दिल्ली में बिगड़ रहे हालात, एक घरेलू सहायिका ने 20 लोगों को किया संक्रमित, इलाका बना कंटेनमेंट जोन
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एक घर में काम करने वाली घरेलू सहायिका से 20 लोग कोरोना संक्रमित होने के बाद जिला प्रशासन ने पूरा इलाका सील कर दिया है। यह मामला दिल्ली के पीतमपुरा इलाके का है, जहां के तरुण एंक्लेव में 24 मई को एक महिला संक्रमित मिली थी।
उसके संपर्क में आने वाले लोगों की जांच कराई गई तो उनमें से 20 पॉजिटिव मिले। इसके चलते प्रशासन ने 210 घरों को सील किया गया है। इस क्षेत्र में करीब 750 लोगों को क्वारंटीन किया गया है।
यहां से एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें लोगों का कहना है कि इलाके में कोरोना संक्रमित कई मरीज आ चुके हैं। फिलहाल, जिला प्रशासन ने कंटेनमेंट जोन में इलाके को तब्दील करते हुए वहां सख्ती बढ़ा दी है।
24 मई को सामने आया पहला केस
इस इलाके में पहला केस 24 मई को आया था, जिसके बाद से यहां तेजी से केस बढ़े और जून आने तक यहां इतने लोग संक्रमित हो गए कि प्रशासन ने इस इलाके को कंटेनमेंट जोन बनाने का निर्णय लिया।
24 मई के बाद यहां प्रशासन ने दो टीमें गठित कीं, जिसने पूरे इलाके में घर-घर का सर्वे शुरू किया। इसके साथ ही डीएम से लोगों ने गुहार लगाई कि पूरे इलाके को सील किया जाए और कंटेनमेंट जोन से लोगों के निकास और प्रवेश पर रोक लगाया जाए।
पूरा पीतमपुरा बफर जोन घोषित
इसके बाद इलाके के मकान संख्या 130 से 340 तक 750 से ज्यादा लोगों को सेल्फ क्वारंटीन में रहने को कहा गया है। यह इलाका जहां कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है, वहीं पूरे पीतमपुरा को बफर जोन घोषित किया गया है।
बताया जा रहा है कि इस इलाके में जो संक्रमण फैला है वह एक घरेलू सहायिका से फैला है। वह लॉकडाउन के दौरान भी घरों में काम करने के लिए आती रही, जिससे उस घर के बच्चों में संक्रमण फैल गया। इसके बाद यह संक्रमण बच्चों से घर के बाकी सदस्यों में फैल गया।
वहीं इस घर के बच्चे जो दूसरे घरों के बच्चों के साथ खेलने के लिए बाहर जाते थे, उससे उनको भी ये संक्रमण हो गया और फिर उससे बड़ों को हो गया।
कोविड बेड पर भर्ती नहीं किया जाएगा संदिग्ध मरीज
अस्पतालों को आदेश का सख्ती से पालन करने का निर्देश देते हुए दिल्ली स्वास्थ्य सचिव ने लिखा है कि हल्का असर या बिना लक्षण वाले मरीज को होम आइसोलेशन में रखा जाए। अगर उनके घर में जगह नहीं है तो संबंधित मरीज को सरकार के कोविड निगरानी केंद्र में भेजा जा सकता है।
इसके अलावा मरीज के भर्ती करने, जांच आदि की जानकारी समय पर देने के लिए भी कहा है। अस्पतालों की जिम्मेदारी है कि रोजाना संबंधित नोडल केंद्र में कोविड उपचार से जुड़ी सभी जानकारियां तय फॉर्मेट में जमा कराएं, ताकि सरकार को समय रहते जानकारी उपलब्ध हो सके।