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फर्जी एसीपी बन डाक्टर से मांगे पांच लाख
अमर उजाला, वैशाली
Updated Sat, 05 Jul 2014 01:18 AM IST
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दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच का फर्जी एसीपी बनकर अस्पताल के एमडी से पांच लाख रुपये मांगना महंगा पड़ा गया। फर्जी एसीपी ने चंद्रलक्ष्मी अस्पताल के एमडी से फोन कर अस्पताल का मामला निपटाने की बात कहकर रकम मांगी थी। एमडी ने फर्जी एसीपी को मिलने के लिए बुलाया इसी बीच इंदिरापुरम पुलिस ने दबोच लिया।
वैशाली सेक्टर 5 में चंद्र लक्ष्मी अस्पताल है। शुक्रवार को अस्पताल में एक फोन आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच का एसीपी बताया। उसने कहा कि अस्पताल के खिलाफ दिल्ली में एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई है।
इस संबंध में अस्पताल के एमडी डाॅ. मुकेश अग्रवाल से बातएं। इस पर रिसेप्शन की ओर से एमडी डाॅ. मुकेश अग्रवाल का मोबाइल नंबर दे दिया गया। फर्जी एसीपी ने एमडी से भी वही बात कही। मामले को निपटाने के लिए पांच लाख रुपये की मांग की। एमडी ने उसे अस्पताल आकर बात करने को कहा है।
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दोपहर एक बजे फर्जी एसीपी अस्पताल पहुंचा और एमडी डाॅ. मुकेश अग्रवाल से मिला। इस दौरान एसीपी ने एमडी पर दबाव बनाने की कोशिश की। उसने यह नहीं बताया कि रिपोर्ट किसने दर्ज कराई है।
शंका होने पर डाॅ. महेश अग्रवाल ने आईडी मांगी तो उसने खुद को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट बताया। अकड़ में बोला कि आईकार्ड क्या पूरी टीम बुला लेगा। गाड़ी में चार पिस्टल भी पड़ी हैं। इसपर एसीपी भड़क गया और बाहर जाने लगा। तभी अस्पताल कर्मचारियों ने उसे पकड़ लिया।
सूचना पर पहुंची इंदिरापुरम पुलिस उसे वैशाली चौकी ले आई। पूछताछ में उसने अपना नाम विक्रम निवासी वैशाली सेक्टर-5 बताया।
वह दिल्ली स्थित एक कंपनी में मैनेजर है। पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन की शिकायत पर विक्रम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। पुलिस ने उसकी कार की तलाशी ली, जिसमें कोई हथियार नहीं मिला।
मुफ्त इलाज की बात का माजरा
पूछताछ में पता चला कि फर्जी एसीपी चाहता था कि चंद्रलक्ष्मी अस्पताल में उसकी पत्नी का मुफ्त में उपचार हो जाए। इस बारे में बातचीत के दौरान उसने एमडी डाॅ. मुकेश अग्रवाल से भी जिक्र किया था। लेकिन बाद में सारा माजरा ही उल्टा हो गया।
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वैशाली सेक्टर 5 में चंद्र लक्ष्मी अस्पताल है। शुक्रवार को अस्पताल में एक फोन आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच का एसीपी बताया। उसने कहा कि अस्पताल के खिलाफ दिल्ली में एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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इस संबंध में अस्पताल के एमडी डाॅ. मुकेश अग्रवाल से बातएं। इस पर रिसेप्शन की ओर से एमडी डाॅ. मुकेश अग्रवाल का मोबाइल नंबर दे दिया गया। फर्जी एसीपी ने एमडी से भी वही बात कही। मामले को निपटाने के लिए पांच लाख रुपये की मांग की। एमडी ने उसे अस्पताल आकर बात करने को कहा है।
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दोपहर एक बजे फर्जी एसीपी अस्पताल पहुंचा और एमडी डाॅ. मुकेश अग्रवाल से मिला। इस दौरान एसीपी ने एमडी पर दबाव बनाने की कोशिश की। उसने यह नहीं बताया कि रिपोर्ट किसने दर्ज कराई है।
शंका होने पर डाॅ. महेश अग्रवाल ने आईडी मांगी तो उसने खुद को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट बताया। अकड़ में बोला कि आईकार्ड क्या पूरी टीम बुला लेगा। गाड़ी में चार पिस्टल भी पड़ी हैं। इसपर एसीपी भड़क गया और बाहर जाने लगा। तभी अस्पताल कर्मचारियों ने उसे पकड़ लिया।
सूचना पर पहुंची इंदिरापुरम पुलिस उसे वैशाली चौकी ले आई। पूछताछ में उसने अपना नाम विक्रम निवासी वैशाली सेक्टर-5 बताया।
वह दिल्ली स्थित एक कंपनी में मैनेजर है। पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन की शिकायत पर विक्रम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। पुलिस ने उसकी कार की तलाशी ली, जिसमें कोई हथियार नहीं मिला।
मुफ्त इलाज की बात का माजरा
पूछताछ में पता चला कि फर्जी एसीपी चाहता था कि चंद्रलक्ष्मी अस्पताल में उसकी पत्नी का मुफ्त में उपचार हो जाए। इस बारे में बातचीत के दौरान उसने एमडी डाॅ. मुकेश अग्रवाल से भी जिक्र किया था। लेकिन बाद में सारा माजरा ही उल्टा हो गया।