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गौतमबुद्धनगर में 16 नए मामले आए सामने, कुल संक्रमितों की संख्या 707 हुई
Wed, 10 Jun 2020 10:17 PM IST
Mohit Mudgal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
Published by: Mohit Mudgal
Updated Wed, 10 Jun 2020 10:17 PM IST
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नोएडा में कोरोना वायरस
- फोटो : PTI
गौतमबुद्धनगर में कोरोना वायरस के 16 नए मामले सामने आए हैं। जबकि 54 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया है। जिले में अबतक 477 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। गौतमबुद्धनगर में अभी 220 सक्रिय मामले हैं। कोरोना वायरस से अब जिले में 10 लोगों की मौत हो चुकी है। इसी के साथ जिले में कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 707 हो गई है।
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स्वास्थ्य कर्मियों को अब 7 दिन रहना होगा क्वारंटीन
राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान, शारदा अस्पताल, चाइल्ड पीजीआई और कैलाश अस्पताल के आइसोलेशन केंद्रों में कोरोना संक्रमितों के उपचार में लगे स्वास्थ्य कर्मियों को 14 दिन तक क्वारंटीन रहने की जरूरत नहीं है। शासन की ओर से जारी नए निर्देशों के मुताबिक, ड्यूटी के दौरान 7 दिन क्वारंटीन रहना होगा। उपचार के दौरान एक्टिव क्वारंटीन की अवधि पूरी होने के बाद कर्मचारियों की कोरोना जांच होगी। रिपोर्ट निगेटिव आने पर घर भेज दिया जाएगा।
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संक्रमितों के उपचार में लगे स्वास्थ्य कर्मियों को पहले छात्रावास व होटल में क्वारंटीन रहना पड़ता था। जिम्स को लेवल-2 श्रेणी का कोविड अस्पताल बनाया गया है। यहां आइसोलेशन वार्ड में संक्रमितों के इलाज में लगे कर्मचारी उपचार के दौरान सात दिन के लिए एक्टिव क्वारंटीन में रहते थे। उपचार की अवधि पूरी होने के बाद 14 दिन के लिए पैसिव क्वारंटीन में रहना पड़ता था। इसके बाद वह घर जा सकते थे।
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अब मेडिकल कर्मी एक्टिव क्वारंटीन में रहने के बाद घर जा सकेंगे। घर भेजने से पहले कर्मियों की कोरोना जांच की जाएगी। रिपोर्ट निगेटिव आने पर ही इजाजत मिलेगी। इस दौरान मरीजों के उपचार के लिए दूसरी टीम को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
होटल और गेस्ट हाउसों को भी मिलेगी छूट
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के नए निर्देश चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा भेजे गए हैं। इनके अनुसार सात दिन तक एक्टिव क्वारंटीन और 14 दिन तक पैसिव क्वारंटीन में रहना होता था। इसके लिए प्रशासन को भी कर्मचारियों के लिए गेस्ट हाउस, होटल आदि में रहने की व्यवस्था करनी होती थी। इसके लिए सरकार को होटलों को बड़ी रकम देनी पड़ती थी। नए परिवर्तन से होटल और गेस्ट हाउस संचालकों को राहत मिलेगी। वहीं, मेडिकल स्टाफ को भी परेशान नहीं होना पड़ेगा।