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केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में क्यों नहीं रखी गरीबों के 'राइट टू सिटी' अधिकार की बातः अजय माकन
Mon, 14 Sep 2020 08:37 PM IST
Harendra Chaudhary
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Mon, 14 Sep 2020 08:37 PM IST
सार
दिल्ली में रेलवे पटरियों के किनारे बसी 48 हजार अवैध झुग्गियों को हटाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र ने कहा है कि झुग्गीवासियों को विकल्प देने के पहले इन्हें तोड़ा नहीं जाएगा...
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Jhuggis near Railway Track
- फोटो : PTI
विस्तार
पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन ने सोमवार को कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने मार्च 2019 में गरीबों को 'राइट टू सिटी' का अधिकार दिया था। 'अजय माकन बनाम बनाम यूनियन ऑफ इंडिया' मामले में सुनवाई करते समय कोर्ट ने कहा था कि गरीब लोगों को शहर में अधिकार है। किसी भी झुग्गी को हटाने के पहले वहां रह रहे लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था होनी चाहिए।
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माकन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में 48 हजार झुग्गियों को हटाने के मामले पर हो रही सुनवाई के दौरान केंद्र या दिल्ली सरकार ने यह बात कोर्ट के सामने नहीं रखी। इससे दोनों सरकारों का जनता के प्रति लापरवाही साफ नजर आती है क्योंकि अगर यह आदेश लागू होता तो इससे तीन लाख लोगों के रहने की जगह छिन जाती।
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दिल्ली में रेलवे पटरियों के किनारे बसी 48 हजार अवैध झुग्गियों को हटाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र ने कहा है कि झुग्गीवासियों को विकल्प देने के पहले इन्हें तोड़ा नहीं जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के बदले रुख पर टिप्पणी करते हुए अजय माकन ने कहा कि 31 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने तीन महीने के भीतर इन 48 हजार झुग्गियों को हटाने का आदेश दिया था।
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अगर स्वयं सुुप्रीम कोर्ट इस मामले पर रोक नहीं लगाता तो इन्हें बचाना नामुमकिन होता। उन्होंने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और रेलवे, किसी ने सुप्रीम कोर्ट को इस फैसले से अवगत नहीं कराया, जिसमें गरीबों को शहर में रहने का अधिकार दिया गया था। ऐसी झुग्गियों को तोड़ने के पहले कट ऑफ डेट से पहले से रह रहे लोगों को वैकल्पिक निवास स्थान देना अनिवार्य है।
अजय माकन ने कहा कि वर्ष 2015 में इसी तरह के एक अवैध निर्माण तोड़ने के दौरान एक बच्चे की मौत हो गई थी। इसके बाद राहुल गांधी ने इस मामले के समाधान के लिए कोर्ट का रुख करने का सुझाव दिया था। इसी के बाद उन्होंने हाईकोर्ट में यह मामला उठाया था जिसमें कोर्ट ने गरीबो के हक में एतिहासिक फैसला सुनाया था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि इसी योजना को ध्यान में रखते हुए मनमोहन सिंह सरकार ने फंड निर्धारित कर राजधानी में गरीबों के लिए फ्लैट का निर्माण कराया था। इसके तहत फ्लैट बनकर तैयार हैं और लगभग 17 हजार अतिरिक्त फ्लैट बनाया जाना है, जिसके लिए भी धन आवंटित किया जा चुका है। लेकिन केंद्र-दिल्ली सरकार की लापरवाही के कारण अब तक यह आवास गरीबों को नहीं दिया जा सका है।