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पुराने नहीं, नए सिरे से होगा ऑटो परमिट का आवंटन
बृजेश सिंह/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 10 Apr 2016 09:31 AM IST
सार
- परिवहन मंत्री ने ऑटो परमिट आवंटन प्रक्रिया नए सिरे से तय करने के लिए गठित की कमेटी
- दस हजार ऑटो परमिट आवंटन में बीते साल दिसंबर में सम विषम से पहले हुआ था घोटाला
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गोपाल राय
विस्तार
घोटाले के चलते ठंडे बस्ते में पड़े दस हजार ऑटो परमिट आवंटन को लेकर सरकार ने फिर कवायद शुरू कर दी है। परिवहन मंत्री ने ऑटो परमिट के आवंटन प्रक्रिया को फिर से नए सिरे से तैयार करने के लिए कमेटी का गठन किया है।
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यह कमेटी आवंटन प्रक्रिया के प्रस्ताव तैयार करेगी। बताते चले कि इस पूरे घोटाले में कुल चार अधिकारी निलंबित हो चुके है। इसकी जांच अभी तक जारी है।
परिवहन मंत्री गोपाल राय ने बताया कि दस हजार ऑटो परमिट आवंटन अब नए सि से किया जाएगा। इसके लिए परिवहन विभाग के अधिकारियों की एक कमेटी की बनाई गए है जो कि पूरी आवंटन प्रक्रिया का प्रस्ताव तैयार करेगी।
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हालांकि इसके लिए कोई टाइम लाइन तय नहीं की गई है। मगर सरकार अब दोबारा से इसके आवंटन पर पारदर्शिता चाहती है जिससे कोई विवाद ना हो।
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दस हजार ऑटो परमिट आरक्षित वर्ग में
बताते चले कि यह दस हजार ऑटो परमिट आरक्षित वर्ग एससी, एसटी और ओबीसी के थे। बार-बार आवेदन मंगाए जाने के बाद भी जब कोई लेने नहीं आया तो दिसंबर 2014 में दिल्ली परिवहन विभाग ने इसे सामान्य वर्ग में बांटने की मंजूरी दे दी।
इसके लिए 12 जनवरी से 13 फरवरी 2015 के बीच दो चरणों में आवेदन मंगाए गए। परिवहन विभाग को कुल 17,400 आवेदन मिले थे। इसी आवेदन पर पिछले सम विषम से पहले 21 दिसंबर 2015 से परमिट का एलओआई (लेटर ऑफ इंटेट) बांटने का काम शुरू हुआ। अभी 900 के करीब लोगों का यह एलओआई जारी हुआ था कि घोटाले का खुलासा हो गया।
इसमें ऐसे लोग शामिल थे जो कि बताए पते पर रहते ही नहीं थे। यह परमिट फाइनेंसरों के हाथ में जा रहा था। तब से परमिट आवंटन ठंडे बस्ते में पड़ा है।
इसके लिए 12 जनवरी से 13 फरवरी 2015 के बीच दो चरणों में आवेदन मंगाए गए। परिवहन विभाग को कुल 17,400 आवेदन मिले थे। इसी आवेदन पर पिछले सम विषम से पहले 21 दिसंबर 2015 से परमिट का एलओआई (लेटर ऑफ इंटेट) बांटने का काम शुरू हुआ। अभी 900 के करीब लोगों का यह एलओआई जारी हुआ था कि घोटाले का खुलासा हो गया।
इसमें ऐसे लोग शामिल थे जो कि बताए पते पर रहते ही नहीं थे। यह परमिट फाइनेंसरों के हाथ में जा रहा था। तब से परमिट आवंटन ठंडे बस्ते में पड़ा है।