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Delhi NCR News: सड़कों का ठेका लेकर दूसरे को काम नहीं सौंप सकेंगे ठेकेदार
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658 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं को मंजूरी, ठेकेदार की क्षमता की होगी जांच, निगरानी समिति और जियो-टैगिंग अनिवार्य
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने सड़कों की गुणवत्ता सुधारने और निर्माण कार्यों में जवाबदेही तय करने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ठेका व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। अब पीडब्ल्यूडी की सड़कों के बड़े प्रोजेक्ट लेने वाले ठेकेदार निर्माण कार्य किसी दूसरे ठेकेदार या एजेंसी को नहीं सौंप सकेंगे। वित्त विभाग की व्यय वित्त समिति (ईएफसी) ने 658.01 करोड़ रुपये की लागत से पूर्व, उत्तर और दक्षिण जोन की कुल 270.63 किलोमीटर सड़कों को मजबूत करने के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए यह निर्देश दिया है।
समिति ने कहा है कि निविदा की शर्तों में ऐसे स्पष्ट प्रावधान किए जाएं, जिससे ठेके पर काम लेकर दूसरे ठेकेदार को देने पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। इसके साथ ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई नई शर्तें भी लागू की जाएंगी। पीडब्ल्यूडी ने ईएफसी के समक्ष बताया कि पहले सड़कवार छोटे-छोटे टेंडर जारी करने की व्यवस्था के दौरान संचालन और अनुबंध से जुड़ी कई समस्याएं सामने आई थीं। इससे निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित हुई, परियोजनाओं में देरी हुई और सड़क रखरखाव भी प्रभावित हुआ। इन अनुभवों को देखते हुए अब कई सड़कों को एक साथ जोड़कर बड़े जोन के आधार पर टेंडर जारी किए जाएंगे।
समिति ने पीडब्ल्यूडी को निर्देश दिया है कि टेंडर प्रक्रिया में केवल उन्हीं एजेंसियों को शामिल किया जाए, जिनकी वित्तीय क्षमता और तकनीकी अनुभव पर्याप्त हो। ठेका देने से पहले ठेकेदार की बिड कैपेसिटी का अनिवार्य परीक्षण किया जाएगा, ताकि बड़े प्रोजेक्ट ऐसे ठेकेदारों को न मिलें जो तय समय और गुणवत्ता के अनुरूप काम पूरा करने में सक्षम न हों। साथ ही, टेंडर प्रक्रिया में अधिकतम प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए सीपीडब्ल्यूडी मैनुअल और केंद्रीय सतर्कता आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा।
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हर परियोजना के लिए गठित होगी निगरानी समिति
हर परियोजना की निगरानी के लिए प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग कमेटी गठित की जाएगी, जो निर्माण कार्य की नियमित समीक्षा करेगी। ठेका शर्तों में देरी या घटिया निर्माण पर कड़ी पेनाल्टी का प्रावधान भी किया जाएगा। इसके अलावा सड़क निर्माण शुरू होने से पहले और कार्य पूरा होने के बाद की जियो-टैग तस्वीरें दिल्ली सरकार के पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इससे निर्माण कार्य का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और गुणवत्ता की ऑनलाइन निगरानी भी प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने सड़कों की गुणवत्ता सुधारने और निर्माण कार्यों में जवाबदेही तय करने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ठेका व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। अब पीडब्ल्यूडी की सड़कों के बड़े प्रोजेक्ट लेने वाले ठेकेदार निर्माण कार्य किसी दूसरे ठेकेदार या एजेंसी को नहीं सौंप सकेंगे। वित्त विभाग की व्यय वित्त समिति (ईएफसी) ने 658.01 करोड़ रुपये की लागत से पूर्व, उत्तर और दक्षिण जोन की कुल 270.63 किलोमीटर सड़कों को मजबूत करने के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए यह निर्देश दिया है।
समिति ने कहा है कि निविदा की शर्तों में ऐसे स्पष्ट प्रावधान किए जाएं, जिससे ठेके पर काम लेकर दूसरे ठेकेदार को देने पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। इसके साथ ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई नई शर्तें भी लागू की जाएंगी। पीडब्ल्यूडी ने ईएफसी के समक्ष बताया कि पहले सड़कवार छोटे-छोटे टेंडर जारी करने की व्यवस्था के दौरान संचालन और अनुबंध से जुड़ी कई समस्याएं सामने आई थीं। इससे निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित हुई, परियोजनाओं में देरी हुई और सड़क रखरखाव भी प्रभावित हुआ। इन अनुभवों को देखते हुए अब कई सड़कों को एक साथ जोड़कर बड़े जोन के आधार पर टेंडर जारी किए जाएंगे।
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समिति ने पीडब्ल्यूडी को निर्देश दिया है कि टेंडर प्रक्रिया में केवल उन्हीं एजेंसियों को शामिल किया जाए, जिनकी वित्तीय क्षमता और तकनीकी अनुभव पर्याप्त हो। ठेका देने से पहले ठेकेदार की बिड कैपेसिटी का अनिवार्य परीक्षण किया जाएगा, ताकि बड़े प्रोजेक्ट ऐसे ठेकेदारों को न मिलें जो तय समय और गुणवत्ता के अनुरूप काम पूरा करने में सक्षम न हों। साथ ही, टेंडर प्रक्रिया में अधिकतम प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए सीपीडब्ल्यूडी मैनुअल और केंद्रीय सतर्कता आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा।
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हर परियोजना के लिए गठित होगी निगरानी समिति
हर परियोजना की निगरानी के लिए प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग कमेटी गठित की जाएगी, जो निर्माण कार्य की नियमित समीक्षा करेगी। ठेका शर्तों में देरी या घटिया निर्माण पर कड़ी पेनाल्टी का प्रावधान भी किया जाएगा। इसके अलावा सड़क निर्माण शुरू होने से पहले और कार्य पूरा होने के बाद की जियो-टैग तस्वीरें दिल्ली सरकार के पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इससे निर्माण कार्य का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और गुणवत्ता की ऑनलाइन निगरानी भी प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।