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किसी की मां बीमार तो किसी के घर में कोई कमाने वाला नहीं, शेल्टर होम फंसे लोग, सता रही अपनों की चिंता

Tue, 14 Apr 2020 05:56 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, फरीदाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, फरीदाबाद Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 14 Apr 2020 05:56 PM IST
सार

- लॉकडाउन के कारण शेल्टर होम में फंसे लोगों को सता रही अपनों की चिंता
- लॉकडाउन बढ़ने की घोषणा सुन परेशान हैं शेल्टर होम में रह रहे प्रवासी मजदूर

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Coronavirus lockdown people stuck in night shelters worry of their relatives
फरीदाबाद शेल्टर होम में रह रहे लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फरीदाबाद के शेल्टर होम में रह रहे प्रवासी मजदूर लॉकडाउन बढ़ने के बाद से परेशान हैं। घर में किसी की मां बीमार है तो किसी के घर में कमाने वाला कोई नहीं है। लॉकडाउन के दौरान शेल्टर होम में ठहरे लोगों को अपनों की चिंता सता रही है।

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शेल्टर होम में ठहरे लोगों और उनके परिजनों को उम्मीद थी कि 14 अप्रैल को लॉकडाउन खुलने के बाद सब ठीक हो जाएगा और वे अपने परिजनों के पास चले जाएंगे, मगर मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा से उनके चेहरों पर एक बार फिर मायूसी छा गई है। शेल्टर होम में रह रहे लोग परिवारजनों से मिलने को बेताब हैं, मगर यहां से जा नहीं पा रहे हैं।
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कोरोना के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद शेल्टर होम में ठहरे प्रवासी मजदूर काफी परेशान हैं।
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हर कोई उम्मीद लगाए बैठा था कि लॉकडाउन खुलने के बाद जल्द से जल्द अपने घर पहुंच कर अपनों से मुलाकात करेंगे और उनका दुख दर्द बांटेंगे। मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने अनखीर स्थित राधास्वामी संत्संग भवन में ठहराए गए प्रवासी मजदूरों से उनकी व्यथा जानी तो हर कोई अपने घर जाने को बेताब दिखा। 

जानिए क्या कह रहे लोग...

घर पर सिर्फ मां और बहन हैं। हम दोनों भाई यहां दिल्ली में रहकर मजदूरी कर जो कमाते थे, उसे घर भेजते थे और उसी से गुजारा चलता था। मां बीमार है। अकेले बहन उनकी देखभाल नहीं कर पा रही है। जमा पूंजी भी समाप्त होने लगी है। फोन पर कल भी मां से बात हुई थी तो वो रो रहीं थी। साथ ही उम्मीद लगाए बैठी थीं कि 14 अप्रैल को लॉकडाउन खुलने पर हम दोनों भाई उनके पास पहुंच जाएंगे, मगर आज पता चला कि लॉकडाउन बढ़ गया है तो घर फोन करने की हिम्मत नहीं हो रही है। - चंद्रभान, लक्ष्मणपुर, टीकमगढ़, मध्यप्रदेश

लॉकडाउन का पता चला तो हम लोग गांव सिकरावा, पुन्हाना से पैदल ही पुंछ, जम्मू जाने के लिए निकल पड़े थे। 30 मार्च को फरीदाबाद से गुजरते हुए पुलिस ने रोक लिया और यहां ले आई। आज 14 दिन हो गए हमें यहां पर, मगर घर जाने के बारे में कोई अता पता नहीं है। घर में पत्नी व बच्चे हैं। यहां से जो थोड़ा बहुत कमाता था वो घर भेजता था, जिससे गुजारा होता था। परिवार में कोई और कमाने वाला नहीं है। वहां घर में क्या हाल होगा, सोच कर भी जी घबराने लगता है। खुदा से यही दुआ कर रहे हैं कि जल्द से जल्द हम घर पहुंच जाएं। लॉकडाउन बढ़ गया है। ऐसे में यहां की सरकार को हमें अपने घर पहुंचे की व्यवस्था करनी चाहिए। - बाग सेन, पुंछ, जम्मू निवासी

सोहना में फ्लाइओवर निर्माण में काम में जुटे थे। लॉकडाउन होने का पता चला तो वहां काम कर रहे छह-सात मजदूर इक्ट्ठा सहारनपुर, उत्तर प्रदेश के लिए चल दिए। सैनिक कॉलोनी मोड़ के पास पुलिस ने रोक लिए और यहां ले आई। घर में हालात बहुत खराब हैं। घर में कमाने वाला कोई और नहीं है। फोन पर बच्चों से बात होती है तो सब परेशान हैं। लॉकडाउन बढ़ने से परेशानी और ज्यादा बढ़ेगी। हम लोग यहां ठहरे हुए हैं। खाने पीने की कोई परेशानी नहीं है, मगर घर वालों का गुजारा कैसे हो रहा होगा, यह सोच कर परेशान हो रहे हैं। - शकील, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश 

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