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सीएम साहब जवानी से बुढ़ापा आ गया, कहां हैं अच्छे दिन ?

Thu, 07 May 2015 07:24 PM IST
Updated Thu, 07 May 2015 07:24 PM IST
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CM sir where are the good days?
सीएम साहब, पिछले बीस साल से रोहतक, चंडीगढ़, गुड़गांव व फरीदाबाद के पंचायत विभाग के अधिकारियों की हाजिरी लगाते हुए जवानी से बुढ़ापा आ गया लेकिन किसी ने मेरी जमीन का रकबा पूरा नहीं किया।
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धक्के खाते-खाते अब मैं शारीरिक, मानसिक व आर्थिक रूप से बिल्कुल टूट चुका हूं। कृपया मुझे न्याय दिलाने का कष्ट करें...। ये दर्द भरा पत्र है बल्लभगढ़ के जवां गांव निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक किशन सिंह का, जो उन्होंने सीएम विंडो के जरिए मुख्यमंत्री को भेजा है।
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किशन सिंह ने कहा कि पूर्वजों के समय वर्ष 1954 में गांव की चकबंदी हुई थी। उस दौरान पंचायत विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही से उनकी जमीन का रकबा कम हो गया।
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क्या हमारे अच्छे दिन आएंगे ?

CM sir where are the good days?

पूर्वज अशिक्षित थे। उन्हें कोई ज्ञान नहीं था, इसलिए मामला लटका रह गया। 1991 में सिंह ने डायरेक्टर चकबंदी विभाग को पत्र लिखा कि उनकी पैतृक जमीन का रकबा चकबंदी में कम हो गया है, उसे पूरा किया जाए।

बतौर सिंह, जुलाई 1995 में चकबंदी विभाग ने अपने कर्मचारियों की गलती मानते हुए उसकी भरपाई करने का आदेश दिया था।

उन्होंने तहसीलदार के रीडर, हलका गिरदावर और जिला राजस्व अधिकारी पर मानसिक शोषण करने का आरोप लगाते हुए सीएम को पत्र भेजकर पूछा है कि क्या हमारे अच्छे दिन आएंगे।

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