बिसाहड़ा :इकलाख के परिवार पर दर्ज होगा गोकशी का मामला
बिसाहड़ा कांड में गोहत्या के मामले को लेकर 156/3 की अर्जी पर सुनवाई करते हुए गौतमबुद्ध नगर न्यायालय ने जारचा पुलिस को इकलाख के परिजनों पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।
बिसाहड़ा के सूरजपाल ने 25 सितंबर को बिसाहडा गांव में गोकशी को लेकर रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए न्यायालय में धारा 156/3 क़े तहत अर्जी दी थी। गोहत्या अधिनियम के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट विजय कुमार ने मामले की सुनवाई की।
अंतिम सुनवाई 11 जुलाई को हुई। सुनवाई के दौरान याची के वकील राजीव त्यागी ने रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए न्यायालय में रूलिंग दायर की थी। वहां इकलाख की हत्या के दौरान घटना स्थल से बरामद मांस की फॉरसिंक रिपोर्ट की प्रति दायर की थी।
न्यायालय ने 11 जुलाई को ही रख लिया था फैसला सुरक्षित
अर्जी में गोहत्या करने के दौरान मौजूद उन गवाहों के नाम भी बताए गए, जिनके द्वारा गाय को काटते हुए देखा गया। अर्जी मे मृतक इकलाख, असगरी (इकलाख की मां) इकरामन (इकलाख की पत्नी), बेटा दानिश खां, शाहिस्ता और सोना पत्नी जफरुद्दीन पर आरोप लगाए गए हैं।
सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि गोहत्या की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए सूरजपाल ने जारचा थाने में तहरीर दी थी। रिपोर्ट दर्ज न होने पर एसएसपी से भी शिकायत की थी, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। इसके बाद कोर्ट से गुहार लगाई थी।
न्यायालय ने 11 जुलाई को ही फैसला सुरक्षित रख लिया था। फैसले के लिए 14 जुलाई की तिथि तय की गई थी। गुरुवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए याची की अर्जी को स्वीकार कर लिया है।
कोर्ट ने जारचा पुलिस को रिपोर्ट दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए है। जांच से न्यायालय को भी अवगत करने का आदेश दिया है।
जानिए अब तक बिसाहड़ा मामले में क्या हुआ
-28 सितंबर को कुछ लोगों ने गांव के ट्रांसफार्मर के पास बीफ के अवशेष देखे
-28 सितंबर की मंदिर से गोहत्या का एनाउंस होने के बाद भीड़ इकलाख के घर पहुंची। इकलाख और बेटा दानिश की पिटाई की गई, जिसमें इकलाख की मौत हो गई।
-29 सितंबर सुबह एनटीपीसी पुलिस चौकी के नजदीक ऊंचा अमीर पुर के लोगों ने जाम लगाकर बवाल किया। पुलिस ने फायरिंग करते हुए लाठी चार्ज की। गोली लगने से राहुल यादव घायल हो गया।
-29 सितंबर को सूरजपाल ने गोकशी की रिपोर्ट दर्ज कराने लिए जारचा कोतवाली में तहरीर देने के लिए गया था, लेकिन पुलिस ने उसको थाने से भगा दिया।
-8 अक्तूबर को मामले की शिकायत एसएसपी, डीआईजी, जिलाधिकारी, मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजकर की गई।
-दिसंबर 2015 को पुलिस ने मांस की फारंसिंक जांच रिपोर्ट का सीलबंद लिफाफा कोर्ट में दाखिल किया ।
-31 मई 2016 को कोर्ट ने लिफाफा खोलकर जांच रिपोर्ट की नकल देने के आदेश दिए। जांच रिपोर्ट में बीफ की पुष्टि हुई।
2 जून 2016 को बिसाहड़ा गांव के ग्रामीण जारचा थाने पहुंचे। वहां पर सूरजपाल ने तहरीर दी।
5 जून को एसएसपी गौतमबुद्धनगर से शिकायत करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की गई।
9 जून 2016 को सूरजपाल ने कोर्ट में 156/3 क़े तहत अर्जी दी थी।