पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थी बोले, साहब! नौ बजे दीया तो हम जलाएंगे, लेकिन घर का अंधेरा कब दूर होगा?
- मजनू का टीला और आदर्शनगर के हिन्दू शरणार्थी कैंपों में आज तक बिजली नहीं पहुंची
- शरणार्थियों की बस्ती में भी सभी लोग रात नौ बजे दीया-मोमबत्ती जलाएंगे
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार रात नौ बजे से नौ मिनट के लिए घरों की बिजली की रोशनी बंद कर अपनी-अपनी बालकनी में दीया-मोमबत्ती या टॉर्च जलाने की अपील की है। उनकी इस अपील को कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे स्वास्थ्यकर्मियों-सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
कई संगठनों ने इसे सफल बनाने की कोशिशें भी शुरू कर दी हैं, तो कुछ जगहों से इसके विरोध में आवाजें भी उठ रही हैं। इसी बीच, मजनू का टीला के पास रह रहे पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर वे भी दीया जलाएंगे और देश के साथ कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए खड़े होंगे।
लेकिन उनकी कॉलोनी में आज तक बिजली नहीं है और पूरी बस्ती अंधेरे में ही रहने को मजबूर है। सरकार को इस बस्ती में भी उजाला करने की कोशिश करनी चाहिए। बिजली के बिना उन लोगों को बेहद तंग हालत में जिंदगी गुजारनी पड़ रही है।
'हम तो दीया जलाकर ही रह रहे हैं'
पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थियों के कई कैंप हैं। वे आदर्श नगर, मजनू का टीला सहित छतरपुर के आसपास कई जगहों पर सड़कों के किनारे झुग्गियां बनाकर अपना गुजर-बसर करते हैं। ये लोग दिहाड़ी मजदूरी कर और सड़कों पर चलते लोगों को छोटे-मोटे सामान बेचकर कुछ कमाई कर अपनी आजीविका चलाते हैं। इन कैंपों में आज भी कोई सुविधा नहीं है।
कुछ जगहों पर पानी की सुविधा हो गई है, तो कुछ जगहों पर टैंकरों के पानी पर लोग गुजारा कर रहे हैं। इस कैंप के मुखिया दयालदास ने अमर उजाला को बताया कि उनकी बस्ती में भी सभी लोग रात नौ बजे दीया-मोमबत्ती जलाएंगे। लेकिन उनके लिए यह कोई नई बात नहीं होगी, बल्कि यह उनका रोज का काम है।
वे दीये-मोमबत्ती जलाकर ही जीने को मजबूर हैं। बस्ती में बिजली नहीं है, सभी परिवार मजबूरी में दिया-लालटेन या मोमबत्ती जलाकर रात गुजारते हैं। अंधेरे के कारण महिलाओं को भोजन बनाने में और बच्चों को पढ़ाई करने में बहुत परेशानी होती है, लेकिन उनके पास कोई विकल्प नहीं है।
मजनू का टीला के कैंप में लगभग 135 पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी परिवार रहते हैं जिनमें कुल मिलाकर लगभग 800 सदस्य रहते हैं।
कई प्रयास के बाद भी नहीं आई बिजली
आदर्शनगर बस्ती में कई पाकिस्तानी हिन्दुओं के संरक्षक की भूमिका निभा रहे भरत लाल ने बताया कि उन्होंने कई बार इन बस्तियों में बिजली लगवाने के लिए प्रयास किया था, लेकिन कोशिशों का अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है।
इसके लिए वे सैकड़ों शरणार्थियों को लेकर दिल्ली सरकार के बिजली विभाग के पास अपील भी कर चुके हैं। अभी तक कोई हल नहीं निकला है।