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Delhi NCR News: रूप, रंग, स्मृति और पहचान का संवाद करती प्रदर्शनी कनेक्शन्स
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छह कलाकारों के कृतियों के अदृश्य कनेक्शन को दिखाती प्रदर्शनी ‘कनेक्शन्स’
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के एनेक्सी गैलरी में लगी प्रदर्शनी ‘कनेक्शन्स’ को देखते हुए सबसे पहले जो बात महसूस होती है, वह है अलग-अलग कला-भाषाओं के बीच मौजूद एक अदृश्य रिश्ता। गैलरी श्री आर्ट्स की ओर से आयोजित इस प्रदर्शनी में छह कलाकारों की कृतियां हैं। इनमें कंचन चंदर, कविता नैयर, नंदा दुलाल मुखर्जी, साबिया, सुखविंदर सिंह और सिद्धांत मेधी शामिल हैं। ये कृतियां चित्रकला, प्रिंटमेकिंग, स्मृति, पहचान और अनुभवों के अलग-अलग रंगों को सामने लाती हैं। 18 अगस्त को उद्घाटित यह प्रदर्शनी 28 अगस्त तक दर्शकों के लिए खुली है। इसे जितेंद्र पदम जैन ने क्यूरेट किया है, जबकि इसकी संकल्पना अंकुश बी शर्मा की है।
गैलरी में घूमते हुए अलग-अलग कलाकारों की तकनीक और अभिव्यक्ति में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। कहीं प्रिंटमेकिंग की ग्राफिक गहराई और दोहराव है, तो कहीं चित्रकला के जरिए भावनाओं और अनुभवों को तत्काल अभिव्यक्ति मिलती है। क्यूरेटर जितेंद्र पदम जैन के अनुसार, कलाकारों की प्रशिक्षण पद्धति और रचनात्मक यात्राएं भले अलग हों, लेकिन प्रेरणा, जिज्ञासा और अभिव्यक्ति उन्हें एक-दूसरे से जोड़ती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के एनेक्सी गैलरी में लगी प्रदर्शनी ‘कनेक्शन्स’ को देखते हुए सबसे पहले जो बात महसूस होती है, वह है अलग-अलग कला-भाषाओं के बीच मौजूद एक अदृश्य रिश्ता। गैलरी श्री आर्ट्स की ओर से आयोजित इस प्रदर्शनी में छह कलाकारों की कृतियां हैं। इनमें कंचन चंदर, कविता नैयर, नंदा दुलाल मुखर्जी, साबिया, सुखविंदर सिंह और सिद्धांत मेधी शामिल हैं। ये कृतियां चित्रकला, प्रिंटमेकिंग, स्मृति, पहचान और अनुभवों के अलग-अलग रंगों को सामने लाती हैं। 18 अगस्त को उद्घाटित यह प्रदर्शनी 28 अगस्त तक दर्शकों के लिए खुली है। इसे जितेंद्र पदम जैन ने क्यूरेट किया है, जबकि इसकी संकल्पना अंकुश बी शर्मा की है।
गैलरी में घूमते हुए अलग-अलग कलाकारों की तकनीक और अभिव्यक्ति में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। कहीं प्रिंटमेकिंग की ग्राफिक गहराई और दोहराव है, तो कहीं चित्रकला के जरिए भावनाओं और अनुभवों को तत्काल अभिव्यक्ति मिलती है। क्यूरेटर जितेंद्र पदम जैन के अनुसार, कलाकारों की प्रशिक्षण पद्धति और रचनात्मक यात्राएं भले अलग हों, लेकिन प्रेरणा, जिज्ञासा और अभिव्यक्ति उन्हें एक-दूसरे से जोड़ती है।
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