कोरोना वायरसः भगवान के दरबार में भी छाई मंदी, बिड़ला मंदिर में विदेशी दर्शनार्थियों के प्रवेश पर रोक
- मंदिरों में दर्शानार्थियों की संख्या में भारी कमी,
- नवरात्रों में हाथ सैनेटाइज होने के बाद ही मिलेगा दर्शन
- विदेश से स्वदेश लौटे घरेलू दर्शनार्थी भी न आएं मंदिर
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इसका सीधा असर मंदिरों की आय पर भी पड़ा है। नवरात्रों का समय (25 मार्च से शुरू) मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ का होता है, लेकिन कोरोना के खौफ ने मंदिरों में भक्तों के पहुंचने की संख्या अभी से बेहद सीमित कर दी है। इस बार नवरात्रों में भी मंदिरों में दर्शनार्थियों की संख्या बहुत कम रहने के आसार हैं।
कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए राजधानी के बिड़ला मंदिर में विदेशी दर्शनार्थियों का प्रवेश पूरी तरह से रोक दिया गया है। विदेश से स्वदेश लौटे घरेलू दर्शनार्थियों से भी प्रशासन ने मंदिर न आने की बात कही है।
घरेलू दर्शनार्थियों को भी हाथ धुलने के बाद ही मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा है। मंदिर में काम कर रहे कर्मचारियों के लिए भी रोजाना दिन में कई बार हाथ धुलने और हाथों को सैनेटाइज करने का निर्देश दिया गया है।
बिड़ला मंदिर के प्रमुख प्रशासक विनोद कुमार मिश्रा ने अमर उजाला को बताया कि नवरात्रों के समय में सभी भक्तों को सेनेटाइजर से हाथ स्वच्छ करना और साबुन से हाथ धुलना अनिवार्य कर दिया जाएगा।
इस समय भी मंदिर में कोरोना के संक्रमण से लोगों को बचाने की पूरी कोशिश की जा रही है। मंदिर में औसतन चार से छह हजार लोग प्रतिदिन दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन कोरोना का मामला बढ़ने के बाद से दर्शनार्थियों की संख्या में भारी कमी आई है।
कथा भी नहीं होगी
विनोद कुमार मिश्रा ने बताया कि बिड़ला मंदिर में नवरात्रों के समय विशेष कथा का आयोजन किया जाता रहा है। दर्शनार्थियों के बीच यह बहुत लोकप्रिय रहा है। लेकिन इस बार कथा वाचन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इसके अलावा एक ही जगह पर दर्शनार्थियों की संख्या बहुत ज्यादा न होने पाये, इसके लिए भी अभी से प्रयास किए जा रहे हैं।