केवल छोटी सी खिड़की है और अपहर्ता कमरे के बाहर पहरा दे रहे हैं। पापा फोन मत करना, वरना अपहर्ताओं को पता चल जाएगा कि मैं आपसे बात कर रही हूं। पापा मुझे नहीं पता, मैं इस वक्त कहां हूं।
अचानक मैसेज बदल गए, आखिरी मैसेज आया कि 11 लाख रुपये दे दो बेटी को छोड़ दिया जाएगा। अंदेशा है कि अपहर्ताओं को मोबाइल का पता चल गया होगा और उन्होंने उसे कब्जे में ले लिया होगा।
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गोविंदपुरी कालोनी निवासी रामप्यारे उपाध्याय की अपहृत बेटी प्रज्ञा उर्फ निहारिका (17) का 48 घंटे बाद भी सुराग नहीं लग सका है। शुक्रवार रात तीन बजे से उसका मोबाइल बंद होने के कारण पुलिस अंधेरे में तीर चला रही है।
बकौल रामप्यारे उपाध्याय, प्रज्ञा ने रात 12 से ढाई बजे तक उनके और बड़ी बेटी के मोबाइल पर व्हाट्स एप के जरिए मैसेज किए थे। प्रज्ञा ने बताया कि वह जिस कमरे बंद है उसके पास ट्रेन के गुजरने की आवाज आ रही है।
अपहरण के दौरान कार में बैठाते ही उसकी आंखों पर पट्टी बांध दी गई थी। बकौल सीओ राजेश सिंह, प्रज्ञा के मोबाइल की आखिरी लोकेशन दिल्ली कश्मीरी गेट की निकली थी।
मोदीनगर पुलिस ने दिल्ली पुलिस की मदद से शुक्रवार रात दिल्ली में छात्रा की तलाश की, लेकिन वह नहीं मिली। शनिवार को एसपी रूरल राकेश पांडेय ने मोदीनगर पहुंचकर जानकारी ली।
एएसपी डा. मीनाक्षी पीड़ित परिवार से मिलीं और पुलिस को दिशा-निर्देश दिए। उधर, सूत्रों का कहना है कि पुलिस छात्रा के कई क्लासमेट और दोस्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
ये है मामला
गोविंदपुरी कालोनी में राम प्यारे उपाध्याय परिवार के साथ रहते हैं। उनके दो बेटियां हैं। छोटी बेटी प्रज्ञा उर्फ निहारिका (17) सेंट टेरेसा स्कूल में इंटर की छात्रा है।
शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे वह जब मकान पर ताला लगाने आई, तभी कार सवार बदमाशों ने उसका अपहरण कर लिया। मौके से पुलिस को आठ लाख की फिरौती लिखा पत्र, चश्मा और चाभी मिली। रामप्यारे दिल्ली-नोएडा में इंटीरियर डेकोरेटर का काम करते हैं।
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केवल छोटी सी खिड़की है और अपहर्ता कमरे के बाहर पहरा दे रहे हैं। पापा फोन मत करना, वरना अपहर्ताओं को पता चल जाएगा कि मैं आपसे बात कर रही हूं। पापा मुझे नहीं पता, मैं इस वक्त कहां हूं।
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अचानक मैसेज बदल गए, आखिरी मैसेज आया कि 11 लाख रुपये दे दो बेटी को छोड़ दिया जाएगा। अंदेशा है कि अपहर्ताओं को मोबाइल का पता चल गया होगा और उन्होंने उसे कब्जे में ले लिया होगा।
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गोविंदपुरी कालोनी निवासी रामप्यारे उपाध्याय की अपहृत बेटी प्रज्ञा उर्फ निहारिका (17) का 48 घंटे बाद भी सुराग नहीं लग सका है। शुक्रवार रात तीन बजे से उसका मोबाइल बंद होने के कारण पुलिस अंधेरे में तीर चला रही है।
बकौल रामप्यारे उपाध्याय, प्रज्ञा ने रात 12 से ढाई बजे तक उनके और बड़ी बेटी के मोबाइल पर व्हाट्स एप के जरिए मैसेज किए थे। प्रज्ञा ने बताया कि वह जिस कमरे बंद है उसके पास ट्रेन के गुजरने की आवाज आ रही है।
अपहरण के दौरान कार में बैठाते ही उसकी आंखों पर पट्टी बांध दी गई थी। बकौल सीओ राजेश सिंह, प्रज्ञा के मोबाइल की आखिरी लोकेशन दिल्ली कश्मीरी गेट की निकली थी।
मोदीनगर पुलिस ने दिल्ली पुलिस की मदद से शुक्रवार रात दिल्ली में छात्रा की तलाश की, लेकिन वह नहीं मिली। शनिवार को एसपी रूरल राकेश पांडेय ने मोदीनगर पहुंचकर जानकारी ली।
एएसपी डा. मीनाक्षी पीड़ित परिवार से मिलीं और पुलिस को दिशा-निर्देश दिए। उधर, सूत्रों का कहना है कि पुलिस छात्रा के कई क्लासमेट और दोस्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
ये है मामला
गोविंदपुरी कालोनी में राम प्यारे उपाध्याय परिवार के साथ रहते हैं। उनके दो बेटियां हैं। छोटी बेटी प्रज्ञा उर्फ निहारिका (17) सेंट टेरेसा स्कूल में इंटर की छात्रा है।
शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे वह जब मकान पर ताला लगाने आई, तभी कार सवार बदमाशों ने उसका अपहरण कर लिया। मौके से पुलिस को आठ लाख की फिरौती लिखा पत्र, चश्मा और चाभी मिली। रामप्यारे दिल्ली-नोएडा में इंटीरियर डेकोरेटर का काम करते हैं।