फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Court allows abortion to minor victim of sexual assault

Delhi: यौन उत्पीड़न की शिकार नाबालिग को कोर्ट ने दी गर्भपात की अनुमति, कही ये बात

Mon, 13 Mar 2023 09:54 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Mon, 13 Mar 2023 09:54 PM IST
सार

न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने कहा कि नाबालिग पीड़िता को यह जानते हुए कि वह खुद किशोरी है और मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार नहीं है और बच्चे को जन्म देने और पालने की अनुमति देना पूरी तरह से अनुचित होगा।

विज्ञापन
Court allows abortion to minor victim of sexual assault
अदालत का फैसला - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कथित यौन उत्पीड़न की शिकार 16 वर्षीय लड़की को लगभग 24 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी है। दरअसल पहले पिता ने नाबालिग के गर्भपात के लिए सहमति दी थी, लेकिन सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए आगे नहीं आए।

विज्ञापन


उच्च न्यायालय ने मामले की तात्कालिकता को देखते हुए कहा, चूंकि गर्भावस्था की चिकित्सा समाप्ति के लिए 24 सप्ताह की कानूनी सीमा तक पहुंचने में केवल 2-3 दिन शेष है। अदालत ने निर्मल छाया परिसर के अधीक्षक जहां लड़कियां रह रही हैं पिछले साल अक्टूबर से सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) द्वारा सुविधा के अधीक्षक को लड़की के अभिभावक के रूप में नियुक्त किया गया है।
विज्ञापन


न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने कहा कि नाबालिग पीड़िता को यह जानते हुए कि वह खुद किशोरी है और मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार नहीं है और बच्चे को जन्म देने और पालने की अनुमति देना पूरी तरह से अनुचित होगा। उच्च न्यायालय ने कहा यह केवल उसे पूरे जीवन के लिए आघात और सभी प्रकार के दुखों की ओर ले जाएगा। एक मेडिकल बोर्ड की 24 फरवरी की रिपोर्ट के अनुसार, नाबालिग 22-सप्ताह की गर्भवती थी और गर्भावस्था को जारी रखने या भ्रूण की चिकित्सा समाप्ति से गुजरने के लिए फिट है। उच्च न्यायालय ने कहा एक संवैधानिक अदालत होने के नाते पीड़ित के सर्वोत्तम हित को देखना कर्तव्य है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अदालत ने कहा कि पीड़िता द्वारा दी गई सहमति के मद्देनजर केवल उसके पिता के गैर-जिम्मेदाराना कृत्य के कारण निराश नहीं किया जा सकता है, जो सहमति देने के बाद औपचारिकताएं पूरी करने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। इस कृत्य के कारण पिता को बाद में मामले की जांच के दौरान जांच अधिकारी द्वारा देखा और पूछताछ की जा सकती है। अदालत नाबालिग द्वारा अपने पिता के माध्यम से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने उसे अपनी हिरासत सौंपने की मांग की थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed