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कोर्ट ने कहा: कुरान और अन्य इस्लामी पुस्तकों में शिक्षाओंं पर किसी का कॉपीराइट नहीं, 50 हजार का जुर्माना लगा

Thu, 04 Aug 2022 08:21 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 04 Aug 2022 08:21 AM IST
सार

जिला न्यायाधीश संजीव कुमार अग्रवाल ने आदेश में कहा कि कुछ सामग्री पवित्र पुस्तकों कुरान और हदीस में दी गई शिक्षा के समान होने के लिए बाध्य हैं और इस्लाम धर्म से संबंधित अन्य धार्मिक पाठ सभी पुस्तकों में समान होने के लिए बाध्य हैं, जो इस्लाम पर पढ़ाने के बारे में हैं। इन शिक्षाओं पर किसी का कॉपीराइट नहीं हो सकता है

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court says No one has copyright on the teachings in Quran and other Islamic books
सांकेतिक फोटो - फोटो : Social Media

विस्तार

अदालत ने स्पष्ट किया कि कुरान और अन्य इस्लामी पुस्तकों में शिक्षाओं पर किसी का कॉपीराइट नहीं हो सकता है। अदालत ने ‘इस्लामिक स्टडीज’ नामक पुस्तक के प्रकाशन पर दायर कॉपीराइट उल्लंघन के मुकदमे को खारिज करते हुए वादी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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जिला न्यायाधीश संजीव कुमार अग्रवाल ने आदेश में कहा कि कुछ सामग्री पवित्र पुस्तकों कुरान और हदीस में दी गई शिक्षा के समान होने के लिए बाध्य हैं और इस्लाम धर्म से संबंधित अन्य धार्मिक पाठ सभी पुस्तकों में समान होने के लिए बाध्य हैं, जो इस्लाम पर पढ़ाने के बारे में हैं। 
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इन शिक्षाओं पर किसी का कॉपीराइट नहीं हो सकता है, जो पवित्र पुस्तकों कुरान और हदीस या अन्य इस्लामी पुस्तकों में लिखी गई हैं।यह मुकदमा दिल्ली के दरियागंज में स्थित इस्लामिक किताबों के प्रकाशक और निर्यातक इस्लामिक बुक सर्विस (पी) लिमिटेड द्वारा दायर किया गया था। 
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दावा किया गया कि मौलवी अब्दुल अजीज किताबों की ‘इस्लामी तालीमत’ शृंखला नामक साहित्यिक कृति के मालिक और लेखक हैं। उन्होंने बिना शर्त कंपनी को अपना कॉपीराइट सौंपा था और विचार के खिलाफ काम की पांडुलिपि भी सौंप दी थी।

पतंग उड़ाने और बनाने, भंडारण परिवहन पर प्रतिबंध की मांग

पतंग की डोर से होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकार को पतंग उड़ाने, बनाने, बिक्री-खरीद, भंडारण और परिवहन पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए जाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि पतंग की डोर से होने वाली दुर्घटनाओं के कारण कई व्यक्ति और पक्षी मारे गए और घायल हो गए ,ऐसी दुर्घटनाएं नियमित रूप से हो रही हैं। 

प्रतिवादी उचित कार्रवाई करने में पूरी तरह से विफल रहे हैं, जबकि दिल्ली पुलिस अधिनियम 1978 की धारा 94 के अनुसार पतंगबाजी पहले से ही निषिद्ध है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता संसेर पाल सिंह ने कहा पतंग उड़ाने वाले प्रतियोगी की पतंग की डोर काटकर उसे प्रतियोगिता से बाहर निकालने की कोशिश करता है। 

इसके लिए प्रत्येक पतंगबाज कांच कोटेड या धातु की डोरी का स्रोत और उपयोग करने की कोशिश करता है, जो लोकप्रिय रूप से चीनी मांझा के रूप में जाना जाता है।
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