दिल्ली में कोरोना की स्थिति नियंत्रित, अब मेट्रो चलाने की अनुमति मिले: केजरीवाल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इन दिनों राहत में हैं। उनकी राहत का सबब दिल्ली में कोरोना की स्थिति में नियंत्रण है। केजरीवाल ने दिल्ली में कोरोना और शहर के विकास से जुड़े कई मु्द्दों पर अमर उजाला से लंबी बात की। पेश हैं उसी बातचीत के कुछ अंश...
अनलॉक-3 में बहुत सी चीजें खोल दी हैं, लेकिन मेट्रो अभी बंद है?
मेरे ख्याल में मेट्रो चालू कर देनी चाहिए। दिल्ली में कोरोना की स्थिति काफी नियंत्रित है। अब मेट्रो भी खोल देनी चाहिए। केंद्र सरकार की क्या सोच है, मुझे नहीं पता। जब तक वह इजाजत नहीं देगी, तब तक हम खोल नहीं सकते। मैं चाहता हूं कि मेट्रो चलनी चाहिए। इससे हालात सामान्य होने में मदद मिलेगी।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: विशेष बातचीत में केजरीवाल का एलानः वैश्विक बाजार से जुड़ेंगे दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्र
विज्ञापन
विज्ञापन
दूसरी कई चीजों में तो दिल्ली ने ढील दी है।
हां, रेहड़ी पटरी वालों को काम पर लौटने की इजाजत दे दी है। समय की बाध्यता भी नहीं है। साप्ताहिक बाजारों को खोलना चाहते हैं। एक सप्ताह में समीक्षा के बाद इसके बारे में अंतिम फैसला लिया जाएगा। रात का कर्फ्यू भी हटा लिया गया है। ज्यादातर चीजों में दिल्ली में पहले से ढील दे रखी है। हमारी कोशिश है कि लोगों की जिंदगी पटरी पर आए।
दिल्ली की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए आपने जॉब पोर्टल लांच किया है। इसका आइडिया कहां से आया?
इस पर आने से पहले आपको बताता हूं कि कोरोना एप का आइडिया कहां से आया। उन दिनों में, जब हमारी खूब आलोचना हो रही थी, कई सारे लागे सोशल मीडिया पर मैसेज डालते थे कि उनको बेड नहीं मिल रहे हैं। एक दिन रात में 11 बजे मैं सोने जा रहा था, तभी मोबाइल पर देखा कि सोशल मीडिया पर किसी का वीडियो चल रहा था कि मेरे पिताजी की हालत बहुत गंभीर हो गई है। निजी अस्पताल लेकर गया। उन्होंने दो दिन रखा। उसके बाद कोरोना टेस्ट हुआ। वह पॉजिटिव आ गया। तो अस्पताल ने उनको बाहर कर दिया और कहा कि कोरोना अस्पताल ले जाइए, हमारा अस्पताल कोरोना अस्पताल नहीं है। इसे देखकर हमें लगा कि मुख्यमंत्री के तौर पर रोज मीडिया के जरिए जानकारी देता हूं, लेकिन सूचनाएं लोगों तक नहीं पहुंच रही हैं। तो उसका मोबाइल नंबर लेकर रात में 11 बजे फोन किया और बेड का इंतजाम करवाया। लेकिन मेरे पास कितने लोग पहुंच पाएंगे। अब बेड उपलब्ध हैं, लेकिन मरीज को पता नहीं कि मैं कहां जाऊं। यह कमी दूर करने के लिए हमने पोर्टल बनाया।
यह भी पढ़ें: केजरीवाल ने कहा, देश की सामर्थ्यवान जनता ही राजनीतिक विकल्प देगी
महत्वाकांक्षी (सस्ती बिजली, फ्री पानी पर सब्सिडी जैसी) योजनाओं पर खर्च जारी रखना है। बिना राजस्व बढ़े अगर स्वास्थ्य क्षेत्र पर बजट बढ़ाना पड़ा तो कैसे करेंगे?
सरकार का बजट चिंता का विषय है, लेकिन यह चिंता हमारी उतनी है, जितनी आज एक आम आदमी की चिंता है। आम आदमी के घर में भी पैसा नहीं आ रहा है। अगर आम आदमी के घर में पैसा आएगा तो वह कुछ पैसे सरकार को भी देगा। तो हमारी इस समय सबसे बड़ी चिंता आम आदमी ज्यादा है। कि उसकी जेब में कैसे पैसा पहुंचे। बाजार खुलें। ग्राहक वहां जाएं। सारी चीजें ठीक होंगी, एक चीज से। वह है कि लोगों के जेहन से कोरोना का डर खत्म होना। जिस दिन कोरोना का डर नहीं रहेगा, लोग अपनी सहज जिंदगी जीने लगेंगे।
आपने डीजल पर वैट कम किया। इससे भी सरकारी राजस्व पर नकारात्मक असर पड़ेगा?
मुझे लगता है कि वैट कम करने से अर्थव्यस्था बढ़ेगी। इससे महंगाई से राहत मिलेगी। जब जनता फलेगी, फूलेगी तभी सरकार की भी आमदनी बढ़ेगी। सरकार चलती आम लोगों के लिए ही है। आम आदमी का ख्याल रखना हमारा सबसे बड़ा मसकद है। लोग खुश होंगे तो सरकार का राजस्व अपने आप आ जाएगा।
यह भी पढ़ें: विशेष बातचीतः केजरीवाल ने कहा, दिल्लीवालों के जेहन से निकल रहा है कोरोना महामारी का डर