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दिल्ली पुलिस की टीम को बंधक बनाकर मारपीट

Mon, 21 Apr 2014 03:22 AM IST
Updated Mon, 21 Apr 2014 03:22 AM IST
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criminals abducted delhi police team and beaten them

दिल्ली के पंजाबी बाग पुलिस की टीम को एक आरोपी की निशानदेही करवाना मंहगा पड़ा। परिवारवालों पर आरोप है कि स्थानीय पार्षद की मदद से उन्होंने पुलिस टीम के साथ मारपीट की और बंधक बना लिया। सरपंच की मदद से पटौदी थाना पुलिस ने बंधक पुलिस टीम को मुक्त कराया।

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पंजाबी बाग थाने में दिसंबर में जानलेवा हमला करने के मामले की जांच कर रही पुलिस टीम एसआई मनोज दहिया के नेतृत्व में एक आरोपी को लेकर गुड़गांव निशानदेही करने पहुंची थी।
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पुलिस टीम खोड़ गांव रणवीर उर्फ भोगल पुत्र राजवीर को उठाने के लिए आई थी। एसआई के साथ दो अन्य पुलिस कर्मी के साथ वारदात में शामिल एक आरोपी भी था।

पिटाई करके कमरे में बंद किया

criminals abducted delhi police team and beaten them

कार्रवाई के दौरान स्थानीय पार्षद परमजीत भी वहां पर पहुंचे। एसआई मनोज दहिया ने पटौदी थाना पुलिस को दिए बयान में बताया कि पार्षद व रणवीर के परिवार वालों ने पुलिस टीम के साथ मारपीट की और उनको एक कमरे में बंद कर दिया।

इसी दौरान गांव के सरपंच संदीप ने घटना की जानकारी पटौदी थाना पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंच कर बंधक लोगों को मुक्त करा कर साथ ले आई।

पटौदी थाना पुलिस पार्षद व रणवीर के परिवारवालों के खिलाफ मारपीट करने, सरकारी काम में बाधा डालने का मामला दर्ज किया। पटौदी थाना पुलिस की टीम पहुंचने से पहले आरोपी घर से फरार हो गया।

...तो टल सकती थी ये घटना!

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दिल्ली पुलिस अगर स्थानीय पुलिस को विश्वास में लेकर छापेमारी करती तो यह नौबत नहीं आती। दिल्ली पुलिस पर बार-बार बिना सूचना के अपने मुलजिम को उठाने का आरोप लगा है।

मेवात में पुलिस टीम के विरोध के बाद वहां पर बाहरी टीम की मदद के लिए अलग से प्रकोष्ठ गठित किया गया है। पुलिस आयुक्त आलोक मित्तल के अनुसार, कोई भी पुलिस टीम अपने मुलजिम की तलाश में आती है तो पहले जानकारी देना जरूरी नहीं होता है।

मुलजिम के मिलने के बाद वह स्थानीय पुलिस को जानकारी देने के बाद ही जाएगा। कई बार पुलिस टीम को लगता है कि स्थानीय पुलिस को बताने में देर हो जाने पर मुलजिम उसके हाथ से निकल सकता है।

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