त्रिलोकपुरी में कर्फ्यू जैसे हालात, जानिए 5 वजहें
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राजधानी दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में भड़की हिंसा के बाद पांचवें दिन कर्फ्यू जैसे हालात बन गए हैं। पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
दिवाली पर जब पूरे देश में जश्न मनाया जा रहा था और पटाखे छोड़े जा रहे थे तब राजधानी के इस इलाके में पथराव हो रहा था और शराब की बोतलें फेंकी जा रही थीं। देखते ही देखते मामला सांप्रदायिक हिंसा में तब्दील हो गया।
दिल्ली में भड़की इस हिंसा का साइड इफेक्ट यह हुआ कि आम लोगों का जीवन तबाह हो गया। खाने-पीने की चीजों के दाम दो से तीन गुना बढ़ गए तो वहीं, घर से बाहर निकलना भी दूभर हो गया।
देर रात पुलिस पर किया पथराव
सोमवार को प्रशासन ने किसी के भी घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी है। इससे कर्फ्यू लगने का भी अंदेशा जताया जा रहा था हालांकि बाद में दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने इससे इंकार कर दिया।
दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर ने बताया कि हिंसा में शामिल लोगों की धरपकड़ जारी है इस वजह से आम लोगों के बाहर निकलने पर रोक लगाई गई है।
लोगों के घर से बाहर निकलने पर ज्यादा समस्या हो सकती है और हिंसा भड़कने की भी संभावना बढ़ जाती है, इसलिए ऐसा किया गया है। बता दें कि रविवार रात को गश्त के दौरान पुलिस टीम पर कुछ लोगों ने पथराव किया था।
एक महीने पहले से सुलग रही थी चिंगारी
त्रिलोकपुरी और उसके आसपास के इलाके में भड़की हिंसा की असली वजह क्या है यह किसी को नहीं पता। अफवाहों के चलते बिगड़ता गया। हालांकि यह कहा जा रहा है कि शनिवार को भड़की हिंसा की चिंगारी करीब एक महीने पहले से ही सुलग रही थी।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, नवरात्रि के मौके पर कचरा डालने वाले स्थान को साफ करके वहां पूजा स्थल बना दिया गया था। एक युवक ने बताया कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत इस जगह की सफाई हुई थी और रात्रि जागरण के लिए यहां पंडाल बनाया गया था।
इस काम का दूसरे समुदाय के लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि पूजा स्थल बनाकर उन्हें वहां पर कूड़ा फेंकने से रोका जा रहा है। हालांकि इस बारे में कई बार मामूली बातचीत ही हुई लेकिन भी किसी तरह से भी विवाद नहीं बढ़ने दिया गया। हालांकि 10 दिन बाद जब पंडाल नहीं हटाया गया तो एक बार फिर दोनों पक्ष भिड़ गए।
नहीं मिल रहा राशन, तीन गुना हुआ दाम
इलाके में कुछ दुकानों को छोड़कर अब तक सारी दुकाने बंद हैं। इन दुकानों में हर सामान की कीमत दो से तीन गुना बढ़ा दी गई है। आलू 80 रुपए किलो मिल रहा है तो प्याज 120 रुपए किलो। पांच रुपए में बिकने वाले कुरकुरे स्नैक्स भी अब 15 रुपए में मिल रहे हैं।
आमतौर पर 38 रुपए में मिलने वाला दूध का पैकेट 70 रुपए में मिल रहा है जबकि पीने के पानी की कीमत 60 रुपए प्रति बोतल हो गई है।
हिंसा की आग ने महंगाई को भी हवा दे दी और बच्चों को दूध कि जगह पानी पिलाया जा रहा है।
घर छोड़कर भागने लगे लोग
हिंसा की घटनाओं से डरे बहुत से लोगों ने घर छोड़ना शुरू कर दिया है। बहुत से लोगों ने दूसरे शहरों में अपने रिश्तेदारों और परिचितों के घर शरण लेना शुरू कर दिया है।
ब्लॉक 27 में रहने वाली एक महिला ने बताया कि इस हिंसा में उनकी दुकान जला दी गई है। घटना के वक्त पूरा परिवार एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए बाहर गए हुए थे। पड़ोसियों ने उन्हें फोन करके उन्हें इसकी सूचना दी।
महिला के पिता ने बताया कि वह मयूर विहार थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराने के लिए गए लेकिन पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी और अगले दिन आने की बात कहकर टरका दिया।
सड़कें साफ करने निकले लोग
मयूर विहार थाने पर पुलिस बल के अलावा इलाके के लोगों का जमावड़ा लगा रहा। थाने पहुंचने वाले ऐसे लोग थे, जिनके अपनों को पुलिस ने दंगा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
ऐसे ज्यादातर लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने घरों से जबरन उनके परिवार के सदस्यों को हिरासत में लिया है। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे लोग घरों की छतों से पुलिस व दूसरे समुदाय के लोगों पर पथराव कर रहे थे, साथ ही उन पर गोलीबारी भी कर रहे थे।
रविवार को कोई अप्रिय घटना के नहीं होने के बाद दोपहर में लोग घरों से बाहर निकले और सड़कों की सफाई में जुट गए। सफाई काम में जुटे लोगों ने कहना है कि सड़कों पर फैले ईट और शीशे के टुकड़े उन्हें उस खौफनाक मंजर की याद दिला रही है। इसलिए वह चाहते हैं कि जल्द से जल्द इनकी सर्फाई कर फिर से सौहार्दपूर्ण वातावरण तैयार करें।