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अब प्रीमियम बस सेवा पर छिड़ी जंग, एसीबी ने शुरू की भ्रष्टाचार की जांच

Thu, 02 Jun 2016 12:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 02 Jun 2016 12:59 AM IST
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Complaining of corruption in the premium bus service, began investigating ACB

ऐप आधारित प्रीमियम बस सर्विस के मामले में भाजपा नेता विजेंद्र गुप्ता की शिकायत पर भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने जांच शुरू कर दी है। योजना के संबंध में जारी की गई अधिसूचना में उपराज्यपाल की सहमति प्रदान करने के मामले को भी जांच के दायरे में लिया गया है।

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क्योंकि शिकायत में यह बात कही गई है कि उपराज्यपाल के कार्यालय ने इस तरह की स्वीकृति देने से मना किया है। 

विजेंद्र गुप्ता ने बुधवार को विधायक ओमप्रकाश शर्मा और जगदीश प्रधान के साथ संवाददाता सम्मेलन में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के समक्ष की गई शिकायत के बारे में जानकारी दी। 

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विजेंद्र गुप्ता ने एसीबी में की थी शिकायत

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विजेंद्र गुप्ता

उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार ने राजकोष को व्यापक घाटा पहुंचाकर गुड़गांव स्थित एग्रीगेटर प्लेटफार्म शटल को भारी वित्तीय लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से निर्धारित प्रक्रिया को ताक पर रखकर अधिसूचना जारी की। इस मामले में सरकार के बड़े मंत्रियों व उच्चाधिकारियों की कंपनी विशेष के साथ सांठगांठ है। 

उन्होंने बताया कि गत 20 मई को परिवहन विभाग के सचिव ने ऐप आधारित प्रीमियम बस सर्विस के संबंध में अधिसूचना जारी की थी, जिसमें उन्होंने जानकारी दी कि प्रीमियम बस सर्विस को उपराज्यपाल ने सहमति प्रदान कर दी है। 

तुरंत बाद उपराज्यपाल कार्यालय ने स्पष्ट किया कि उपराज्यपाल ने इस आशय की कोई स्वीकृति प्रदान नहीं की है। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि अधिसूचना में उपराज्यपाल की स्वीकृति प्रदान होने का दावा करना अनधिकृत कृत्य है। 

उपराज्यपाल की स्वीकृति के बिना स्वीकृत दर्शाने का आरोप

Complaining of corruption in the premium bus service, began investigating ACB
दिल्ली बस सेवा - फोटो : फाइल फोटो

सरकार ने उपराज्यपाल के साथ गंभीर विश्वास भंग किया है। यह जांच का विषय है कि आम आदमी पार्टी की सरकार किस प्रकार उपराज्यपाल के नाम का इस सीमा तक दुरुपयोग कर सकती है। 

उन्होंने आरोप लगाया कि अधिसूचना में मोटर व्हीकल एक्ट 1988 का भी उल्लंघन किया गया। इसके अनुच्छेद 66एन में असाधारण परिस्थितियों में इस प्रकार की स्वीकृति प्रदान करने का प्रावधान है।

एसीबी प्रमुख मुकेश मीणा के मुताबिक ऐप बेस्ड प्रीमियम सेवा के संबंध में जांच के आदेश दिए गए हैं। इसमें आरोप है कि उपराज्यपाल की स्वीकृति के बिना भी स्वीकृति मिलना दर्शाया गया है। एक निजी कंपनी को इससे लाभ देने की कोशिश का भी आरोप है।

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