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Delhi: कोर्ट की अनोखी सजा, दस- दस पेड़ लगाने, 10 साल तक देखभाल करने की शर्त पर प्राथमिकी रद्द

Wed, 21 Jun 2023 01:10 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Wed, 21 Jun 2023 01:10 AM IST
सार

प्राथमिकी को रद्द करने की मांग करने वाली एक याचिका के जवाब में शिकायतकर्ता और पीड़ितों ने कहा कि वे अब प्राथमिकी पर मुकदमा नहीं चलाना चाहते हैं और पूरे मामले को शांत करना चाहते हैं।

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Court unique punishment FIR canceled condition planting ten trees
कोर्ट का फैसला - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

दिल्ली की एक अदालत ने मारपीट के आरोपियों को अपने आवास के आसपास दस-दस पेड़ लगाने और 10 वर्ष तक देखभाल का निर्देश दिया है। अदालत ने इस शर्त पर उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द कर दी। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने जांच अधिकारी को एमसीडी के संबंधित बागवानी विभाग से संपर्क करने और उस क्षेत्र को इंगित करने के लिए कहा, जहां पेड़ लगाए जाने हैं। वृक्षों को एक समूह में होने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन पार्कों की चहारदीवारी आदि में हो सकते हैं, जहां भी संबंधित विभाग इसे उपयुक्त और उचित समझे। पौधरोपण प्रक्रिया चार सप्ताह के भीतर पूरी की जाएगी।

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दोनों पक्षों ने समझौता कर अदालत से प्राथमिकी रद्द करने का आग्रह किया था। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग शिकायतकर्ता की झुग्गी के बाहर हंगामा कर रहे थे। जब उसने उनसे शोर नहीं मचाने को कहा तो उन्होंने बहस शुरू कर दी और बाद में आरोपी डंडा लेकर लौटा और शिकायतकर्ता और उसकी पत्नी दोनों के सिर पर वार कर दिया। शिकायतकर्ता के बहनोई ने उन्हें रोकने के लिए हस्तक्षेप किया, लेकिन उन्हें कई वार भी किए गए।

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प्राथमिकी को रद्द करने की मांग करने वाली एक याचिका के जवाब में शिकायतकर्ता और पीड़ितों ने कहा कि वे अब प्राथमिकी पर मुकदमा नहीं चलाना चाहते हैं और पूरे मामले को शांत करना चाहते हैं। अदालत ने उनके आग्रह को स्वीकार करते हुए कहा कि अगर आपराधिक कार्यवाही को आगे चलाने की अनुमति दी जाती है तो उसे कोई उपयोगी उद्देश्य नहीं दिखता है। हालांकि इस झगड़े के कारण पुलिस के उपयोगी समय, जो कि महत्वपूर्ण मामलों के लिए उपयोग किया जा सकता था नष्ट हुआ है। अदालत ने कहा याचिकाकर्ताओं को समाज के गरीब तबके से संबंधित बताया गया है। इसलिए याचिकाकर्ताओं पर जर्माना नहीं किया जा रहा लेकिन याचिकाकर्ताओं को कुछ सामाजिक अच्छा करना चाहिए।

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