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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Controversy on social media between Deputy Chief Minister and Union Minister

‘हां या ना’ के लिए उपमुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के बीच सोशल मीडिया पर तकरार

Wed, 01 Jan 2020 05:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 01 Jan 2020 05:28 AM IST
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Controversy on social media between Deputy Chief Minister and Union Minister
पुरी और सिसोदिया... - फोटो : Social Media

अनधिकृत कॉलोनियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के होर्डिंग लगने के बाद शुरू हुआ सियासी संग्राम अब सीधे तौर पर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और केंद्रीय शहरी एवं विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बीच देखने को मिल रहा है। 

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दोनों ही नेताओं के बीच सोशल मीडिया पर एक दूसरे को टैग करते हुए बहस जारी है। मंगलवार को इस सोशल वार में दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी भी कूद पड़े तो आप के कई कई बड़े नेताओं ने भी मोर्चा संभाला। 
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सिसोदिया बार- बार ट्विटर पर अपनी पोस्ट में लिख रहे हैं हरदीप पुरी सर, दो शब्द में बता दीजिए, अवैध कॉलोनियां नियमित होंगी, हां या नहीं? इस पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पहले आप बताओ, लेआउट प्लान के लिए फायर एनओसी में कितने साल लगेंगे? 
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बहरहाल भाजपा और आप के नेताओं के बीच इस बयानबाजी को लेकर सोशल मीडिया पर अन्य लोग भी आगे आए और किसी ने दिल्ली तो किसी ने केंद्र पर निशाना साधा। 

दरअसल बीते रविवार को सोशल मीडिया पर दिल्ली की कुछ अनधिकृत कॉलोनियों में लगे पीएम मोदी के होर्डिंग वायरल हुए। इस पर सोमवार को हुई प्रेस कान्फ्रेंस में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि दिल्ली विकास प्राधिकरण की वेबसाइट ही कह रही है कि कॉलोनी या घर नियमित नहीं होंगे। सीएम के इसी बयान के बाद से भाजपा, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं तक की टिप्पणियां सामने आने लगीं। 

सोमवार रात 8.15 बजे शुरू हुई बहस
सोमवार रात 8 बजकर 15 मिनट पर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट किया, अभी तक हरदीप पुरी सर का जवाब नहीं आया। सर! आप सरकारी दस्तावेज में अपनी वेबसाइट पर कह रहे हैं कि  अवैध कॉलोनियां या उनकी संपत्तियों का नियमितीकरण नहीं है। यह बात सच है या झूठ...कॉलोनियां नियमित होंगी या नहीं? हां या ना? बस इतना बता दीजिए। 

करीब एक घंटे बाद रात 9 बजकर 22 मिनट पर केंद्रीय मंत्री ने पोस्ट किया, यह काम हो चुका है। आप बस शब्दों के जाल में उलझे हुए हैं। अगर आपने 5 साल खराब नहीं किए होते तो ये बहुत पहले हो गया होता। वैसे लेआउट प्लान के लिए फायर एनओसी जरूरी है। उसे देने में आपको कितने साल लगेंगे? नक्शे तो आप से 5 साल में भी नहीं बन पाए। सीधा जवाब दीजिएगा?

सुबह फिर दागा सवाल, लंबा-चौड़ा जवाब लिखा
मंगलवार सुबह 9 बजकर 40 मिनट पर मनीष सिसोदिया ने लिखा, अब आप कह रहे हैं कि अवैध कॉलोनियां नियमित नहीं की जा रही हैं। यानी आप कह रहे हैं कि अनाधिकृत कॉलोनियां नियमित करने की आपकी घोषणा और भाजपा का पूरा प्रचार एक जुमला ही था? इस पर केंद्रीय मंत्री ने एक या दो नहीं बल्कि तीन पोस्ट एक साथ किए। 

उन्होंने लिखा, साफ दिख रहा है कि माननीय उपमुख्यमंत्री अनुभव की कमी के कारण कुछ चीजें समझ नहीं पा रहे हैं और उन्हीं एक दो शब्दों के जाल में उलझे पड़े हैं। उन्होंने सुन रखे हैं। डीडीए की जिस वेबसाइट की वो बार बार रट लगा रहे हैं उसमें भी उनको समझाने के लिए चीजें सरल करा दी हैं। 

वैसे सिसोदिया और केजरीवाल यह बताएं कि अगर 1731 कॉलोनियों के लोगों को उनके घर का मालिकाना हक मिल रहा है और उनके घरों की रजिस्ट्री हो रही है तो उन्हें तकलीफ क्या है? शायद यह कि वे अब इस मामले में कोई नया रोड़ा नहीं अटका पाएंगे?


सिसोदिया ने लिखा, इतने लंबे जवाब के लिए धन्यवाद हरदीप पुरी सर। मैं तो दो शब्दों में जानना चाह रहा हूं कि आपकी यह उदय योजना अनाधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण है या नहीं? हां या न? इसका जवाब अब भी आप नहीं दे रहे हैं। मंगलवार शाम तक दोनों नेताओं के बीच बहस का ये क्रम लगातार जारी रहा।  

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