यूपी: जनवरी में शुरू होगा प्रदेश के सबसे बड़े डाटा सेंटर का निर्माण, 1000 लोगों को मिलेगा रोजगार
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रेटर नोएडा नॉलेज पार्क-5 में बनने वाले प्रदेश के सबसे बडे़ योट्टा डाटा सेंटर पार्क का ऑनलाइन शिलान्यास किया। इसका निर्माण मुंबई का हीरा नंदानी समूह करेगा। इसमें करीब छह हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा और एक हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।
यहां फेसबुक, इंस्टाग्राम, यू-ट्यूब आदि के साथ आधार कार्ड, स्वास्थ्य, बैंकिंग, व्यापार, पर्यटन से जुड़ा डाटा भी सुरक्षित रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने रविवार को शिलान्यास के मौके पर कहा कि भारत सरकार की इज आफ डूइंग बिजनेस योजना के अंतर्गत वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश का देश में 12वां स्थान था। वर्तमान में प्रदेश दूसरे स्थान पर है।
बहुत शीघ्र ही इस श्रेणी में प्रदेश प्रथम स्थान पर होगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में विभिन्न 22 औद्योगिक सेक्टरों की विशेष नीतियां बनाई गई हैं। प्रदेश में औद्योगिक सेक्टरों को आवंटन के लिए 25000 एकड़ भूमि उपलब्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि फरवरी 2020 में आयोजित डिफेंस एक्सपो से वर्तमान तक प्रदेश में 50 हजार करोड़ का निवेश विभिन्न देशों जैसे कनाडा, यूएस, यूके, जापान, कोरिया आदि से प्राप्त हुआ है। ब्रिटानिया ग्रुप प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में 300 करोड़ का निवेश करेगा।
उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि प्रदेश में डाटा सेंटर नीति बनाए जाने का कार्य गतिमान है, इसे शीघ्र ही पूर्ण कर लागू किया जाएगा। मौके पर मुख्य सचिव आरके तिवारी, प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास आलोक कुमार, आयुक्त औद्योगिक विकास एवं अध्यक्ष नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना प्राधिकरण आलोक टंडन, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण, हीरा नंदानी समूह की ओर से डॉ. निरंजन हीरानंदानी, दर्शन हीरानंदानी, योट्टा डाटा सेंटर पार्क ग्रेटर नोएडा प्रोजेक्ट के सीईओ सुनील गुप्ता आदि मौजूद रहे।
15 दिनों में जमीन आवंटित
औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने कहा कि मुंबई के हीरानंदानी समूह को ग्रेटर नोएडा में देश का पहला डाटा सेंटर बनाने के लिए 15 दिनों के अंदर जमीन आवंटित की गई है। निर्माण जनवरी 2021 में शुरू होगा। परियोजना में छह टॉवर बनाए जाएंगे।
प्रथम टॉवर जून 2022 तक पूर्ण हो जाएगा। परियोजना पांच वर्ष में पूरी हो जाएगी। अब तक प्रदेश सहित कई हिस्सों में पर्याप्त सेंटर नहीं होने के कारण डाटा विदेशों में संरक्षित किया जाता है, जो काफी महंगा पड़ता है। इस सेंटर में डाटा भंडारण, प्रोसेसिंग आदि गतिविधियां की जाएंगी।
उक्त अवसर पर हीरानंदानी समूह के डॉ. निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि इससे प्रदेश में औद्योगिक निवेश के बेहतर विकल्प उपलब्ध होंगे। भारत में डाटा सेंटरों की क्षमता 400 मेगावाट है। इसमें 250 मेगावाट की क्षमता योट्टा डाटा सेंटर से पूरी की जाएगी।