निगम की जिम्मेदारी केजरीवाल सरकार को सौंपी जाए: सौरभ भारद्वाज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज में नगर निगम की हालत को देखते हुए दिल्ली की जनता से नगर निगम को आम आदमी पार्टी के मुख्य संयोजक और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सौंपने की अपील की है।
भारद्वाज ने कहा कि पिछली बार दिल्ली की जनता से गलती हुई थी कि जनता ने दिल्ली की सफाई की जिम्मेदारी भाजपा के हाथों में सौंप दी थी। इसका खामियाजा भी जनता को भुगतना पड़ रहा है। भारद्वाज ने कहा कि हम दिल्ली की जनता से अपील करते हैं कि इस बार नगर निगम की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के हाथों में सौंप कर देखिए हम दिल्ली की जनता से वादा करते हैं कि जिस प्रकार देश में दिल्ली के शिक्षा मॉडल और चिकित्सा मॉडल की चर्चा हो रही है उसी प्रकार दिल्ली के सफाई मॉडल की चर्चा भी पूरे देश में की जाएगी।
रैंकिंग पर भारद्वाज ने कहा कि नगर निगम के आंकड़ों ने दिल्ली को शर्मसार करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि मेरी विधानसभा क्षेत्र में जो शौचालय पिछले एक साल से बंद पड़े थे, उन्हें अचानक एक हफ्ते पहले खोल दिए गए थे। इस संबंध में जब अधिकारियों से पूछा तो उन्होंने कहा था कि सर्वेक्षण चल रहा है। जबकि अब वे शौचालय दोबारा बंद कर दिए गए हैं।
बीजेपी ने आम आदमी पार्टी की पीसी को बताया ओछी राजनीति
स्वच्छता सर्वेक्षण रिपोर्ट पर आप पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज की प्रेस कांफ्रेंस के बाद बीजेपी की तरफ से भी जवाब दिया गया। दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने इसे आम आदमी पार्टी की ओछी राजनीति करार दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी इस तरह की राजनीति में नहीं पड़ना चाहती।
प्रवीण शंकर ने कहा कि आज नगर निगम सफाई कर्मियों के सम्मान का समय है। जिन्होंने पिछले छह महीने में कोरोना महामारी काल के दौरान जान की बाजी लगाकर दिल्ली को साफ रखने का काम किया है। ऐसे समय में जब लोग अपने घरों का कूड़ा उठाने से डर रहे थे। तब निगम कर्मियों ने ना केवल सड़कों को साफ रखा, बल्कि घर-घर से कूड़ा उठाया। नहीं तो दिल्ली में गंदगी से एक और महामारी फैल जाती।
आम आदमी पार्टी के नेता राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं। जबकि दिल्ली जल बोर्ड की लापरवाही के कारण रोजाना हल्की सी बारिश में ही दिल्ली की सड़कें तालाब बन जाती हैं। जिसे देखकर दिल्लीवासी चाहते हैं कि दिल्ली जल बोर्ड वापस नगर निगम को सौंप दिया जाय। जिस प्रकार साल 1977 से पहले था।