पुलिस का बेरहम चेहरा : मदरसे से भागे बच्चे को नहीं दी शरण
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ऑपरेशन मुस्कान के नाम पर स्टेशनों से बच्चों को पकड़कर परिजनों के हवाले कर अपनी पीठ थपथपाने वाली राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) का असली चेहरा सामने आया है।
शनिवार की रात मदरसे से भागे एक बच्चे को लेकर चौकी पहुंचे यात्री को जीआरपी कर्मी ने भगा दिया और उल्टे उस यात्री पर ही जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की।
यात्री बच्चे को लेकर आरपीएफ चौकी पहुंचा और परिजनों को सूचना दी। चौकी पहुंचे परिजनों ने कागजी कार्रवाई पूरी कर बच्चे को अपने साथ ले गए। घटना पलवल स्टेशन की है।
हथीन (पलवल) के मलाई गांव निवासी लियाकत अली का आठ साल का बेटा आजम खान (8 वर्ष) आजाद मार्केट नई दिल्ली स्थित मदरसे में चौथी क्लास में पढ़ता है।
मदरसे से निकलकर जा बैठा ट्रेन में
शनिवार की शाम वह मदरसे से निकलकर नई दिल्ली स्टेशन आ गया और पलवल जाने वाली 64082 शटल में बैठ गया। ट्रेन जब बल्लभगढ़ पहुंची तो उसी बोगी में सफर कर रहे शिव कॉलोनी निवासी भावेश सोमानी ने आजम को गुमशुम देखकर पूछा।
आजम ने पलवल जाने की बात कही। रात करीब आठ बजे ट्रेन जब पलवल स्टेशन पहुंची तो शक होने पर भावेश ने आजम को अपने साथ उतार लिया और वे जीआरपी चौकी ले गए।
भावेश का कहना है कि चौकी में तैनात पुलिसकर्मी ने उनकी खुद की जिम्मेदारी बताकर उन्हें भगा दिया। फिर वह बच्चे को लेकर आरपीएफ चौकी पहुंचे और परिजनों को सूचना देकर वहां बुलाया।
भावेश ने बच्चे को माता पिता से मिलाया
परिजनों के साथ पहुंचे बच्चे के चाचा सलीम से आरपीएफ चौकी में तैनात हवलदार बाबूलाल, लाल सागर गौतम, वीरेंद्र सिंह, वेद प्रकाश व संजय सिंह ने पूछताछ कर तसल्ली होने पर बच्चे को सलीम के हवाले कर दिया।
रात करीब नौ बजे सलीम बच्चे को लेकर घर चले गए। सलीम का कहना था कि यदि यात्री भावेश, आजम को अपने साथ नहीं लाते तो कहीं और भी जा सकता था। उसने आरपीएफ कर्मियों और यात्री भावेश का आभार जताया।
उधर, चौकी इंचार्ज जीआरपी भीम सिंह का कहना है कि उन्हें इस बात की सूचना मिल गई है। संबंधित कर्मचारी से पूछताछ की जाएगी।