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महिला को बच्चे की देखभाल संग नौकरी के लिए नहीं किया जा सकता बाध्य: कोर्ट

Sat, 04 Jan 2020 06:26 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Sat, 04 Jan 2020 06:26 AM IST
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court says, Woman cannot be forced to work with child care
कोर्ट ने सुनाया फैसला - फोटो : अमर उजाला

जब किसी महिला को अपने बच्चे की देखभाल करनी हो तो तब उसे काम करने के लिए बाध्य नहीं की किया सकता और वहीं उसके पति को मौज मस्ती करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। महिला को 24 घंटे के लिए मशीन नहीं बनने दिया जा सकता है।

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अदालत ने यह तल्ख टिप्पणी करते हुए उक्त महिला को मिलने वाली गुजाराभत्ता राशि को 10 हजार से बढ़ाकर 35 हजार रुपये कर दिया। इस मामले में महिला ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी।
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द्वारका जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय गोयल ने महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए उससे अलग रह रहे पति को कड़ा संदेश दिया। न्यायाधीश ने कहा कि पढ़ी लिखी होने के बावजूद महिला को अपने बेटे की देखभाल के लिए अच्छी नौकरी छोड़नी पड़ी क्योंकि बच्चा समय पूर्व पैदा हुआ और उसकी बहुत देखभाल करने की जरूरत थी।
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इसलिए निचली अदालत द्वारा 10 हजार रुपए गुजारा भत्ता देने के निर्णय को निरस्त कर गुजारा भत्ता 35 हजार रुपए किया जाता है। निचली अदालत ने बच्चे के लिये पति से मिलने वाला 10 हजार रुपये का अंतरिम गुजारा भत्ता बढ़ाने से इनकार कर दिया था। 

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