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Delhi NCR News: कपिल मिश्रा के खिलाफ 2020 दिल्ली दंगों से जुड़ी शिकायत खारिज
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
राउज एवेन्यू स्थित अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने भाजपा नेता और मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित मामले में दायर शिकायत को खारिज कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने 29 अप्रैल को सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता बिना किसी उचित कारण के लगातार अनुपस्थित रहा, जिससे स्पष्ट है कि वह जानबूझकर मुकदमे की कार्यवाही में देरी कर रहा था।
अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता की बार-बार गैर-हाजिरी और मामले में कोई दिलचस्पी न दिखाने के आधार पर शिकायत को ‘गैर-अभियोजन’ के आधार पर खारिज करना उचित है। यह शिकायत मोहम्मद इलियास नामक व्यक्ति द्वारा दायर की गई थी। इससे पहले अदालत शिकायतकर्ता की प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग भी खारिज कर चुकी थी और उसे अपना बयान दर्ज कराने के लिए निर्देश दिया था। हालांकि, शिकायतकर्ता 27 मार्च, 8 अप्रैल, 17 अप्रैल और 29 अप्रैल को हुई सुनवाइयों में लगातार पेश नहीं हुआ। सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायतकर्ता के वकील के रवैये पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि वकील द्वारा बार-बार विरोधाभासी बयान दिए गए, जिससे लगता है कि मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। अदालत ने यह भी माना कि लगातार तीन सुनवाइयों में गैर-हाजिरी से साफ होता है कि शिकायतकर्ता को मामले को आगे बढ़ाने में कोई रुचि नहीं है।
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नई दिल्ली।
राउज एवेन्यू स्थित अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने भाजपा नेता और मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित मामले में दायर शिकायत को खारिज कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने 29 अप्रैल को सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता बिना किसी उचित कारण के लगातार अनुपस्थित रहा, जिससे स्पष्ट है कि वह जानबूझकर मुकदमे की कार्यवाही में देरी कर रहा था।
अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता की बार-बार गैर-हाजिरी और मामले में कोई दिलचस्पी न दिखाने के आधार पर शिकायत को ‘गैर-अभियोजन’ के आधार पर खारिज करना उचित है। यह शिकायत मोहम्मद इलियास नामक व्यक्ति द्वारा दायर की गई थी। इससे पहले अदालत शिकायतकर्ता की प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग भी खारिज कर चुकी थी और उसे अपना बयान दर्ज कराने के लिए निर्देश दिया था। हालांकि, शिकायतकर्ता 27 मार्च, 8 अप्रैल, 17 अप्रैल और 29 अप्रैल को हुई सुनवाइयों में लगातार पेश नहीं हुआ। सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायतकर्ता के वकील के रवैये पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि वकील द्वारा बार-बार विरोधाभासी बयान दिए गए, जिससे लगता है कि मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। अदालत ने यह भी माना कि लगातार तीन सुनवाइयों में गैर-हाजिरी से साफ होता है कि शिकायतकर्ता को मामले को आगे बढ़ाने में कोई रुचि नहीं है।
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