फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Court send notice to Tihar jail over plea to stop hang Nirbhaya convicts

निर्भया केस: दिल्ली कोर्ट का तिहाड़ जेल को नोटिस, पवन जल्लाद को बुलाया गया

Thu, 30 Jan 2020 05:47 PM IST
Abhishek Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhishek Singh Updated Thu, 30 Jan 2020 05:47 PM IST
विज्ञापन
Court send notice to Tihar jail over plea to stop hang Nirbhaya convicts
तिहाड़ जेल - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को तिहाड़ जेल प्रशासन को नोटिस जारी किया है। अदालत ने प्रशासन से निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले में चारों दोषियों को फांसी टालने वाली याचिका पर शुक्रवार को जवाब देने को कहा है। विशेष न्यायाधीश एके जैन ने तिहाड़ जेल के अधीक्षक को शुक्रवार को सुबह दस बजे तक इस याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा।

विज्ञापन


फांसी की सजा का सामना कर रहे दोषी विनय कुमार शर्मा की ओर से पेश वकील एपी सिंह ने अदालत से फांसी को अनिश्चितकाल के लिए टाल देने को कहा क्योंकि कुछ दोषियों के कानूनी उपचार अभी बाकी हैं। इसपर अभियोजन पक्ष ने कहा कि याचिका न्याय का मजाक है और यह फांसी को टालने की महज एक तरकीब है। 
विज्ञापन


इधर, तिहाड़ जेल प्रशासन ने पवन जल्लाद को मेरठ से बुलाया है। पवन चारों दोषियों को फांसी पर लटकाने वाले हैं। मालूम हो कि एक फरवरी को चारों दोषियों को फांसी दी जाएगी। वहीं, कल(शुक्रवार) को पवन चारों दोषियों के डमी को फांसी पर लटकाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

 


 

अक्षय कुमार की क्यूरेटिव याचिका खारिज

निर्भया के दोषी अक्षय कुमार को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। अदालत ने उसकी क्यूरेटिव याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही अक्षय की फांसी से दूरी और कम हो गई है। अब उसके पास सिर्फ राष्ट्रपति को दया याचिका भेजने का विकल्प मौजूद है।

अक्षय की याचिका में बेतुकी दलीलें
वहीं, अक्षय की सुधारात्मक याचिका में कहा गया है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर जन दबाव और जनता की राय के चलते अदालतें सभी समस्याओं के समाधान के रूप में फांसी की सजा सुना रही हैं।

अक्षय ने अपनी याचिका में दावा किया है कि दुष्कर्म एवं हत्या के करीब 17 मामलों में शीर्ष न्यायालय के तीन जजों की पीठ ने मौत की सजा में बदलाव कर उसे कम किया है। 

दोषियों के पास हैं अब ये विकल्प

ऐसे ही एक मामले में एक नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म एवं हत्या के मामले में मौत की सजा को इस कोर्ट ने एक पुनर्विचार फैसले में घटा कर 20 साल के सश्रम कारावास में तब्दील कर दिया। यह इस आधार पर किया गया कि दोषी की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं थी और उसके सुधार की अब भी गुंजाइश है।

याचिका में जस्टिस जेएस वर्मा कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि समिति ने दुष्कर्म एवं हत्या के अपराधों के लिए मौत की सजा के खिलाफ पैरोकारी की है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed